वंदे मातरम मित्रों! हाल ही में भारत में अंतर्राष्ट्रीय महिला बॉक्सिंग चैंपियनशिप चल रही है। जिसमें भाग लेने के लिए कोसोवो की बॉक्सर दोनजेता सैडिकु भारत आना चाहती थी लेकिन भारत सरकार ने उनको वीजा देने से मना कर दिया और इस पर एक अंतरराष्ट्रीय विवाद पैदा हो गया है क्योंकि इसके तुरंत बाद एशियन ओलंपिक समिति के अध्यक्ष ने भारतीय ओलंपिक समिति और खेल मंत्रालय को पत्र लिखकर ये धमकी दी है कि ऐसा करने से भारत भविष्य में होने वाले खेल आयोजन से वंचित रह सकता है। इसे सीधे तौर पर भारत में 2021 में होने वाले अंतर्राष्ट्रीय पुरुष बॉक्सिंग चैंपियनशिप से जोड़कर देखा जा रहा है।

आखिर कहां है कोसोवो और इसका इतिहास क्या है?

 

हम में से बहुत से लोगों ने कोसोवो का नाम तक नहीं सुना होगा। आइए एक नजर डालते हैं इसके ऐतिहासिक अस्तित्व पर। एक समय कोसोवो सर्विया एक हृदय जैसा हुआ करता है जिसे बाद में 1398 ईसवी में ऑटोमोन सामाज्य में मिला लिया गया। 1912 में कई शताब्दियों बाद, सर्विया ने वापस से कोसोवो को पा लिया और 1946 में कोसोवो यूगोस्लाविया संघ का हिस्सा बना। चूंकि कोसोवो में इतने सालों तक ऑटोमोन साम्राज्य का राज रहा इसलिए ये एक मुस्लिम बहुसंख्यक बन चुका था। इसलिए यूगोस्लाविया संघ जोकि ईसाई आबादी वाला था उसके खिलाफ अपनी आजादी का संघर्ष करने लगा।

1960 से चला ये संघर्ष 1980 तक आ गया और आखिरकार यूगोस्लाविया संघ ने कोसोवो को आजादी दे दी। आपकी जानकारी के लिए इधर बता दूँ कि सोवियत संघ रूस सर्विया का बहुत समर्थन करता था केवल इसी वजह से शीत युद्ध के कारण कोसोवो को अमेरिका और NATO देशों का समर्थन प्राप्त हो रहा था। अगर आप नक्शे में देखेंगे तो पाएंगे कोसोवो के लोग सांस्कृतिक तौर पर अल्बानिया जैसे हैं सर्विया जैसे नहीं। इसी वजह से ये संघर्ष भीषण युद्ध में बदल गया और 1998-99 के बीच कई लोग मारे गए। बाद में NATO ने इसमें हस्तक्षेप किया और एक कुमानोवो समझौते पर दस्तखत किए गए। 2008 में कोसोवो ने खुद को आजाद मुल्क घोषित कर दिया लेकिन सर्विया ने इसे अस्वीकार कर दिया।

कितने देश मानते हैं कोसोवो को एक स्वतंत्र देश?
आज के दौर में कोसोवो IMF, वर्ल्ड बैंक, RCC का सदस्य है और INTERPOL का सदस्य बनने के लिए आवेदन किया है। इसके अलावा कोसोवो ने ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कॉर्पोरेशन के सदस्य बनने के लिए भी आवेदन किया है। आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिणी अफ्रीका यानि BRICS देश इसको आजाद देश नहीं मानते हैं।
नीचे दिए गए नक्शे में आप देख सकते हैं कि कौन कौन से देश इसको एक स्वतंत्र राष्ट्र मानते हैं और कौन से नहीं –

भारत ने आखिर ऐसा क्यों किया?
1. भारत ने कोसोवो को एक स्वतंत्र देश नहीं माना इसका एक प्रमुख कारण है भारत और रूस की दोस्ती। भारत कभी नहीं चाहता कि महज एक देश की वजह से भारत-रूस की सदियों पुरानी दोस्ती में खटास आ जाये।
2. भारत गुट निरपेक्ष नीति में विश्वास करता है इसलिए वो इस मुद्दे पर तटस्थ है और किसी भी गुट को अपना समर्थन नहीं देता।
3. भारत न तो किसी देश के आंतरिक मामले में दखल देता है और न ही ऐसा चाहता है कि कोई देश उसके आंतरिक मामले में दखल दे।
4. चूंकि सर्विया-कोसोवो में धार्मिक और सांस्कृतिक वजहों से गतिरोध हैं ठीक वैसा ही भारत में कश्मीर का मुद्दा है। सर्विया जैसे ही भारत भी अपने अभिन्न अंग को नहीं छोड़ सकता। भारत में भी खालिस्तान आंदोलन आजादी को लेकर ही चला था। भारत नहीं चाहता इस प्रकार के आंतरिक मामले अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल करें।

भारत को होने वाले सम्भव नुकसान:
1. अंतरराष्ट्रीय पुरुष बॉक्सिंग चैंपियनशिप की मेजबानी छीनी जा सकती है।
2. भविष्य में होने वाली अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताएं भारत से हटाई जा सकती है।
3. स्पोर्ट्स से होने वाले पर्यटन पर असर हो सकता है।

भारत को क्या करना चाहिए था?
आपको याद होगा यदि कोई कश्मीरी जब चीन जाता है तो उसको स्टैपल्ड वीजा मिलता है क्योंकि चीन कश्मीर को एक विवादित भाग मानता है। भारत यदि ऐसा ही कोसोवो की बॉक्सर के साथ करता तो बड़ी चतुराई से भविष्य में होने वाले नुकसान को बचा सकता था और इससे रूस के साथ सम्बन्धों पर भी कोई असर न पड़ता।