Seभारतीय सेना के लिए बुलेट प्रूफ हेलमेट, बुलेट प्रूफ जैकेट के बाद अब बेहद कम लागत में बुलेट प्रूफ गाड़िया ‘मेक इन इंडिया’ प्रोग्राम के तहत भारत में बनाई जा रही है। इस गाड़ी का नाम Mahindra Marksman APC (Armoured Personnel carrier) है। यह पूरी तरह से बुलेटप्रूफ और ग्रेनेड प्रूफ वाहन है। यानी इस वाहन पर ग्रेनेड हमले का भी कोई असर नहीं होगा। आपको बता दें, आतंक के खिलाफ अभियानों में इस तरह की गाड़ियों की जरूरत की मांग भारतीय सेना और सुरक्षाबल बेहद लम्बे समय से कर रहे थे।

Mahindra Marksman APC एक कैप्सूल आधारित बुलेटप्रूफ बख्तरबन्द गाड़ी है जिसका विशुद्ध रूप से मेक इन इंडिया प्रोग्राम के तहत निर्माण किया गया है। आपको बताते चले कि मार्क्समैन LMG (Light Weight Machine Guns) और ग्रेनेड का सामना बिना किसी खास क्षति के कर सकती है। 

आइए जानते हैं इसकी तकनीक के बारे में जो इसे सिर्फ 57 लाख की लागत में भी सटीक, सुरक्षित और ख़ास गाड़ी बनाती है।

यह बख्तरबन्द गाड़ी 10 मीटर दूरी और 90 डिग्री कोण से अपनी तीनों तरफ, दाएँ बाएँ और पीछे की और से फायर की गई से तीन तरह की ख़तरनाक गोलियों को झेल सकती है। जैसे कि 7.62x51mm NATO Ball M80, 7.62x39mm Ball PS, 5.56x45mm Ball M193. ये गोलियाँ आज के वक्त में बेहद ख़तरनाक मानी जाती हैं। यह बख्तरबन्द ग़ाडी ऊपर से चलाई गई गोलियों (हेलीकॉप्टर से चलाई गई) के साथ साथ 45 डिग्री के कोण से फेंके गए हल्के बमों को भी बख़ूबी झेल सकती है।

अब बात करते हैं गाड़ी के सुरक्षित फर्श की। महिंद्रा मार्क्समैन गाड़ी के नीचे एक साथ फटने वाले दो DM51 जर्मन हैंडग्रेनेड को बहुत आराम से बिना क्षति के बर्दाश्त कर सकती है। ध्यान देने योग्य बात है कि DM51 ग्रेनेड बहुत ही घातक ग्रेनेड की श्रेणी में आते हैं। मार्कसमैन की छत पर एक भारी मशीनगन लगाई गई है जो 270 डिग्री के कोण तक घूम कर फ़ायर कर सकती है। मार्कसमैन में सात सुरक्षाकर्मी बैठ सकते हैं और गाड़ी के अन्दर हटाई जा सकने वाली स्टेनगन का भी प्रावधान दिया गया है।

गाड़ी के पिछले हिस्से में एक कम्प्यूटराज्ड सक्रीन भी लगी है जो बाहर लगे कैमरों की मदद से गाड़ी के चारों तरफ की हलचल दिखाती है। गाड़ी की छत पर एक सर्च लाईट और एक कैमरा है जिसका कंट्रोल ड्राइवर के हाथ में रहता है। 

गाड़ी के मैकेनिकल विवरण के अनुसार 4.39 मीटर लम्बाई, 1.863 मीटर चौड़ाई, 2.030 मीटर ऊँचाई और 23.73 मीटर घेरे के साथ इसे चलाने के लिए उपयुक्त और घेरे के हिसाब से सुरक्षित बनाती है। 2.49L CRDE BS-3 इंजन, 4X4 ड्राइव, और 120 किमी प्रति घंटा की उच्चतम रफ्तार भी इस विवरण का हिस्सा है।

यह गाड़ी महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स के द्वारा डिज़ाइन की गई है और महिंद्रा एंड महेंद्रा (Mahendra & Mahendra) ने इसे पूर्ण स्वदेशी तकनीकी के साथ इसका भारत में निर्माण किया हैं।

विदेशों में है भारी मांग

मार्कसमैन के उत्पादन के शुरू होते ही निर्यात के आर्डर महिंद्रा एंड महिंद्रा को मिलने लगे थे। अब तक महिंद्रा एंड मंहिद्रा 800 से अधिक बख्तरबन्द गाड़ियाँ बना चुकी है। जिसमें से 562 गाड़ियाँ चिली (Chile) को निर्यात की जा चुकी हैं। ओैर क़रीबन अठारह देशों के आर्डर अभी लाइन में हैं। 

भारत में ये गाड़ी भारतीय सेना, मुम्बई पुलिस, कलकत्ता पुलिस व दिल्ली में अर्धसैनिक बलों द्वारा प्रयोग में लाने का सिलसिला शुरू हो चुका है। पुलवामा हमले के बाद हाल ही में छ: गाड़ियाँ Central Industrial Security Force (CISF) की निगरानी में इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षा बढ़ाने हेतु तैनात की गई हैं।