पिछले कुछ वर्षों से विशेषकर पिछले 3-4 महीनों से राजस्थान के सीमावर्ती जिलों को पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसियों ने अपना टारगेट बना लिया है। सीमावर्ती जिले जैसे बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI ने अपना जाल बिछाना शुरू कर दिया है। पिछले कुछ महीनों से भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसियों ने पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले लोगों को पकड़ने में कामयाबी हासिल की है लेकिन इस क्षेत्र में दिनोंदिन संदिग्ध गतिविधियाँ बढती जा रही है।

भारत-पाकिस्तान सीमा पर तारबंदी होने से पहले बाड़मेर और जैसलमेर जिले पाकिस्तानी तस्करों के लिए सुरक्षित जगह थी लेकिन तारबंदी के बाद वहां से हो रही सोने और मादक पदार्थों की तस्करी पर विराम लग गया है। तारबंदी से पहले यहाँ दूर-दूर फैले रेगिस्तान में आसानी से तस्करी को अंजाम दिया जाता था और साथ ही यहाँ से वो तस्कर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की महत्वपूर्ण जानकारियां आसानी से पाकिस्तान को दे देते थे लेकिन तारबंदी के बाद ये सब बंद हो गया तो पाकिस्तान ने यहाँ रह रहे समुदाय विशेष के युवाओं और भारत-पाकिस्तान के बीच चलने वाली ट्रेन थार एक्सप्रेस को अपना टारगेट कर लिया है।

किस तरह अपना जाल बिछा रही है पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI अपना जाल बिछाने के लिए एक समुदाय विशेष के युवाओं को अपना शिकार बनाती है। इन युवाओं को सोने और हेरोइन जैसी तस्करी का लालच दिया जाता है या फिर सोशल मीडिया पर भारतीय लड़की बनकर जाल में फंसाया जाता है।

गौरतलब है कि समुदाय विशेष की रिश्तेदारी भी पाकिस्तान में काफी है ऐसे में पाकिस्तानी रिश्तेदार से बात करवाकर और पैसे का झांसा देकर भी इनको फंसाया जाता है और ये लोग ख़ुशी ख़ुशी भारतीय सेना की जानकारी और यहाँ के नक़्शे देने को तैयार हो जाते है। उसके बाद जासूसी करने वाले लोगों को पाकिस्तान का नंबर दे दिया जाता है ताकि जिससे वो सोशल मीडिया(whatsapp विडियो कॉल) कर सके या फिर सोशल मीडिया मीडिया से भारत के महत्वपूर्ण ठिकानों के फोटो और दस्तावेज भेज सके।

सीमावर्ती क्षेत्र में पाकिस्तानी मोबाइल नेटवर्क

बाड़मेर और जैसलमेर जिलों के पाकिस्तान से लगने वाली सीमा के आसपास ज्यादातर समुदाय विशेष के लोग ही रहते है, और सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस सीमावर्ती क्षेत्र 50 किलोमीटर के दायरे में पाकिस्तानी टेलिकॉम कम्पनियों का नेटवर्क बड़ी आसानी से मिल जाता है। पाकिस्तानी मोबाइल नेटवर्क वारीद, टेलिनर और पाक पी एल सहित लगभग पांच-छः पाकिस्तानी मोबाइल नेटवर्क आसानी से उपलब्ध हो जाते है। ऐसे में जासूसों को पाकिस्तानी सिम उपलब्ध करवा दी जाती है जिससे भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसियों को भनक भी नहीं लग सके।

थार एक्सप्रेस के जरिये तस्करी और जासूसी

भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली ट्रेन थार एक्सप्रेस बाड़मेर जिले के मुनाबाव-खोखरापार से पाकिस्तान में प्रवेश करती है। इस ट्रेन में आनेजाने वाले यात्री ज्यादातर जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर से होते है और पाकिस्तान से आनेवाले यात्री भी इन्ही जिलों में अपने रिश्तेदारों से मिलने के लिए आते है। ऐसे में पाकिस्तान से नकली भारतीय नोट पाकिस्तानी नेटवर्क की सिमें और कई संदिग्ध चीजें अपने साथ छुपाकर ले आते है और वही पाकिस्तानी सिमें यहाँ जासूसों को उपलब्ध करा दी जाती है।

हाल ही में भारतीय कस्टम टीम ने थार एक्सप्रेस में पाकिस्तानी नागरिक के हवाले से भारतीय नकली नोट पकड़े थे। मुनाबाव में पकड़ी गई भारतीय मुद्रा को जाँच के लिए नासिक भेजा गया। कस्टम विभाग के सह आयुक्त एम.एल.शेरा ने बताया कि नासिक से मिली अंतरिम रिपोर्ट के अनुसार इन नकली नोटों में असली नोटों जैसी सारी विशेषताएं मौजूद है। दरअसल इन नोटों का प्रयोग जासूसों को देने के लिए किया जाता है।

जासूसी का नया तरीका

जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर में अब एक नया तरीका भी पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसियों द्वारा अपनाया जा रहा है। इसके अंतर्गत समुदाय विशेष के उन लोगों को टारगेट किया जाता है जो जासूसी करने में रूचि रखते है। इसके अंतर्गत पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर के रास्ते से जासूसों को को मदरसों के लिए चंदा इक्कठा करने के लिए भेजा जाता है। चंदा इक्कठा करने के बहाने ये पाकिस्तानी जासूस इन जिलों में महीनों तक हर घर और हर खेत तक जाते है और यहाँ से चंदा इक्कठा करने के बहाने महत्वपूर्ण भारतीय ठिकानों की सूचना और यहाँ के नक़्शे वहां तक पहुंचाने का काम करते है और नए लड़कों को जासूसी से जोड़ने का काम करते है।

गौरतलब है कि पिछले महीने कश्मीर के युवक मोहम्मद अरशद पुत्र मोहम्मद सखी निवासी मडहोट, जिला पुंछ, जम्मूकश्मीर को जैसलमेर के मोहनगढ़ क्षेत्र में मदरसे के लिए चंदा इक्कट्ठा करने के बहाने पाकिस्तान के लिए जासूसी करते हुए पकड़ा था। इस वर्ष भी जबसे राजस्थान में नई सरकार आई है तब से संदिग्ध गतिविधियों में भी बढ़ोतरी हुई है।

(लेखक राजस्थान के सीमावर्ती इलाके का रहने वाला है)