हाल ही में सिक्किम सरकार ने घोषणा की है कि सन 2022 तक राज्य में यूनिवर्सल बेसिक इनकम (Universal Basic Income) नीति लागू कर दी जाएगी। यदि ऐसा सम्भव होता है तो सिक्किम यूनिवर्सल बेसिक इनकम फॉर्मूला लागू करने वाला भारत का पहला राज्य हो जाएगा।

दरअसल बेसिक इनकम का विचार दुनियाँ भर में बेसिक इनकम अर्थ नेटवर्क (Basic Income Earth Network) के कार्यकर्ता फैला रहे हैं। इस वर्ष BIEN congress 22 से 25 अगस्त तक हैदराबाद में होने वाली है। अब अगर बात की जाए इस विचारधारा की तो इसमें हर व्यक्ति एक निश्चित समयांतराल में एक निश्चित राशि अपने बैंक एकाउंट में पाता है, इसमें नकद राशि ही दी जाती है नाकि कोई कैश वाउचर या कूपन। ये राशि हर व्यक्ति को दी जाएगी नाकि परिवार के किसी एक व्यक्ति को, ये राशि हर व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव के दी जाएगी। इस विचारधारा के पीछे ये तर्क है कि बेरोजगारी/गरीबी को खत्म किया जा सके तथा हर व्यक्ति के पास जीने के पर्याप्त राशि हो।

अब सवाल उठता है कि जिन देशों में गरीबी नहीं हैं वहां भी यूनिवर्सल इनकम की मांग क्यों उठ रही है? इसका कारण है ऑटोमेशन। जिन फैक्टरी में पहले काफी व्यक्ति काम करते थे अब वहां महज कुछ मशीनें काम कर रही हैं; भविष्य में कई क्षेत्र ऐसा हैं जिनमें ऑटोमेशन की वजह से नौकरियां जाने वाली हैं। इसलिए लोगों के जीवनस्तर को बनाये रखने के लिए ये मांग उठ रही है। विकसित देशों में तो ये सम्भव भी नजर आता है परन्तु भारत जैसे देश में, जहां पहले से ही लोग गरीबी रेखा के नीचे जी रहे हैं और यहां की जनसंख्या पहले से ही काफी ज्यादा है; सरकार ऐसी योजनायें नहीं चला सकती। इस समय केंद्र सरकार 950 से ज्यादा योजनाएं चला रही है यदि इनकी जगह एक यूनिवर्सल इनकम की योजना आ जाये तो देश का हर वर्ग और हर व्यक्ति लाभान्वित हो सकता है। अभी हमारी जीडीपी का लगभग 5% हिस्सा इन योजनाओं में खर्च हो जाता है; इसमें से भी प्रथम 11 योजनाएं कुल खर्च का 50% ले लेती हैं। मनरेगा, यूरिया सब्सिडी, फ़ूड सब्सिडी और आयुष्मान भारत आदि योजनाओं को चलाने में केंद्र सरकार काफी पैसा खर्च देती है जबकि इनके एक विशेष वर्ग के लोग ही लाभान्वित हो पाते हैं।

अब बात की जाए यूनिवर्सल इनकम के विचार की तो भारत में ये 2016-17 के इकनोमिक सर्वे ऑफ इंडिया के एक चैप्टर में दिया गया था। हालांकि कुछ लोग ऐसा सोचते हैं कि यदि लोगों के बैंक खातों में बिना कुछ किये सीधे पैसे आने लगेंगे तो लोग आलसी हो जाएंगे और कोई काम नहीं करेंगे। इसके अध्ययन के लिए मध्यप्रदेश में 2011-12 के सत्र के दौरान SEWA और यूनीसेफ के पायलट प्रोजेक्ट चलाये गए और अध्ययन में ये पता चला कि लोग और ज्यादा काम करने के लिए प्रयासरत हुए, उनकी क्षमता बढ़ गई।

सिक्किम यानि भारत का सबसे कम आबादी वाला राज्य, पहला पूर्ण आर्गेनिक और खुले में शौचमुक्त राज्य; सम्पूर्ण भारत के लिए अग्रदूत का काम कर रहा है। 2004-05 से 2011-12 तक सिक्किम ने अपने राज्य में गरीबी का स्तर 22% से हटाकर 8% तक कर दिया। वहीं शिक्षा का स्तर जहां 2001 में 68.8% था वहीं अब ये 82.2% तक पहुंच गया है; कई क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर 98% तक है। हाल ही में सिक्किम ने ‘एक परिवार एक नौकरी’ योजना शुरू की है जिसका लक्ष्य 16000 नई नौकरियां सृजित करने का रखा गया है। ऐसे में यदि सिक्किम यूनिवर्सल इनकम स्कीम को सफलतापूर्वक लागू कर देता है और इसके परिणाम अनुकूल रहते हैं तो ये शेष भारत में ऐसी योजना के लिये बाकी के राज्यों को भी प्रोत्साहित करेगा।

उम्मीद करते हैं कि सिक्किम का ये कदम सफल हो और ये भारत सरकार के लिए भी एक नई दिशा तय करे।