भारत ने ऑस्ट्रलिया को 2-1 से हरा कर टेस्ट सीरीज पर कब्ज़ा कर लिया। न सिर्फ गावस्कर बॉर्डर ट्रॉफी पर अपने पास बरकरार रखी है बल्कि ऑस्ट्रेलियाई धरती पर अब तक कि पहली टेस्ट सीरीज जीत भी दर्ज की है। स्वाभाविक है जीत से खिलाड़ी से लेकर कोच और समर्थकों में खुशी की लहर है। जीत की खुशी में रवि शास्त्री विवादित बयान दे गए।

 

भारतीय टीम के कोच रवि शास्त्री ने प्रेस कॉफ्रेंस में कहा कि यह टेस्ट सीरीज जीत 1983 वर्ल्ड कप और 1985 वर्ल्ड सीरीज से भी बड़ी जीत है। जिसके बाद प्रसंशको में बहस छिड़ गई है कि आखिर क्यों रवि शास्त्री बार बार पुराने कप्तानों की उपलब्धियों को कमतर कर के आंकते है। गौरतलब है कि इंग्लैंड दौरे पर भी एक टेस्ट जीतने के बाद रवि शास्त्री ने कोहली की टीम को भारत की अब तक कि सर्वश्रेष्ठ टीम घोषित कर दिया था। आम तौर से लोगो का मत रहा है को सौरव गांगुली की कप्तानी वाली टीम इंडिया अब तक कि सबसे बढ़िया टीम रही है और ये बात किसी से छुपी नहीं है कि गांगुली और शास्त्री के सम्बंध मधुर नहीं है। इसीलिए रवि शास्त्री को सचिन, सेहवाग, द्रविड़, लक्ष्मण, कुंबले जैसे स्टार खिलाड़ियों से सुसज्जित गांगुली की टीम से बेहतर कोहली की टीम लगती है। रवि शास्त्री के योगदान पर कुछ इस तरह क्रिकेट समर्थकों ने चुटकी ली

 

1983 में विश्व क्रिकेट में अजेय माने जाने वाली वेस्ट इंडीज की टीम को कपिल देव की टीम ने हरा कर पहली बार विश्व कप जितवाया था। 1985 में सुनील गावस्कर की कप्तानी में अजेय रहते हुए ऑस्ट्रेलिया की विकट परिस्थितियों में भारत ने वर्ल्ड सीरीज जीती थी। 2007 और 2011 में धोनी की कप्तानी के विश्व कप जीतना भी भारत के लिए अविस्मरणीय पल था। पर बड़बोले कोच रवि शास्त्री तुलना कर के फिर विवादों में आ गए है और जम कर ट्विटर पर ट्रोल हो रहे है।

 

एडिलेड में पहला टेस्ट जीतने के बाद रवि शास्त्री ने मीडिया के सामने आकर बोला था कि to well with the practice. हमे प्रैक्टिस की जरूरत नहीं। 5 दिन में उनका घमंड चकनाचूर हो गया था जब भारत पर्थ में बुरी तरह हार गई थी। इसमें कोई संदेह नहीं कि ऑस्ट्रेलिया में बड़ी जीत मिली है पर रवि शास्त्री को समझना होगा कि अति उत्साह और अहंकार में टीम को दिग्भर्मित न करवा दे। जून 2019 में होने वाले विश्व कप को ज्यादा समय शेष नहीं है। रवि शास्त्री को चाहिए कि टीम का फोकस खेल पर हो न कि विवादों और बयानबाजी पर।