लेखन एक ऐसी विधा है जिसका उद्देश्य अपनी बात लोगों तक पंहुचाना होता है फिर चाहे वो नाम के साथ हो नाम के बगैर। कहने का मतलब कई लेखक अपने नाम के साथ प्रसिद्ध हुए तो कई लेखकों की बातें फेमस हुई पर नाम गुमनाम रहा। ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं जब कई बड़े शख्सियतों ने छद्म नामों से बहुत कुछ लिखा है। ख़ास कर के आजादी की लड़ाई के वक़्त कई बड़े-बड़े करान्तिकारियों ने छद्म नाम से अंग्रेजों के विरुद्ध क्रांति की इबारत लिखी। इन क्रांतिकारियों में सबसे प्रमुख थे शहीद-ए-आज़म भगत सिंह। भगत सिंह अपने कानपुर प्रवास के दौरान गणेश शंकर विद्यार्थी के अखबार प्रताप में कार्यरत रहे और बलवंत सिंह के छद्म नाम से नौजवानों को स्वतंत्रता संग्राम के प्रति प्रेरित करने वाले विचार लिखा करते थे।

यही छद्म लेखन की शैली आज भी चलती है। सोशल मीडिया भी इससे अछूता नहीं है। आज सोशल मीडिय पर कई लोग छद्म नाम से अपनी राजनीतिक सोच व्यक्त करते हैं। इनमे अलग अलग सभी तरह की राजनीतिक विचारधारा के लोग मौजूद हैं जो अपनी सोच को अपनी पहचान छुपा कर लोगों तक पहुँचाते हैं।इनमे से ज्यादातर व्यंगात्मक लहजे में दूसरी विचारधारा के नेताओं पर ट्वीट करते हैं। कहने का मतलब छद्म नाम से लिखना कुछ गलत नहीं है।

अब मुद्दे की बात पर आते हैं। एक वेबसाईट है AltNews जिसके सह संस्थापक है प्रतीक सिन्हा। इन्हें नाम और पहचान छुपा कर ट्वीट करने वाले से समस्या है। इनकी वेबसाइट के बारे में बताया जाता है की यह एक फैक्ट चेक वेबसाईट है जिसमे न्यूज़ का फैक्ट चेक किया जाता है की कहीं वो फेक तो नहीं है। यह काम सराहनीय है पर कुछ दिनों से इस वेबसाईट के माध्यम से ऐसे छद्म नाम वाले सोशल मीडिया के लोगों को पब्लिक करने का काम किया जा रहा है जिनमे से ज्यादातर एक विशेष विचारधारा से सम्बन्ध रखते हैं।

प्रतीक सिन्हा ने शुक्रवार को एक ट्वीट में कुछ ट्विटर हैंडल्स ने नाम और लोकेशंस पब्लिक कर दिए जो छद्म नामों से ट्विटर पर लिखते थे। अपने ट्वीट में प्रतीक सिन्हा ने लिखा “यह व्यंग के नाम पर गलत खबर को वायरल करने वाला समूह है” इसके बाद उन्होंने पांच ट्विटर हैंडल्स को उनके वास्तविक नाम और लोकेशन के साथ शेयर किया। पाँचों हैंडल्स जो आमतौर पर राईट विंग से संबंधित विचारधारा को अपने ट्वीट के माध्यम से रखते हैं और अपने विरोधी विचारधारा के लोगों पर अपने ट्वीट के माध्यम से कटाक्ष करते हैं।

इन पांच के अलावा प्रतीक सिन्हा ने एक और राईट विंग का समर्थन करने वाले हैंडल @squintneon की निजी जानकारियाँ पब्लिक की हैं। अपने दूसरे ट्वीट में प्रतीक ने इस बार यह भी बताया की इस हैंडल के पीछे का व्यक्ति एक राज्य के ABVP सोशल मीडिया इंचार्ज हैं। हालाँकि यह हैंडल फिलहाल ट्विटर के द्वारा सस्पेंड कर दिया गया है पर एक दूसरे हैंडल से इस व्यक्ति ने ट्वीट करते हुए लिखा है की प्रतीक सिन्हा ने उनकी निजता भंग की है जिसकी वजह से उन्हें धमकियाँ मिल रही हैं और उन्हें भविष्य में कुछ भी हानि पहुँचती है तो इसके जिम्मेदार प्रतीक सिन्हा होंगे।

अब हमारे कुछ सवाल हैं प्रतीक सिन्हा और ट्विटर इंडिया से

मैं पहले ही बता चुका हूँ कि छद्म लेखन का पुराना इतिहास रहा है ऐसे में ये गलत तो कतई नहीं हो सकता है। फिर भी अगर कोई अफवाह फैलाता है छद्म नामों से तो उसके खिलाफ कानूनी शिकायत की जा सकती है। लेकिन उसकी निजता को पब्लिक करना किस हद तक सही है??

अब छद्म लेखन की बात आयी ही है तो बात ध्रुव राठी की कर लेते हैं। ध्रुव किसी अज्ञात लोकेशन से यूट्यूब पर वीडियो डालते हैं। ध्रुव से जब भी उनकी लोकेशन पूछी जाती है तो वो कहते हैं कि इससे उनकी निजता को खतरा पहुँच सकता है। हम उनकी निजता का सम्मान करते हैं, ये उनका अधिकार है। लेकिन ध्रुव हमेशा मोदी सरकार के खिलाफ जहर उगलते हुए दिखाई देते हैं। ऐसे में वो बहुत बार फेक न्यूज़ का भी सहारा लेते हैं। तब क्या किसी ने ध्रुव की निजता का हनन किया? नहीं ना, क्योंकि वो राइट विंग के नहीं है इसलिए।

ऐसे में ट्विटर इंडिया पर सवाल उठता है कि वो हमेशा एक विशेष विचारधारा के अकाउंट क्यों सस्पेंड करता है? जबकि फेक न्यूज़ तो दोनों तरफ से शेयर की जाती है फिर एकतरफा बर्ताव क्यों?

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