अगर आप अपनी ज़िंदगी से निराश हैं तथा हाशमी दवा खाने से दवा लेने और डॉ बत्रा से बाल उगवाने के बाद भी ज़िंदगी में कोई परिवर्तन नहीं हो रहा तो तालकटोरा स्टेडियम नई दिल्ली से चल रहे यीशु के दरबार से रामबाबू ही अब कृपा की उम्मीद हैं।

 

ज़िंदगी का झंडा हाथ में उठाकर चलो या बिछाकर उसी पे सो जाओ। एक न एक दिन तो फटना ही है लेकिन ये सोचकर हम ज़िंदगी के झंडे को अपने ज़िंदगी के बोझ तले दबे जा रहे चरमराते शरीर से उठाकर दुनियाँ को दिखाने के लिए अकड़कर न चलें, हो ही नहीं सकता। कसम निर्मल बाबा की, चटनी खाना छोड़ देंगे, कृपा भी रुक जाए तो भी कोई गम नहीं लेकिन दो कौड़ी की ज़िंदगी को हमने कृशकाय दींन हीन मलीन हुए शरीर से फुटबॉल न बना दिया तो हमारा नाम फलाना नहीं।

अब हुआ यूँ ज़िंदगी की रेल में ठेलमपेल धक्के खाने के बाद किसी ने कहा कि निर्मल बाबा के चक्कर में बहुत दिनों से चटनी चबाए जा रहे हो बे। देखो तुम्हारी दिल्ली में भगवान से डायरेक्ट टेक्स्ट मेसेज करने वाले आये हैं, उनके दरबार में आते ही लोग साउंड एनर्जी को इलेक्ट्रिकल एनर्जी में बदलने लगते हैं, कोई कोई मोहतरमा तो भीड़ में से फर्श पर लुढ़कते हुए 1440 आरपीएम का टॉर्क जेनेरेट करने लगती हैं। उन्होंने आगे बोला तुम्हें पता है – जीजस की कृपा से 5 मिनट के अंदर ही आपकी अधोजटाएँ शीर्षाभिमुख होकर आपके सर के चंद्रमा को लीलकर आपको फिर से युवा बना सकती हैं। हमारी आँखें फ़टी की फटी रह गईं, आंखों की पुतलियां 180 स्टेरेडियन पर घूम गई और ऐसा लगा जैसे हमें 2G से सीधा 5G में अपग्रेड होने का मौका मिल गया हो।

हमने आव देखा न ताव, फौरन अपने जुपिटर पर राजा की तरह सवार हुए और पहुंच गए वहां जहाँ जीजस के PA रामबाबू के साथ साथ श्री परमदंश १००८ श्री श्री रायताश्रेष्ठ युगपुरुष राजरतन आरोपशिरोमणि चरणपादुकाधारक गजगजवस्त्राभूषित जिल्लेइलाही दिल्ली के सुल्तान और उनके वफादार टॉम क्रूज भी आये हुए हैं। गुरु जी को देखकर हमारी आंखें भर आईं; हां! मैं परमदंश रायताश्रेष्ठ को अपना गुरु मानता हूँ। अतएव हमारी बांछें गज-गज भर खिल गईं और हम किसी परीलोक के भगोड़े शहजादे समान प्रतीत होने लगे।

पूरा ऑडिटोरियम हिंदुओं से खचाखच भरा हुआ, जीजस बस अब से कुछ ही देर में महानुभाव रामबाबू से सीधे लाइव बातें करेंगे। अगले ही पल महानुभाव से अपनी गर्दन को 180° के कोण को मोड़ते हुए हमारा इंट्रोडक्शन जनता ये कहकर करवाया कि जीजस ने हमें ही अपना दूत बनाकर उनके पास भेजा है, और हमारी खिली हुई बांछें और खिलकर गेंदे के फूल बन गईं। हमें भरोसा ही नहीं हो पा रहा था कि हमारे ज़िंदगी का झंडा तो पहले से ही शोक सागर में डूबा हुआ पाताल गमन कर रहा था, 2 हफ्ते से चटनी खाने के पैसे नहीं थे तो ये अचानक से प्रचण्ड कृपा कहाँ से प्राप्त हो गई। खैर, उसके बाद जो मैंने देखा उसका विवरण तो आप लाइव देखिए यूट्यूब पर, महानुभाव ने अपने हाथों से ऐसी शक्तियां छोड़ी की लोगों के अंदर का जानवर ऐसे तड़फने लगा कि नेशनल स्कूल और ड्रामा के स्टूडेंट्स भी उन लोगों को गुरु मान लें।

