Christchurch Terror Attack : न्यूजीलैंड (New Zealand mosque shooting) के क्राइस्टचर्च शहर (Christchurch Mosque) में 2 मस्जिदों पर हुए हमले को ब्रेंटन टैरंट नामक व्यक्ति ने अंजाम दिया है। इतने भयानक नरसंहार के आरोपी दुनिया के सामने आया तो लोग चौक पड़े कि आखिर इसने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया। इस हमले में 12 साल की एक छोटी बच्ची एब्बा एकरलैंड (Ebba akerlund) की हत्या का बदला लिए जाने की बात कही जा रही है जो स्टॉकहोम में अप्रैल 2017 में हुए आतंकी हमले में मारी गई थी।

इस हमले के पहले हमलावर ने एक Facebook Live किया था, और एक फेसबुक पोस्ट लिख कर हमले के कारणों को विस्तार से बताया। ऑस्ट्रेलियाई मूल के हमलावर ब्रेंटन टैरंट ने इन दो मस्जिदों पर हमला करने से पहले 74 पेज का एक मेनिफेस्टो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया था। जिसमें वो हमले की कई वजह बताता है जिसमें से एक है एब्बा एकरलैंड की मौत। उसने अपने मेनिफेस्टो में बताया कि उसे किस घटना में इतना बड़ा नरसंहार करने के लिए मजबूर किया। उसने लिखा “यह हमला एब्बा एकरलैंड का बदला लेने के लिए हो रहा है।”

कौन थी एब्बा एकरलैंड


एब्बा एकरलैंड 12 साल की छोटी बच्ची थी जो अप्रैल 2017 में स्टॉकहोम में हुए आतंकी हमले में मारी गई थी। उस हमले में पांच लोगों की मौत हुई थी। 2017 में इस हमले को इस्लामिक आतंकी रख्मत अकिलोव ने अंजाम दिया था। इस हमले को उसने एक हाईजैक की हुई बियर लॉरी से अंजाम दिया था। रख्मत ने इस बियर लॉरी से लोगो को कुचलते हुए एक डिपार्टमेंटल स्टोर से भिड़ा दिया था, बियर की इस ट्रक में एक बम होने की भी बात कही गई थी। रख्मत उज्बेकिस्तान से था, और इस हमले के पीछे उसने वजह दी थी कि वो स्वीडन को इस्लामिक स्टेट के विरुद्ध खड़े होने की सजा देना चाहता था।

रख्मत ने जब इस आतंकी हमले को अंजाम दिया था तब एब्बा वहीं थी। उस समय उसे मिसिंग घोषित किया गया था। जब उसके माता-पिता ने सोशल मीडिया पर उसकी तस्वीरें डाल कर उसे ढूंढने का अनुरोध किया था, तब  पुलिस ने बताया कि घर के लिए पैदल वापस आते वक़्त एब्बा उस आतंकी हमले का शिकार हो गई थी।

जेहादियों ने उस बच्ची को मरने के बाद भी नही छोड़ा, उस घटना के  एक साल बाद 2018 के नवम्बर में एब्बा के पिता स्टेफान ने कहा कि उनकी बेटी की कब्र को कोई छेड़ कर, और उसे गन्दा कर चला जाता है। उस आदमी की पहचान उन्होंने एक प्रवासी के रूप में की जिसे स्वीडन से निकाल दिया गया है, लेकिन फिर भी वो यहीं पर है। उसने और भी कई कब्रों को बर्बाद किया है।

एब्बा एकरलैंड के साथ हुई यह ज्यादती ब्रेंटन टैरंट को भड़का गयी। उसने उस दर्द को हमले के पहले अपने मेनिफेस्टो में साझा करते हुए लिखा, ‘घुसपैठियों के हाथों एब्बा की मौत, उसकी हिंसक हत्या की बेहूदगी और उसे रोक ना पाने की मेरी मजबूरी, मुझे चीर गई और मेरी नफरत बढ़ गई। मैं और इस तरह के हमलों को नज़रंदाज़ नहीं कर पाया।’

हालांकि इस हमले को लोग इस्लामोफोबिया की वजह से हुआ हमला बता रहे हैं जो कि सही भी है, लेकिन इसके साथ इस इस्लामोफोबिया का इलाज भी समझना बेहद जरूरी है। यह समझने की जरूरत है कि आखिर न्यूज़ीलैंड में एक साधारण नागरिक को बंदूक उठाने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ा?

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