श्रीलंका के कोलंबो में ईस्टर के अवसर पर हुए सिलसिलेवार बम धमाकों की वजह से वहाँ मुस्लिम समुदाय की मुसीबतें कम होने का नाम नही ले रही है। आज (3/06/2018) श्रीलंका सरकार में शामिल सभी मुस्लिम मंत्री, उप मंत्री और राज्य मंत्री ने तत्काल प्रभाव से अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इस बात का खुलासा सदन में मुस्लिम मंत्रियों के लीडर रॉफ हकीम ने किया।

कोलंबो के टेम्पल ट्रीज़ में एक मीडिया ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए हकीम ने कहा कि पद छोड़ने के फैसले के बावजूद सभी मुस्लिम सांसद सरकार के साथ बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि अब वे संसद में बैकबेंचर्स का काम करेंगे। बता दें कि बीते कुछ समय से श्रीलंका में मुस्लिम राजनेताओं का जमकर विरोध किया जा रहा था। सरकार में शामिल मंत्री इन प्रदर्शनों के चलते विशेष रूप से निशाने पर थे।

श्रीलंका में मुस्लिम नेताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

श्रीलंका में मुस्लिम मंत्रियों के खिलाफ लोगों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए सभी से इस्तीफा माँगा गया है। खबरो के मुताबिक श्रीलंका के कैंडी में कई हजार लोगों ने प्रदर्शन करते हुए ईस्टर आत्मघाती बम विस्फोटों के बाद तीन शीर्ष मुस्लिम राजनेताओं को बर्खास्त करने की मांग की। सोमवार को कोलंबो शहर में दुकानें और कार्यालय बंद थे। सोमवार दोपहर दो मुस्लिम नेताओं ने अपने पद से प्रांतीय गवर्नर के रूप में पद छोड़ दिया। राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना के कार्यालय ने इस बात की पुष्टि की। राष्ट्रपति के कार्यालय ने एक संक्षिप्त बयान में कहा कि पूर्वी और पश्चिमी प्रांतों के राज्यपालों ने अपने इस्तीफे राष्ट्रपति को भेजे जिसको स्वीकार कर लिया गया।

खबरो के मुताबिक, श्रीलंका के प्रख्यात बौद्ध भिक्षु अतुरालिए रतना थिरो ने मंत्री रिशाद बाथिउद्दीन और गवर्नर एएलएएम हिज़्बुल्लाह के इस्तीफ़े की मांग करते हुए भूख हड़ताल शुरू कर दी थी। जिसकी वजह से देश भर में उग्र प्रदर्शन शुरू हो गए थे, और श्रीलंका सरकार पर ज्यादा दबाव पड़ा जिसके बाद सभी मुस्लिम मंत्रियो के इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा, अब उन्होंने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी।

दरअसल इन शीर्ष मंत्रियों में से कुछ पर उस इस्लामिक चरमपंथी समूह से संबंध रखने के आरोप लगे हैं जिसे ईस्टर पर हुए घातक आत्मघाती हमलों का जिम्मेदार माना गया। जिसमें उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री रिशथ बाथिउथीन पर आईएसआईएस से जुड़े स्थानीय इस्लामिक समूह नेशनल तौहीद जमात को समर्थन देने का आरोप लगा। इसी समूह ने ये हमले किए थे जिसमें 258 लोगों की जान चली गई थी। श्रीलंका की 225 सदस्यीय संसद में 19 मुस्लिम हैं और उनमें से नौ के पास कैबिनेट, राज्य एवं उपमंत्री के पद हैं।

आपको बता दें, ईस्टर पर हुए आत्मघाती हमले के बाद पूरे श्रीलंका में मुस्लिमो के लिए मुसीबत खड़ी हो गयी है। बहुसंख्यक बौद्धों के साथ ईसाई समुदाय भी मुस्लिमो के खिलाफ उग्र प्रदर्शन कर रहा है, जिसकी वजह से सरकार को ऐसा निर्णय लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है। ईस्टर पर हुए इन हमलों के बाद से श्रीलंका में आपातकाल की स्थिति है। पुलिस और सैनिकों को लंबे समय तक संदिग्धों को गिरफ्तार करने और हिरासत में रखने का अधिकार दिया गया है। आपको बता दें कि श्रीलंका की 21 मिलियन की आबादी में मुसलमान लगभग 10 प्रतिशत हैं।

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