हम आपको अक्सर राजनेताओं के दोहरे मापदण्ड के बारे में बताते रहते हैं। वैसे भी राजनीति का ये वो दौर चल रहा है जहाँ पर विचारधारा, नैतिकता, सिद्धान्त, उसूल कुछ भी मायने नहीं रखता है। अगर कुछ मायने रखता है तो वो है आपका ‘मोदी विरोध’। ये वो विरोध है जिसमे इंसान का दिमाग काम करना पूरी तरह से बंद कर देता है। आपको अपनी कही हुई ही बात आपके अपने विरोध में लगती है। उदाहरण के तौर पर कुछ समय पहले बताया था कि कुछ लोगों ने कैसे पहले एक सीबीआई चीफ की नियुक्ति का विरोध किया और फिर उन्हीं लोगों ने उसी सीबीआई चीफ के हटाने पर भी विरोध किया। ठीक कुछ ऐसा ही मामला आज फिर दुबारा हुआ है।

कल हमनें आपको बताया कि कैसे ममता बनर्जी की तानाशाही का कुछ नेता समर्थन कर रहे हैं। आज हम आपको बताते हैं कि वो ऐसा क्यों कर रहे हैं, उनकी क्या मजबूरी है?

कल ममता बनर्जी ने सीबीआई पर पुलिस से हमला करवाया। केंद्र ने CRPF भेजकर सीबीआई दफ्तर और अधिकारियों को आजाद करवाया। किसी एक राज्य में संवैधानिक संस्था और उसके लोगो को बचाने के लिए CRPF लगानी पड़ रही है इससे आप उस राज्य की स्तिथी को समझ लीजिये, ऐसे हालात तो कश्मीर में भी नहीं है जो बंगाल में ममता बनर्जी ने बना दिए हैं।

राहुल गाँधी पूरी तरह ममता बनर्जी के साथ है, कल राहुल गाँधी ने ममता बनर्जी से बात की और उनका पुरजोर समर्थन भी कर दिया। इतना ही नहीं कांग्रेस पार्टी के लगभग हर नेता ने ममता का समर्थन किया और कांग्रेस के कई वकील भी ममता के समर्थन में एक्टिव हो गए हैं। राहुल गाँधी का कहना है की वो ममता बनर्जी के साथ कंधे से कन्धा मिलकर खड़े है, ममता के समर्थन में राहुल गाँधी ने मोदी को ‘फासीवादी’ तक बता दिया।

अब हम आपको सिर्फ 3 साल पहले का राहुल गाँधी का बयान दिखाते है, ये बयान है 23 अप्रैल 2016 का, देखिये राहुल गाँधी ममता पर क्या कह रहे हैं।

हावड़ा में राहुल गाँधी ने कहा कि बंगाल में माफिया राज चल रहा है, सिंडीकेट का राज चल रहा है, बंगाल में ममता राज है, जिसे राहुल ने माफिया राज बताया था, ममता को माफिया बताया था।

2014 में राहुल गाँधी ने ममता को भ्रष्ट्र बताते हुए ये भी कहा था कि बंगाल में 20 लाख लोगों को लुटा गया है।

2016 में राहुल गाँधी की पार्टी ने ममता बनर्जी के खिलाफ बंगाल में विधानसभा का चुनाव लड़ा था। तब राहुल गाँधी की पार्टी ने घोटालों को लेकर मोमता बनर्जी को घोटालेबाज कहा था, ममता को फासीवादी, सिंडीकेट, माफिया तक कहा था।

सिर्फ 3 साल पहले राहुल गाँधी ने ममता बनर्जी को माफिया, भष्ट्र बताया था और आज कह रहे है कि मैं ममता बनर्जी के साथ हूँ। अगर झूठ बोलने, मक्कारी करने, अपनी बात से पलटने का कोई ओलंपिक में खेल होता तो हमारे देश के कई सारे नेता ‘स्वर्ण पदक’ जरूर लेकर आते।

अगर मोदी विरोध का मौका हो तो देश की तमाम राजनैतिक पार्टियाँ पाकिस्तान और चीन के साथ भी खड़ी हो जाने को तैयार हैं। ये कोई अतिश्योक्ति नहीं है, आपने मणिशंकर अय्यर, सलमान खुर्शीद, नवजोत सिंह को सुना ही होगा कि कैसे मोदी को हटाने के लिए पाकिस्तान से गुहार लगा चुके हैं। राहुल गांधी आए दिन गुप्त रूप से चीन के अधिकारियों से मिलते रहते हैं। अरविंद केजरीवाल का खालिस्तानी के साथ कनेक्शन खुलकर सामने आ चुका है।

देश के खिलाफ एक भयंकर षड्यंत्र रचा जा रहा है, जिसकी आम जनता को भनक तक नहीं है। आए दिन देश और संविधान को चुनौती दी जा रही है। ऐसे में हमारा फर्ज़ बनता है कि हम ऐसी ताक़तों का पुरजोर तरीके से विरोध करें।

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