पिछले दस सालों में ऐसा पहली बार हुआ है कि नॉर्वे की प्रधानमंत्री ने अपने दल-बल के साथ भारत की यात्रा की हो। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुरोध पर अभी हाल ही में नॉर्वे की 28वीं प्रधानमंत्री एरना सोल्वर्ग अपनी भारत यात्रा पर आईं थी। उन्होंने रायसीना डायलॉग (Raisina Dialogue) में हिस्सा लिया, भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोबिन्द और विदेशमंत्री सुषमा स्वराज से मुलाकात की। इस बार के रायसीना डायलॉग की थीम थी : A world Reorder, New Geometries, Fluid Partnership, Uncertain Outcomes.

भारत और नॉर्वे के प्रधानमंत्रियों के बीच चली बार्ता के बाद $1.2 बिलियन के द्विपक्षीय ‘भारत-नॉर्वे व्यापार समझौते‘ पर हस्ताक्षर किए गए। भारत-नॉर्वे के बीच हुए समझौतों के मुख्य बिंदु :

1- भारत नॉर्वे ओसियन डायलॉग (India-Norway Ocean Dialogue): दोनों देश ब्लू इकॉनमी पर जॉइंट टास्क फोर्स बनाएंगे। यहां ब्लू इकॉनमी से मतलब है समंदर के रास्ते होने वाले व्यापार द्वारा बनाई गई अर्थव्यवस्था से है। जैसे कि अक्षय ऊर्जा, सामुद्रिक परिवहन, अपशिष्ट प्रबंधन, मत्स्य व्यापार, जयवायु परिवर्तन और पर्यटन ये सब सामुद्रिक अर्थव्यवस्था के मुख्य घटक हैं।

2- दोनों देशों ने पर्यायवरण के रखरखाव के क्षेत्र में आपसी सहयोग के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए।

3- दोनो देशों ने इस बात पर जोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जरूरी सुधार हों और उसके बाद भारत भी इसका पूर्णकालिक सदस्य बन जाये।

ये मुख्य बिंदु थे जिन पर दोनों देशों ने आपसी सहमति से हस्ताक्षर किए। अब जरा समझते हैं कि हमारे प्रधानमंत्री ने नॉर्वे के इतना महत्वपूर्ण मानकर भारत यात्रा पर उनकी प्रधानमंत्री को क्यों आमंत्रित किया?

नॉर्वे उन देशों में से है जो संयुक्त राष्ट्र में भारत की पूर्ण कालिक सदस्यता के लिए अपना समर्थन देते हैं।

नॉर्वे भारत की NSG (नुक्लेअर सप्लायर ग्रुप) की सदस्यता के लिए भी अपना समर्थन देता है।

नॉर्वे भारत की उस मुहिम का भी समर्थन करता है जो भारत ने आतंक के खिलाफ चला रखी है यानि Comprehensive Convention on International Terrorism (CCIT). इसके अनुसार यदि सारे देश उन देशों को चिन्हित करते हैं जो दुनियाभर में आतंक फैलाने में आतंकियों की मदद करते हैं, तो उन देशों की सभी प्रकार की आर्थिक सहायताएं आदि रद्द कर दी जाएं। यानि कि भारत का अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान पर लगाम कसना है जिसमें नॉर्वे खुलकर हमारा पक्षधर है।

1- भारत के Missile Technology Control Regime (MTCR), Wassenaar Arrangement (WA) और Australia Group (AG) के सदस्य बनने में भी नॉर्वे ने पूरा समर्थन दिया था।

2- नॉर्वे सरकार ने अपने ग्लोबल पेंशन फण्ड का लगभग $12 बिलियन पैसा भारत में निवेश किया था। यानि जो पैसा भारत में निवेश किया गया है वो बाद में नॉर्वे अपने देश के कर्मचारियों में पेंशन के रूप में बांट देगा। चूंकि भारत की बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था को देखकर ही ये निवेश किया गया है इसलिए भारत-नॉर्वे के सम्बंध और भी मजबूत हो रहे हैं।

3- भारत ने भी आर्कटिक सर्किल में अपने 3 मिशन 2007, 2008 और 2009 में नॉर्वे के लिए चलाए हैं। भारत का पोलर रिसर्च स्टेशन ‘हिमाद्रि‘ नॉर्वे में ही स्थित है।

नॉर्वे अपने आप में काफी सम्पन्न देश है, इसके नागरिक खुशहाल हैं। 2018 की वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट में फिनलैंड के बाद नॉर्वे दुनियाँ का दूसरा सबसे खुशहाल देश है। 2018 की डेमोक्रेसी इंडेक्स में नॉर्वे पहले स्थान पर है। इसके अलावा नॉर्वे लगातार 13 वर्षों तक लोगों के रहन-सहन के स्तर, जीवनकाल और शिक्षा के क्षेत्र में पहले स्थान पर रहा है। नॉर्वे संयुक्त राष्ट्र का संस्थापक सदस्य, NATO सदस्य, यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन का सदस्य, कॉउंसिल ऑफ यूरोप का सदस्य, अंटार्कटिक समझौता, नॉर्डिक कॉउंसिल, यूरोपियन इकनोमिक एरिया, WTO, OECD आदि का सदस्य है। यही सब देखते हुए भारत ने कूटनीतिक तौर पर नॉर्वे को बहुत महत्वपूर्ण स्थान दिया है; यही वजह है कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष आग्रह करके नॉर्वे की प्रधानमंत्री लो भारत यात्रा पर आमन्त्रित किया था ताकि भारत-नॉर्वे के सम्बंध और प्रगाढ़ किये जा सकें।