इतने टाइम से विपक्ष और ‘लिबरल पत्रकार’ ब्रिगेड बन्दर की तरह गुलाटियां मार रहा हैं। कभी बताता हैं कि लोकतंत्र खतरे में हैं, कभी पूरा भारत खतरे में हैं, कभी अल्पसंख्यक खतरे में हैं, कभी देश की सहिष्णुता खतरे में आ जाती हैं तो कभी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता खतरे में आ जाती हैं। पता नहीं इतने खतरे ये कहाँ से लाते हैं, सिर्फ भगवान ही जनता हैं, वैसे असली बात तो यही हैं कि ये खुद, इनका खानदान, इनके आर्थिक हित और इनके तरह की राजनीति खतरे में हैं। पुलवामा हमले के बाद, थोड़ा मौका मिला था, लेकिन ज्यादा राजनीति नहीं हो पायी, सिर्फ यही पुछा जा सका की 56 इंच का सीना कहाँ हैं, जवानों की शहादत का बदला कब लिया जायेगा? लेकिन देश थोड़ा अलग मूड में था और अमन की आशा वालो से दो दो हाथ करने को तैयार था। सो विपक्ष थोड़ा मन मसोस कर बैठा था।

अब सर्जिकल स्ट्राइक-2, इनके गले की हड्डी बन गयी हैं, न उगलते बनता हैं, न निगलते। समर्थन करते हैं, तो नरेंद्र मोदी के हाथ मज़बूत करते हैं। नहीं करते हैं, तो देश विरोधी छवि बनती हैं। सभी उत्सुक थे कि अब ये इस त्रिशंकु वाली स्थिति से कैसे निबटेंगे? हमारे वीर जवानों की तेरहवीं के दिन सुबह -सुबह ही सर्जिकल स्ट्राइक-2 की खबर आयी। देश के धधकते सीने में थोड़ी ठंडक पहुंची। लोग सड़क पर आ कर अपनी सेना और सरकार का मनोबल बढ़ाने में लग गए। अब विपक्ष क्या करे?

सर्जिकल स्ट्राइक सुबह तड़के 3:30 पर हुई थी, मोदी का फोटोशूट वाला हथियार भी इस बार काम नहीं आएगा। मोदी पूरी मुस्तैदी से लगा हुआ था और उन तक पल-पल की खबर पहुंचाई जा रही थी।

विपक्ष की थोड़ी बहुत रणनीति कुछ नेताओ के ट्वीट से ही साफ़ हो गया। पुलवामा हमले के ठीक बात योगेंद्र यादव का सीधा ट्वीट आया, की इस हमले का नरेंद्र मोदी जो भी जवाब देंगे, उसका राजनितिक फायदा नहीं उठाएंगे।

राहुल गाँधी का ट्वीट आया लेकिन बेचारे मोदी का कही नाम नहीं हैं।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का भी ट्वीट आया।

यहाँ भी मोदी जी गायब हैं।

पत्रकारों का भी ट्वीट आया, जिसमें जानीमानी पत्रकार बनाम ट्रोल स्वाति चतुर्वेदी भक्तों को लानत भेज रही थी, कि भक्तजन खुश न होवो, जो किया हैं सेना ने किया हैं, तुम लोगों का कोई योगदान नहीं हैं। इनके हिसाब से अगर पीवी सिंधु ने ओलिंपिक में चांदी का तमगा जीता हैं, तो सिर्फ वही खुश हो, हम भक्तजन थोड़े गए थे मैच खेलने। दो-चार स्ट्रोक हमने थोड़े ही मारे थे सिंधु के साथ?

जबकि यही स्वाति चतुर्वेदी जी पुलवामा हमले के बाद नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार ठहरा कर उन्हें ट्रोल कर रही थी। मतलब की  आतंकी हमला हो तो सरकार फेल और जब उसका बदला लिया जाए तो मोदी को कोई क्रेडिट नही, सेना ने किया। बहन, आप पत्रकार हैं या विपक्ष की नेता?

अब सेना की भी बात कर ली जाए, और यह जान लिया जाए की सेना के साथ इस सर्जिकल स्ट्राइक का क्रेडिट मोदी को क्यों मिलना चाहिए।

अब हमारे परम आदरणीय लेफ्ट लिबरल्स को इतना तो पता ही हैं कि, हमारी सेना, नेवी और वायुसेना पिछले 13 दिनों में ही सक्षम नहीं हुई हैं। हमारी सेना तो पता नहीं कब से पूरी दुनियां में सर्वोत्तम में से एक हैं। हमारे रणबांकुरों यूनाइटेड नेशंस के न जाने कितने ऑपरेशन्स सफलतापूर्वक अंजाम दे कर घर आ जाते हैं। पकिस्तान को हर लड़ाई में धुल चटाई हैं लेकिन हमारे राजनेता उनकी जीत को ‘बातचीत की टेबल’ पर हारते रहे हैं। हमारी सेना 26/11 के बाद भी पकिस्तान को सबक सीखने में सक्षम थी, लेकिन हमारे ‘बेचारे एक्सीडेंटल प्रधानमंत्री’ को “सही जगह” से जवाबी कार्यवाही के आदेश ही नहीं आये, उनका कुछ इरादा भी रहा होगा तो बेचारे मन मसोस कर रह गए होंगे। अब यही बात है, जिस पर विपक्ष और लेफ्ट लिबरल जान लगा देगा, कि मोदी को सर्जिकल स्ट्राइक-2 का कोई श्रेय न मिले। लेकिन अब भक्तजन भी कमर कस के बैठे हैं। आ जाइये मैदान में।

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