साक्षी ने तो अपने पिता को जीते-जी मार डाला, इतना मजबूर और लाचार बाप बनकर रह गए राजेश मिश्रा कि घर के मसले पर दुनिया जहान के सामने ज़लील होते रहे, बेटी घर से भागकर, न्यूज़रूम में बैठकर उनकी इज़्ज़त की धज्जियाँ उड़ा रही है और एंकर कहते हैं ‘जनता न्याय करेगी’।

एंकर बेटी के आरोप पर बाप का पक्ष जानना चाहते हैं लेकिन उस लड़की का पक्ष नहीं जानना चाहते जिसके साथ अजितेश उर्फ़ अभि सिंह नायक ने दहेज के लिए सगाई तोड़ दी थी, साक्षी को पूरा हक़ है अपना जीवन साथी चुनने का लेकिन किस क़ीमत पर? और ये मीडिया कब से तय करने लगा।

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क्या साक्षी का बाप भाजपा विधायक ना होता और अजितेश-साक्षी ने इसे जाति का मुद्दा ना बनाया होता तो मीडिया में बैठे स्वघोषित जज इस मुद्दे पर 6-6 घंटे नॉन-स्टॉप लाइव डिबेट करते, मीडिया पक्षपातपूर्ण ख़बरें तो परोस रहा था लेकिन इस हद दर्जे तक गिर जाने को भी ‘पत्रकारिता’ कहा जाएगा?

मीडिया के पास संसद सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले महत्वपूर्ण विधेयक और उसपर हो रही चर्चा दिखाने का वक़्त नहीं था, हफ़्ते तक संसद सत्र की ख़बर देने की फ़ुर्सत नहीं थी लेकिन जैसे ही दलित-सवर्ण का लव एंगल बनता दिखाई दिया साक्षी के मामले में, 6-6 घंटे बिठाकर रखा दोनों को स्टूडियो में, हद तो तब हो जाती है जब साक्षी के पिता यानी भाजपा विधायक राजेश मिश्रा के बार-बार कहने पर कि ‘उनकी बेटी जहाँ रहे ख़ुश रहे, उसको किसी प्रकार का ख़तरा नहीं’, बार-बार पूछा गया कि क्या वे इस रिश्ते को स्वीकार करते हैं, क्या वे इस सवाल का जवाब देने को बाध्य थे? ये उनका बेहद निजी मसला था जिसे राष्ट्रीय ख़बर बनाकर उनके परिवार की इज़्ज़त को तार-तार करने में मीडिया में बड़ी भूमिका निभाई।

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अपनी बेटी के भले-बुरे की चिंता उसके माता-पिता नहीं करेंगे तो क्या लाइव डिबेट करने वाले ये एंकर चिंता करेंगे? पाल-पोस के बड़ा करने वाले माँ-बाप ने कभी सोचा होगा कि उनकी बेटी को डाँटना-फटकारना इतना भारी पड़ सकता है कि उनको मीडिया ट्रायल का सामना करना होगा, किचेन-बाथरूम और बेडरूम तक घुस चुकी इस मीडिया और इसके आका ख़ुद ऐसे मामले में स्पेशल बुलेटिन चलाते या कभी चलाएँगे? कोफ़्त होने लगी है अब तो अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर चरित्र-हनन करने वाले इस व्यापार को पत्रकारिता का नाम देते देखकर।

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लेखक कमल कुमार युवा पत्रकार है, यहाँ क्लिक करके उन्हें ट्विटर पर फॉलो कर सकते है।

1 COMMENT

  1. आखिर ये मीडिया वालो को खुली छूट किस संविधान के तहत दी गई है कि किसी के गैरत किसी के परिवार और समाज का जनाजा निकाल दे,,,,
    बेटी के पिता से अनुरोध है कि न्यूज चैनल वालो पर मानहानि का मुकद्द्मा लिखायें।

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