कल पाकिस्तान की संसद में जैसे ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने घोषणा की, ‘भारतीय पायलट विंग कमांडर अभिनंदन को कल छोड़ा जाएगा।’ इमरान खान के इतना कहते ही भारत में बैठे कुछ मसीहा पत्रकार, तथाकथित बुद्धिजीवी और विपक्षी नेता अपने एजेंडे की तरफ तेजी से सक्रिय हो गए। इमरान खान को ‘अमन का पैगम्बर’ या ‘शांति का मसीहा’ साबित करने में ये सभी जुट गए हैं। यही नहीं ये लोग भारत के प्रधानमंत्री को उतना ही कोस रहे हैं।

सबसे पहले कॉन्ग्रेस पार्टी की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी का ट्वीट देखिए..

कैसे भारतीय पायलट विंग कमांडर अभिनन्दन का अपमान करते हुए उन्हें पाकिस्तानी झंडे के साथ दिखाया है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पीछे भाजपा का झंडा लगा है। अब कांग्रेस पार्टी की मानसिकता का अंदाजा लगा सकते हैं कि कैसे पाकिस्तानी झंडे और इमरान ख़ान का प्रचार-प्रसार करने में व्यस्त हैं।

देश के स्वघोषित निष्पक्ष पत्रकार राजदीप सरदेसाई की ट्वीट देखिए, इनकी ट्वीट देख कर तो लगता ही नही की यह भारतीय हैं।

कहा जाता है कि आम लोगों की स्मरणशक्ति कमजोर होती है। लेकिन कुछ भारतीय विश्लेषकों ने तो उनका भी रिकॉर्ड तोड़ दिया। वे पुलवामा, युद्ध विराम उल्लंघन और पाक वायुसेना के अतिक्रमण को भूल कर इमरान खान में मदर टेरेसा की छवि देखने लगे हैं। बस अब नोबेल शांति पुरस्कार की सिफारिश ही बची है।

अब इन्हीं निष्पक्ष पत्रकार की पत्नी सागरिका घोष का ट्वीट देखिए

हमला पाकिस्तान ने किया था, अभिनंदन सिर्फ़ सेल्फ़-डिफ़ेन्स में निकले थे, आक्रमण करने नहीं। भारत ने कह दिया था बिना शर्त छोड़ो, हमारे पाइलट को खरोंच भी आयी तो छोड़ेंगे नहीं। इतने दबाव में झुकने वाले को हमारे यहाँ “शांति का मसीहा” कहते हैं।

हालांकि भारतीय वायु सेना ने स्पष्ट शब्दों में कहा, अभिनंदन को जिनेवा संधि के तहत छोड़ा गया है। उन्होंने पाकिस्तान और इमरान खान का आभार व्यक्त करने से भी मना कर दिया।

आइए जानते हैं क्या सच मे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अमन पसंद हैं?

इमरान खान शांति को लेकर इतने संजीदा हैं कि कल भाषण में 25 बार उन्होंने कहा कि भारत हमला करेगा तो हमें जवाब तो देना होगा। फिर भाषण खत्म करके बैठ भी गए। बाद में याद आया कि शांति का संदेश देना तो भूल ही गए। फिर खड़े होकर WC अभिनंदन को रिहा करने का एलान किया। इमरान खान ने मसूद अजहर के लिए एक शब्द नहीं कहा। उनके मंत्री उनके सामने आतंकी सरगना को मसूद अजहर ‘साहब’ बुला रहे थे फिर भी कुछ नहीं कहा गया उनसे। इमरान खान इतने ही बड़े शांति के पुजारी हैं तो मसूद अजहर और हाफ़िज़ को भारत के हवाले कर दें। भारत में आतंकी हमले बंद कर दें, पाक की सरज़मीं पर आतंकी संगठनों को पालना बंद कर दें। फिर भारत भी उनका दोस्त बनकर रहेगा।

Leave a Reply