एग्जिट पोल में बीजेपी को प्रचंड बहुमत से सरकार बनाते देख मीडिया संस्थानों में बैठे विपक्षी दलों के हमदर्दों की भी बेचैनी बढ़ गई है। स्वघोषित निष्पक्ष समाचार चैनल एनडीटीवी के स्वघोषित निष्पक्ष पत्रकार की छटपटाहट सबसे ज्यादा है। उनकी बेचैनी देख एक आम इंसान को भी ताज्ज़ुब हो जाएगा कि भला एक पार्टी की जीत-हार से इन पत्रकारों को क्या चिंता है।

दरअसल, वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने एग्जिट पोल देखकर अपना असली रंग दिखा दिया है। 19 मई की शाम को एग्जिट पोल दिखाते हुए वो अपनी ही बिरादरी के, जो उनसे सहमति नहीं रखते हैं, लोगों पर बीजेपी की जीत का कटाक्ष कर रहे थे। अपने मेहमान से उनका कहना था कि आने वाली बीजेपी की सरकार में कुछ पत्रकारों एवं चैनल मालिकों को भी केंद्रीय मंत्री एवं राज्य मंत्री का पदभार सौंपा जाना चाहिए। आपको बता दें कि रवीश कुमार सिर्फ उन्हीं को अच्छा पत्रकार मानते हैं, जो उनसे सहमति रखते हैं और सिर्फ कांग्रेस की भक्ति करते हैं। एक और बात, रवीश कुमार का चैनल भी बीजेपी को 300 से ज्यादा सीटें जीता रहा था।

उनके इस कटाक्ष पर आजतक के वरिष्ठ पत्रकार रोहित सरदाना ने तीखा हमला बोला। आपको बता दें कि रोहित रोज शाम को डिबेट शो ‘दंगल’ के बाद लाइव चैट के माध्यम से दर्शकों से रूबरू होते हैं और उनके सवालों का जवाब देते हैं। इसी चैट में एक दर्शक ने उनसे कहा कि काला स्क्रीन वाले पत्रकार कुछ पत्रकारों को मंत्री बनाने की बात कह रहे हैं। इस पर रोहित ने कहा कि कुछ न्यूज एंकर्स या चैनल मालिकों को मंत्री क्यों बनाया जाना चाहिए? उन्होंने आगे तंज कसते हुए कहा कि तब मंत्री क्यों नहीं बनाया गया, जब ये लोग अपने दफ्तर में बैठकर मंत्रीमंडल डिसाइड करते थे?

रोहित ने रवीश कुमार की पूरी पोल खोल दी। उन्होंने बताया कि कैसे पिछली सरकारों में कौन कौन मंत्री होगा, इसका फैसला ये लोग करते थे और अपने अनुसार मंत्री बनवाते थे। रोहित ने सिर्फ रवीश कुमार को ही नहीं, बल्कि फर्जी खबर चलाने के आरोप में एबीपी न्यूज से बाहर किए गए अभिसार शर्मा को भी निशाने पर लिया। अभिसार शर्मा भी रवीश कुमार गैंग के ही सदस्य हैं। रोहित ने एग्जिट पोल को लेकर अभिसार शर्मा की आपत्ति पर कहा, “जिन लोगों को धान और गेहूँ में फर्क नहीं पता, वो हमें बताएंगे कि क्या कैसे होगा? पहले जब ये लोग एग्जिट पोल दिखाते थे, तो पैसे लेकर दिखाते थे? अपने इसी रवैए के कारण आज बाहर सड़क पर हैं।” अभिसार शर्मा ने बीजेपी को जिता रहे एग्जिट पोल्स को अपने यूट्यूब वीडियो में पीएमओ से मैनेज्ड एग्जिट पोल बताया था।

दरअसल, दिक्कत ये है कि पिछले पांच सालों में रवीश कुमार एंड कंपनी की ऐसी हालत हो गई है कि वो बाकी विपक्षी पार्टियों की तरह मोदी को हटाने के लिए और उनके खिलाफ फर्जी प्रोपेगैंडा चलाने के लिए तरह तरह के मुद्दे खोजते हैं। ये महोदय मोदी विरोध में उस व्यक्ति का खुलेआम समर्थन करते एवं क्रांतिकारी बताते हैं, जिस पर देशद्रोह का आरोप है और दिल्ली पुलिस ने 1200 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है।

सोशल मीडिया पर रवीश कुमार की सच्चाई समय समय पर सामने आती रहती है। कुछ न्यूज एंकर्स को मंत्री बनाने के लिए व्यंग्य करने वाले पत्रकार महोदय लोकसभा के चुनाव प्रचार में उत्तर प्रदेश में महागठबंधन के मंच पर नजर आए थे। ध्यान देने वाली बात ये है कि एक बार जब देशद्रोह के आरोपी कन्हैया कुमार ने अपना एजेंडा चलाने के लिए इनसे मंच पर आने को कहा, तो इन साहब ने कहा, “मैं तो अपना काम नहीं छोड़ सकता। इसलिए मैं मंच के नीचे ही रहूंगा।” बाद में अपना काम ना छोड़ने की बात करने वाले मायावती-अखिलेश की साझा रैली में उनके मंच पर नजर आते हैं।