इलाहाबाद विश्व विद्यालय ने नियम बनाया है कि सामान्य कार्यक्रमों में किसी भी राजनैतिक व्यक्ति का आना जाना उचित नहीं है,सबने पालन भी किया है। पर अखिलेश यादव ज़िद पर अड़े हैं कि हम तो जाएँगे बिना बुलाए जाएँगे। कल उन्हें लिख कर भी दिया गया कि आप जैसे महत्वपूर्ण व्यक्ति बिना इजाज़त के आए शोभा नहीं देता।

ऊपर से सबको मालूम है प्रयाग राज में इस समय कुम्भ चल रहा है। वहाँ बिना बुलाए बिना इजाज़त पहुँच कर विश्व विद्यालय के छात्रों को भड़काना उकसाना इसका अर्थ क्या हो सकता है।

योगी सरकार ने ऐक्टिव मोड में कार्यवाही करते हुए अखिलेश यादव जी को लखनऊ में ही रोक दिया कि ऐसे बिना बुलाए बिना इजाज़त रोके जाने के बावजूद ज़बरदस्ती विश्व विद्यालय छोड़िए, प्रयागराज ना पहुँचने दिया जाएगा। वैसे भी वो जमाना गया जब कुम्भ जैसे महापर्व को हल्के में लिया जाता था।

समय का चक्र बदलता है

वैसे ज्ञात हो कि कुछ दिन पहले इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रांगण में बमबाजी हुई थी, याद रहे अखिलेश यादव ने ऐसी ही स्थिति में मुख्यमंत्री रहते ‘सांसद’ योगी आदित्यनाथ पर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के अंदर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। आज वक़्त बदला है किरदार बदले हैं। ऐसा ही कुछ अखिलेश यादव के साथ हो रहा है।

जो लोग अखिलेश यादव को रोके जाने पर उबल पड़े हैं। वो लोग तब क्यों शांत थे जब योगी के हेलीकाप्टर को ममता सरकार ने बंगाल में उतरने नहीं दिया था, तब विपक्ष के लिए ममता दीदी ठीक थीं। आज योगी गलत है। सब तरफ सुविधा की राजनीति का बोलबाला है।

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