राफेल डील से जुड़ी फाइल गायब होने के अटॉर्नी जनरल के सुप्रीम कोर्ट में दिए बयान को लेकर सियासत तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने राफेल मुद्दे (Rafale Deal) को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) पर निशाना साधा।

अरविंद केजरीवाल की माने तो मोदी ने राफेल की फाइल चोरी करवायी। फिर वो फाइल प्रशांत भूषण को दे दी कि लो मुकदमा करो। फिर उसकी फोटोकॉपी एन. राम को दे दी, लो सरकार के खिलाफ खबर छापो।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस सरकार में सब गायब हो रहा है। फाइल से सीधे प्रधानमंत्री मोदी का भ्रष्टाचार जुड़ा है और इस पर कार्रवाई होनी चाहिए। राहुल गांधी का ट्वीट देखिए

वे एक ही खबर पर दो तरह से नैरेटिव तैयार होते हैं, ताकि चित भी मेरी पट भी मेरी।
नैरेटिव 1 – राफेल के दस्तावेज चोरी हो गये, चौकीदार चोर है।
नैरेटिव 2 – सरकार राफेल दस्तावेज चोरी होने की बात कह कर एन राम और प्रशांत भूषण को फँसाने की साजिश कर रही है।

दरअसल ये पूरा मामला फाइल का नहीं बल्कि राफेल डील से जुड़े दस्तावेज की एक कॉपी का है। आपको याद होगा कुछ दिन पहले “द हिन्दू” अखबार ने राफेल पर एक भ्रामक आर्टिकल छापा था और सबूत के तौर पर दस्तावेज के एक पन्ने कि फोटो को क्रॉप करके आर्टिकल के साथ अटैच किया था। फिर इसके थोड़ी देर बाद ही हमनें “द हिन्दू” की पोल खोल दी थी और चारो तरफ “दा हिन्दू” अखबार की थू-थू हो रही थी, फोटो को कांट छांट करके सरकार के विरुद्ध इस्तेमाल करने के लिए।

इसी दस्तावेज को आधार बनाकर प्रशांत भूषण, अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में राफेल डील पर पुनर्विचार याचिका दायर की है। राफेल डील से जुड़ा यह दस्तावेज “द हिन्दू” को कैसे मिला इसकी जांच सरकार कर रही है। यह दस्तावेज किसी सरकारी कर्मचारी ने ही “द हिन्दू” तक पहुंचाया है।

हालांकि इस सम्भावना से भी इंकार नही किया जा सकता कि सरकार बदली थी अफसर नहीं, हो सकता हैं उन्ही में से किसी एक ने कांग्रेस को दिया हो, और कांग्रेस अपना दामन साफ रखने के चक्कर मेंं the hindu या भूषण को दे दिया हो।

बहरहाल राफ़ेल में पुनर्विचार याचिका की सुनवाई के दौरान कल सरकार की तरफ से अटार्नी जनरल ने कुछ ज़बरदस्त बिंदु रखे हैं। आइए उन्हें भी जान लेते हैं।

1. हर बार कोई एक डॉक्युमेंट चुरा कर एक अख़बार पब्लिश कर देता है, सूत्रों के हवाले से। सरकार इस पर कार्यवाही करेगी?

2. अदालत इस मामले को वैसे ही ले रहा है जैसे कोई AdmistraAdmin के मसले की सुनवाई हो रही हो। कल को अगर युद्ध हो तो क्या अदालत से अनुमति लेनी होगी कि बम फेंके या ना फेंके?

3. दुनिया के किसी भी देश में रक्षा सम्बंधी उपकरणों पर खुली अदालत में ऐसी बहस नही होती जैसी इस अदालत में हुई। दुश्मन देश भारत की युद्धक तकनीक अदालत से जान जाएँगे।

4. अब यह क़ानूनी लड़ाई से ज़्यादा राजनैतिक लड़ाई हो गई है। अदालत के बयानों को तोड़-मरोड़ कर राजनीति में प्रयोग करता है विपक्ष।

5. अंत में यह कि राफ़ेल भारत के लिए बहुत ज़रूरी है। बार-बार इस पर राजनीति ना की जाए। साथ ही अदालत भी ये ध्यान दे कुछ मुद्दे उसके दायरे से बाहर के होते हैं, जिनमे यह भी है।

बहरहाल यह तो कोर्ट में दिए तर्को की बात हैं, लेकिन राफेल जैसे महत्वपूर्ण और गोपनीय डील के कागज इस तरह से रक्षा मंत्रालय से चोरी होना गम्भीर मामला हैं। इस तरह की गम्भीर चूक के बाद सरकार पर यह  सवाल उठना लाजिमी है की अगर दस्तावेज चोरी हो गए तो वह अब तक क्यों चुप रही और उसने क्या कार्रवाई की? अदालत को पहले ही क्यों नहीं बताया गया कि दस्तावेज चोरी हुए हैं और अब तक पुलिस में रिपोर्ट में दर्ज क्यों नहीं हुई? सरकार को जल्द सेे जल्द रक्षा मंत्रालय के भेदिये का पता लगाना चाहिए, यह सीधे सीधे देशद्रोह का मामला बनता हैं। ऐसे गद्दारों पर कठोर करवायी कर स्पष्ट सन्देश देना चाहिए की देश के हितों के खिलाफ गद्दारी करने वालो को बख्शा नही जाएगा।

Leave a Reply