चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों को सामूहिक हिरासत में रखने पर 22 देशों की आलोचना के बाद चीन का कई अन्य देशों ने समर्थन भी किया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब, पाकिस्तान, रूस के साथ-साथ 37 के लगभग अन्य देशों ने संयुक्त राष्ट्र संघ में चीन का बचाव किया है। गौरतलब है कि चीन के इस क़दम का समर्थन करने वालों देशों में प्रमुख देश, इस्लामिक देशों के संगठन (OIC) आर्गेनाईजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (Organisation Of Islamic Co-Operation), के सदस्य हैं। इनसे अलग हट कर चीन का समर्थन करने वाले देशों में उत्तरी कोरिया, क्यूबा, और वेनेज़ुएला हैं और चीन के इस क़दम का स्वागत करने वाले शेष सभी इस्लामिक देश हैं।

यूरोपीय संघ के अलावा ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान और कनाडा के राजदूतों ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बेचलेट को पिछले हफ्ते चीन के खिलाफ संयुक्त रूप से पत्र लिखा था। राजदूतों ने चीन को खुद के कानून और वैश्विक जवाबदेही का ध्यान रखने तथा उइगर मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को मनमाने तरीके से नजरबंद न करने की नसीहत दी थी।

इन देशों का कहना था कि चीन में मुसलमानों को धार्मिक स्वतंत्रता दी जानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि शिनजियांग में उइगरों को नजरबंद करने की लगातार आ रही खबरों को लेकर चीन पश्चिमी देशों की तीखी आलोचना का सामना कर रहा है।

वहीँ इस मामले पर संयुक्त राष्ट्र ने चीन को लताड़ लगाई है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने कहा है कि चीन को उइगर मुस्लिमों के मानवीय अधिकारों का सम्मान करना होगा। उन्होंने चीन के शिनजियांग प्रांत के उइगर मुस्लिमों की स्थिति पर चीन के नेताओं के साथ बातचीत के दौरान यह बात कही। महासचिव ने बीजिंग में चीन के बेल्ट एवं रोड फोरम (बीआरएफ) में शामिल होने के बाद यह मसला उठाया था। इस दौरान उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी इस मुद्दे पर बात की थी।

कुछ इस तरह खुद को बचाने की कोशिश कर रहा है चीन :

चीन के शिनजियांग में सुदूर पश्चिम क्षेत्र में स्थित शू ले काउंटी एजुकेशन सेंटर में एक विशाल तीन मंजिला इमारत है। इस इमारत की खिड़कियों पर अवरोध लगे हैं और दरवाजे ऐसे हैं जिन पर सिर्फ बाहर से ताला लगाया जा सकता है। इस इमारत के अंदर सैकड़ों अल्पसंख्यक उइगर मुसलमान हैं, जो बिना किसी सरकारी अनुरक्षण के इमारत से बाहर नहीं निकल सकते।

इस सप्ताह चीनी अधिकारी कुछ विदेशी पत्रकारों के एक समूह को ‘शिक्षा के माध्यम से परिवर्तन’ कहलाए जा रहे इस कैंप के आसपास ले गए थे और उनका कहना था कि सभी उइगर मुसलमान स्वेच्छा से यहां थे। हालांकि, इस सवाल पर कि यदि कोई उइगर मुस्लिम इस शिविर को छोड़ना चाहे तो क्या होगा, शू ले की प्रधानाचार्य ममात अली ने कोई जवाब नहीं दिया। कुछ देर की खामोशी के बाद अली ने कहा, ‘यदि वह नहीं आना चाहते तो उन्हें न्यायिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ेगा।’ उन्होंने कहा कि शिविर में कई लोग ऐसे हैं जो सात महीनों तक यहां रुके।

शू ले शिनजियांग में स्थित अनगिनत पुनर्शिक्षण शिविरों में से एक है। शिनजियांग एक मुस्लिम बहुल क्षेत्र है और यह राष्ट्रपति शी जिनपिंग की एशिया को यूरोप से जोड़ने वाली बेल्ट एवं रोड पहल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि इन शिविरों में 20 लाख से ज्यादा उइगर मुसलमान कैद हैं। हालांकि चीन इस संख्या को स्वीकार नहीं करता है, लेकिन उसने एक स्पष्ट आधिकारिक संख्या भी नहीं बताई है।

बहरहाल, इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा हैरान कर देने वाली खबर सऊदी, पाकिस्तान समेत 34 मुस्लिम देशों का मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारों पर उल्टा चीन का समर्थन करना रहा। इन मुस्लिम देशों ने ना केवल इस पूरे मामले पर चुप्पी साधी बल्कि उल्टा चीन के उत्पीड़न का समर्थन किया। मुस्लिम अधिकारों और मानवाधिकार की बात करने वाले इन मुस्लिम देशों के कदम से वह ईसाई देश भी हैरान रह गए जो चीन के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव लाये थे।