जब जब चुनाव आते है, तब तब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी हिन्दू समुदाय को लुभाने के लिए विभिन्न तरीको के साथ जनता के बीच पहुँच जाते है। राजस्थान के अजमेर में चुनाव प्रचार के दौरान वह ब्रह्मा मंदिर और पुष्कर सरोवर गए। वहाँ पंडितजी के पूछने पर उन्होंने अपने ‘गोत्र’ (वंशावली) के बारे में एक बड़ा नया खुलासा किया है। पुष्कर सरोवर में प्रार्थना करते हुए उन्होंने कहा कि उनका ‘गोत्र’ कौल दत्तात्रेय है।

वैसे राहुल गाँधी के लिए ऐसा करना कोई मुश्किल कार्य नहीं है। जब जब चुनाव की घोषणा होती है, प्रत्येक नेता अपने आप को धर्मनिरपेक्ष साबित करने में जुट जाता है, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की बात ही निराली है। जब से मोदीजी के नेतृत्व वाली BJP केंद्र में सत्ता में आई है, तब से प्रत्येक चुनाव के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष पर हिंदू बनने का जूनून स्वर हो जाता है। चुनाव आते ही उन्हें हिन्दू धर्म का आकर्षण होने लगता है और वह अपनी धार्मिक मान्यता को बदलकर लोगों को भ्रमित करना शुरू कर देते है।

पिछले साल गुजरात विधानसभा चुनाव समाप्त होते ही राहुल गाँधी ने कुछ मंदिरों की भेंट की। इसी सिलसिले में सबसे पहले वह कैलाश मानसरोवर गए और अब जब  राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में चुनाव होने है तो वह अपने ‘मिशन मंदिर’ के साथ एक बार फिर जनता को भ्रमित करने में लगे हुए है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के धर्म पर विवाद वास्तव में उनके सोमनाथ मंदिर की यात्रा के बाद से शुरू हुआ था। पिछले साल नवंबर में, राहुल गांधी ने कांग्रेस राज्यसभा के सांसद अहमद पटेल के साथ सोमनाथ मंदिर का दौरा किया था। मंदिर के ‘मुलाकाती रजिस्टर’ में राहुल गांधी का नाम गैर हिंदू की सूचि में लिखा गया था।

सोमनाथ मंदिर परिसर में स्पष्ट रूप से यह सुचना लिखी हुई है, ‘यह एक हिंदू मंदिर और गैर हिंदू अनुमति लेने के बाद ही परिसर में प्रवेश कर सकते हैं। मंदिर में प्रवेश करने से पहले गैर हिंदुओं को रजिस्टर में अपन विवरण भरना होगा।‘ विवाद का कारण यह था की राहुल गांधी ने सोमनाथ मंदिर में एक गैर हिंदू के रूप में प्रवेश किया था| इस विवाद के बाद, रणदीप सुरजेवाला ने राहुल गाँधी के बचाव में कहा था की “राहुल गांधी सिर्फ एक हिंदू नहीं बल्कि एक जनेऊधारी (हिंदू पुरुषों द्वारा पहना गया एक पवित्र धागा) हिंदू” है।

राजस्थान और मध्यप्रदेश में  चुनावों के लिए प्रचार शुरू होने के साथ, राहुल उज्जैन के महाकाल मंदिर में दिखाई दिए और फिर भारतीय जनता पार्टी ने राहुल से उनकी वंशावली के बारे में पूछा। इस चुनावो में राहुल गाँधी ना सिर्फ हिन्दू बने घूम रहे है लेकिन उन्होंने अपना खुद का गोत्र भी बना लिया है। चुनाव प्रचार के आखिरी चरण में राहुल गांधी दावा कर रहे है कि वह ‘कौल दत्तात्रेय’ गोत्र से संबंधित हैं।

अब ऐसे में राजनैतिक इतिहासकारों का कहना है कि फिरोज खान का पोता कौल ब्राह्मण कैसे हो सकता है। राहुल गांधी के माता सोनिया गांधी, ईसाई है और पिता राजीव गांधी के पिता फिरोज गांधी धर्म से पारसी थे, और उन्होंने इंदिरा गांधी से विवाह किया था। जबकि हिन्दू धर्म के शास्त्रों के अनुसार पिता के पक्ष का गोत्र ही पुत्र का होगा, तो अब सवाल यह उठता है कि ऐसे में राहुल गांधी किस प्रकार स्वयं के ब्राह्मण होने का दावा कर सकते हैं।

बहरहाल, घोटाला सिर्फ यही नही हैं घोटाला उनके ‘दत्तात्रेय गोत्र’ का भी हैं, क्योकि विद्वान ब्राह्मणों से बात करने के बाद उन्होंने बताया की दत्रात्रेय नाम का कोई गोत्र ही नही हैं। दरअसल गोत्र ऋषियों के नाम से होते हैं, वह भी सिर्फ विवाहित ऋषियों के नाम से, तो ऐसे में दत्रात्रेय कोई गोत्र नही हो सकता क्योंकि दत्तात्रेय तो अविवाहित और ब्रह्मचारी थे।

बहरहाल जनता बहुत अच्छी तरह से जान चुकी हैं कि यह कांग्रेस की सस्ती रणनीति के अलावा कुछ भी नहीं है ताकि वे अपने नेता को सच्चे हिंदू के रूप में चित्रित कर सकें, क्योकि बदलते वक्त में राजनीति के मायने बदले हैं, और अब राजनीति जाति धर्म से उठकर विकास के नाम पर होना ही जनहित में है।