मित्रों! बांग्लादेश में हुए चुनाव में मौजूदा प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग ने जीत हासिल कर ली है। अवामी लीग ने जहां 300 में से 266 सीटें जीतीं तो वहीं इसकी सहयोगी पार्टियों ने 21 सीटें जीतीं। विपक्षी पार्टी नेशनल यूनिटी फ्रंट महज 7 सीटों पर जीत दर्ज कर सका। हालांकि बांग्लादेश में इस चुनाव के दौरान हुई हिंसा में करीब 17 लोग मारे जा चुके हैं।

शेख हसीना का विरोध में विपक्षी उम्मीदवार को महज 123 वोट ही मिल सके जबकि हसीना ने 2,29,539 वोट पाकर दमदार जीत दर्ज की। हालांकि भारतीय विपक्ष की तरह ही हारने पर बांग्लादेश में भी तरह तरह के बहाने गिनवाकर दोबारा चुनाव की मांग की जा रही है।

बात की जाय अगर भारत की तो पड़ोसी देशों में चारों तरफ से खुश खबरी सुनाई दे रही हैं। एक तरफ मालदीव में चुनाव के बाद सरकार बदल गई है और नई सरकार का झुकाव भारत की तरफ है। श्रीलंका में भी सियासी उठापटक के बीच आखिरकार राजनैतिक हालात स्थायी हो चुके हैं, यानि कि जो प्रोजेक्ट्स भारत को मिलने वाले थे, वे अब भारत को ही मिलेंगे। भूटान की अगर बात की जाए तो चुनाव के बाद भी स्थिति वैसे ही है जैसी पहले थी यानि नई सरकार की भी विदेशनीति भारत के लिए नरम है। भारत ने भी भूटान में चल रहे अपने प्रोजेक्ट्स को और तेज़ करने का वादा किया है और हाल ही में 4500 करोड़ की सहायता राशि भी भूटान को दी है। आपकी जानकारी के लिए बता दूँ चीन के कर्ज में दबे श्रीलंका और मालदीव की मदद के लिए भी भारत ने सहायता राशि दी है। बहरहाल नेपाल से हमारे रिश्ते अभी अच्छे नहीं चल रहे हैं, इसका कारण है वहां की सरकार का झुकाव चीन की तरफ ज्यादा है लेकिन हमें चिंतित होने की कोई ज़रूरत नहीं क्योंकि नेपाल में दो-दो वर्ष के लिए दौनों पार्टियां शासन कर रही हैं। यानि अगले साल तक फिर से प्रचंड वहां के प्रधानमंत्री होंगे जोकि भारत की ओर विशेष झुकाव रखते हैं। वहीं बात अगर बांग्लादेश की करें तो शेख हसीना को भारत का धुर समर्थक माना जाता है। ये मोदी हसीना की कूटनीति ही थी कि चीन का प्रभुत्व बांग्लादेश से खत्म हो गया, लैंड स्वैप एग्रीमेंट हुआ और जो बंदरगाह चीन ने निर्मित किया था उसका इस्तेमाल भारत कर रहा है। एक तरफ भारत बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए’ऑपरेशन इंसानियत’ चला रहा है, वहीं दूसरी तरफ इन्हें वापस म्यांमार भेजने की भी कोशिश कर रहा है। यानि कूटनीतिक स्तर पर हम इंसानियत के नाते दूर से ही सहायता भी कर रहे हैं और साथ ही साथ अपने सीमित संसाधनों का हवाला देकर वापस म्यांमार भी भेज रहे हैं। अगर विश्वबैंक की रिपोर्ट की बात की जाए, तो भारत बांग्लादेश आपस में अच्छा खासा व्यापार करते हैं। अगर आपमें से कोई विश्व बैंक की रिपोर्ट पर हमारा विश्लेषण पढ़ना चाहते हैं तो एक बार आंकड़ों पर गौर जरूर कीजियेगा।