पासपोर्ट नियमो को दरकिनार कर तन्वी सेठ उर्फ सादिया को हाथों हाथ पासपोर्ट देने के लिए विदेश मंत्रालय और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की सोशल मीडिया पर जम कर ट्रोलिंग हुई थी, पासपोर्ट विभाग ने चौतरफा हो रही इस किरकिरी से बचने के लिए पासपोर्ट बनवाने के नियम ही 26 जून को बदल डाले थे, और इन्ही नए नियमो के तहत सादिया को पासपोर्ट जारी कर दिया गया था, अब खबर हैं कि विदेश मंत्रालय ने सादिया अनस को पासपोर्ट देने के लिए जो दिखावे का नियम बनाया था, उसे गुपचुप तरीके से बदलकर फिर वापस पुराना नियम लागू कर दिया।

क्या था नया नियम
नए नियम के तहत कोई भी आवेदक देश में कहीं से भी पासपोर्ट आवेदन कर सकता है। वहीं एक जून से एक नया नियम लागू करने की बात कही गई जिसके मुताबिक पुलिस वेरिफिकेशन में अब केवल यह देखा जाएगा कि आवेदक के खिलाफ कोई अपराधिक मुकदमा तो दर्ज नहीं है और उसकी नागरिकता दिए गए पते पर हैं की नहीं। इस नियम में पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट न आने पर भी पासपोर्ट जारी करने की व्यवस्था की गई। पासपोर्ट विभाग ने एक जून और 26 जून के नियम को ढाल बनाकर ही तन्वी सेठ उर्फ सादिया के पासपोर्ट को दो जुलाई को हरी झंडी दे दी थी।

फिर से पुराना नियम लागू
बहरहाल यह जो दिखावे का नियम पासपोर्ट विभाग ने बनाया था, उसे गुपचुप तरीके से बदल दिया गया। यानी अब देश में कहीं भी पासपोर्ट आवेदन के बाद पुलिस वेरिफिकेशन में आपराधिक रिकॉर्ड और नागरिकता का सत्यापन का आदेश बदल दिया गया। अब पूर्व की तरह ही आवेदकों को अपने बताए पते पर पुलिस सत्यापन के समय मौजूद रहने और बिना वेरिफिकेशन रिपोर्ट के पासपोर्ट जारी न करने का आदेश लागू कर दिया गया है। दरअसल हुआ यह कि पुराने नियमो को बदल कर सादिया को पासपोर्ट देने के बाद लोगो ने सोशल मीडिया पर एक बार फिर विदेश मंत्रालय को घेर लिया, और लोगो ने सादिया की तरह ही अपने लिए भी पुलिस वेरिफिकेशन में प्रतिकूल प्रविष्टि के बावजूद पासपोर्ट की माँग करनी शुरू कर दी, और साथ मे पासपोर्ट विभाग पर धार्मिक तुष्टिकरण का भी आरोप लगाया।

बहरहाल अब जबकि तन्वी सेठ उर्फ सादिया के पासपोर्ट को हरी झंडी मिल गई है, पासपोर्ट विभाग ने फिर से पुरानी व्यवस्था लागू कर दी है। इससे उन हजारों लोगों को अब पासपोर्ट मिलने की उम्मीद पर पानी फिर गया है जिसमें पुलिस वेरिफिकेशन की प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज है।

इस घटना का क्या असर पड़ेगा भारतीय पासपोर्ट की विश्वसनीयता पर
पासपोर्ट विभाग के अहंकार और धार्मिक तुष्टिकरण जैसी बातों को अगर हम दरकिनार भी कर तो यहाँ बड़ा सवाल यह उठता हैं कि सादिया-अनस को जिस तरह से नियमो में फेरबदल करके पासपोर्ट जारी हुआ उससे हमारे देश की छवि उन देशों में क्या बनेगी जो हमारे देश के पासपोर्ट पर आंख मूंद कर भरोसा करते आये हैं? जो देश यह मानते हैं कि अगर कोई व्यक्ति भारत का पासपोर्ट लेकर आया है, तो यह माना जा सकता है कि उसकी पहचान, आपराधिक रिकॉर्ड आदि बातों की जांच करने के बाद ही उसे पासपोर्ट मिला होगा।

दुनिया के सभी देश अपने अपने पसन्द के देशों को पासपोर्ट पर कई तरह की सुविधा देते हैं, जिसमे “वीजा ऑन अराइवल” से लेकर बिना वीजा के भी सिर्फ पासपोर्ट पर उनके देश मे घुमा जा सकता हैं। भारत को भी दुनिया के ऐसे 55 देशों में यह सुविधा मिलती हैं, अमेरिका और सिंगापुर के नागरिक तो सिर्फ पासपोर्ट पर ही 160 देशों में ऐसी सुविधाएं मिलती हैं।

सोचिये अगर ऐसा हुआ तो क्या होगा? भारतीय पासपोर्ट को विदेशों में सन्देह की दृष्टि से देखा जाने लगेगा, लाखों भारतीय नागरिक हर साल नौकरी, पर्यटन, व्यापार, उपचार, शिक्षा आदि अनेक कारणों से विदेश जाते हैं, उन्हें शायद अतिरिक्त पूछताछ और सवाल-जवाब से गुज़रना पड़ेगा। जो देश आज वीज़ा-मुक्त आवागमन की सुविधा देते हैं, संभव है कि उनमें कुछ कमी हो जाए, जो देश हमें आज बिना वीज़ा के घुसने नहीं देते हैं, हो सकता है कि वे अपने नियम और कड़े कर दें। किसी भी संभावना को आप नकार नहीं सकते।