एक लड़का हिरन जैसी कुलाचें मारता हुआ महानुभाव के चरणों में लोट रहा था, हाथों से निकलने वाली किरणें किस तकनीक के माध्यम से इतने सारे लोगों को नियंत्रित कर रही थी ये स्वयं आईआईटी खड़गपुर से पढ़े लिखे इंजीनियर कम टैक्स अधिकारी कम मुख्यमंत्री कम युगपुरुष कम गुरुजी जानें। हमने जिज्ञासावश गुरुजी की ओर उत्तर के लिए देखा गुरु जी तत्काल सौरभ को फ़ोन लगाया। अब सौरभ ने जैसे ही हैंड मेड EVM का कच्चा चिट्ठा खोला था ठीक वैसे ही बाबा के तकनीकी ज्ञान की व्याख्या की जो इस प्रकार है –

  1. बाबा के हाथ 1500 आरपीएम के टॉर्क को मैग्नीफाय करके 15000 तक पहुचा सकते हैं।

  2. बाबा के पैर मैग्नेटिक लेविएशन तकनीक से किसी को भी हवे में उड़ाकर अपने पास तक पटक सकते हैं। बाबा ने इस तकनीक का कॉपीराइट जापानी भक्तों को दे दिया था जिसके बाद ही बुलेट ट्रेन विकसित की गई।

  3. बाबा वायरलेस पॉवर ट्रांसमिट कर सकते हैं, उन्हें से तकनीक भूतकाल में जाकर निकोल टेस्ला को दी थी।

  4. बाबा मानव शरीर के ऊतकों को निचोड़कर विद्युत उत्पादन कर सकते हैं इसी वजह से उनके कार्यक्रमों में लोग कम से कम 1500 आरपीएम पर घूमते हुए अदृश्य डायनमो से कनेक्ट हो जाते हैं और फिर मेकैनिकल एनर्जी को इलेक्ट्रिकल एनर्जी में बदल दिया जाता है।

  5. बाबा अपने शरीर शरीर में कितना भी चार्ज स्टोर कर सकते हैं जिसकी वजह उनकी कैपेसिटी धरती की कैपेसिटी के बराबर हो जाती है; यही पोटेंशियल डिफरेन्स पॉवर ट्रांसमिशन में सहायक होता है जिसकी वजह से ये दुनियाँ चल रही है।

इतना प्रचण्ड एक्सप्लेनेशन सुनकर ऐसे लगा जैसे हमें अब 11.2 किलोमीटर/सेकंड की रफ्तार पकड़कर इस धरा से पलायन कर लेना चाहिए और तत्काल प्रभाव से यीशु के इस दूत ने उस कार्यक्रम से विदा लिया और आपके समक्ष ये हास्यास्पद वृतांत रखा।

खैर, ये सब तो हास्यविनोद के लिए था लेकिन सोचने वाली बात ये है कि ढोंगियों ने हमें चारों ओर से घेर रखा है। धन्य हैं ऐसे लोग जो ऐसे ढोंगियों के चक्कर में पड़ जाते हैं, धन्य हैं वे पढ़े लिखे लोग तो ऐसे कार्यक्रम को ऑर्गनाइज करवाते हैं और अपने बच्चों को इनकी संस्थाओं में पढ़ाते हैं जो मानव तस्करी करते हुए बच्चे बेचने में तक पकड़ी जाती हैं।

देश कहाँ जा रहा है ये किसे फिक्र है। ?