“दारुल उलूम के युवा मौलवी सेना में बनेंगे धर्म गुरु”- इस हेडलाइन के साथ लुटियंस मीडिया द्वारा एक न्यूज़ छापी गई है। मीडिया अच्छे से जानती है कि इस देश में सिर्फ हेडलाइन पढ़कर तांडव करने वालों की कमी नहीं है। अगर आप पूरा आर्टिकल पढ़ेंगे तो स्वयं स्पष्ट हो जायेगा कि सेना में सभी धर्मों के धर्मंगुरु दशकों से भर्ती करे जाते रहे हैं। इसमें कुछ नया नहीं है। पर मीडिया इस न्यूज़ को भी “सबका विश्वास” के स्पेशल नैरेटिव के साथ चला रही है। पिछले 1 महीने में ऐसी तमाम खबरें हमने देखी, जिसमे “सबका विश्वास” को सिर्फ मुसलमानों से जोड़कर लुटियंस मीडिया द्वारा स्पेशल नैरेटिव चलाया जा रहा है। अभी तो ये शुरुआत है! लुटियंस मीडिया का यह गिरोह केंद्र सरकार के “सबका विश्वास” को सिर्फ मुसलमानों से जोड़कर 5 साल तक यही स्पेशल नैरेटिव चलाएगा। क्योंकि उनको मालूम है संगठित हिन्दुओं को कैसे तोड़ना है।

आइए फैक्ट चेक करते हैं इस ख़बर का-

इंडियन आर्मी में विभिन्न धर्मो के धार्मिक शिक्षकों कि भर्ती होती है। ये भर्ती आज से नहीं अंग्रेजों के जमाने से होती चली आ रही है, लेकिन न्यूज़ की हेडलाइन पढ़कर ऐसा प्रतीत होता है, जैसे ये मोदी जी के “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास” का मंत्र देने के बाद से सेना द्वारा धर्मगुरुओं की भर्ती की जा रही है। पिछले साल भारतीय सेना में 96 धार्मिक शिक्षकों की भर्ती के लिए सेना की तरफ से नोटिफिकेशन जारी किया गया था। जिसमे सबसे अधिक 81 हिन्दू धर्म गुरु (पंडित) की भर्ती हुई थी। इसके अलावा 6 सिख धर्मगुरु (ग्रंथि), 6 मुस्लिम मौलवी (5सुन्नी, 1 शिया), 2 ईसाई धर्म गुरु (पादरी) और 1 बौद्ध धर्म गुरु (महायान) की भर्ती हुई थी।

Source: Indian Army website

सेना की हर रेजिमेंट में मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च, बौद्ध और मठ अगल बगल बने होते है। इन धर्म स्थलों के लिए पंडितों, ग्रंथि, मौलवी, पादरी, महायान की भर्ती भारतीय सेना द्वारा की जाती है। इन विभिन्न धर्मो के धर्मगुरुओं का काम पूजा पाठ तक ही सीमित होता है। एक बात हमेशा ध्यान रहे सेना में धर्म को देश से ऊपर नहीं माना जाता। सेना के नियम कायदे बहुत सख्त हैं। अगर आप ड्यूटी पर हो तो फलाहार, इफ्तार इत्यादि ड्यूटी के बाद ही कर सकते हो।

जब से सेना में सैनिकों द्वारा अपने ही साथियों/अफसरों की हत्या या आत्महत्या की घटनाएं होने लगीं, तब से धर्मगुरुओं का महत्व और ज़्यादा बढ़ गया है। इन धर्मगुरुओं की ड्यूटी है कि वो सैनिकों के वेलफेयर का ध्यान रखें और उन्हें मानसिक रूप से तनाव मुक्त रखें। आजकल सेना में भी योग की कक्षाएं लगाई जाती हैं, जिससे सैनिक तनाव मुक्त रहें।

आपको बता दें कि विभिन्न धर्मों के धर्मगुरुओं की शैक्षिक योग्यता निर्धारित है। इनकी नियुक्ति सिपाही के पद पर नहीं होती, बल्कि सीधे नायब सूबेदार के पद पर होती है। हज़ारों युवक इस पद के लिए बाकायदे तैयारी करते हैं, क्योंकि इसकी लिखित परीक्षा बेहद कठिन होती है।

हमारा आपसे निवेदन है कि जागरूक रहिए, क्योंकि लुटियंस मीडिया द्वारा प्रमुखता से दिखाई गई हर एक नकारात्मक न्यूज़ के पीछे एक छिपा एजेंडा अवश्य होता है। सही न्यूज़ और गलत न्यूज़ के बीच पहचान करना सीखिए। किसी भी भ्रामक न्यूज़ पर भ्रमित होकर राय मत बनाइए।