न्यूजीलैंड (New Zealand mosque shooting) के क्राइस्टचर्च शहर (Christchurch Mosque) में 2 मस्जिदों पर हुए हमले को ब्रेंटन टैरंट नामक व्यक्ति ने अंजाम दिया है। अब उसका चेहरा सामने आ गया है। ब्रेंटन टैरंट (brenton tarrant) ने कहा है कि लैंड जिहाद ( Land Jihad) तथा धर्मान्तरण के विरोध में उसने इस हमले को अंजाम दिया है।

हमलावर ने इस हमले से पहले एक सनसनीखेज मैनिफेस्टो ‘दे ग्रेट रिप्लेसमेंट’ लिखा था। इस मैनिफेस्टों में उसने आतंकी हमलों में यूरोपीय नागरिकों की जान जाने का बदला लेने की बात कही है। हमला करने से पहले उसने लिखा, “अटैक करने वालों को दिखाना है कि हमारी भूमि कभी उनकी नहीं होगी। हमलावर ने लिखा, मैं मुस्लिमों से घृणा नहीं करता हूं, लेकिन उन मुस्लिमों से घृणा करता हूं जो हमारी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं और धर्म परिवर्तन कर रहे हैं।’

हमलावर ने हमले की वीडियो भी लाइव स्ट्रीम की थी और ऑनलाइन अपना मैनीफीसटो भी अपलोड किया था। उसे समाज और अपनी सरकार को एक संदेश देना था कि “न्यूज़ीलैंड की डेमोग्राफी तेज़ी से बदल रही है, बाहर से इस्लामिक लोग तेज़ी से अंदर आ रहे हैं व अपने आप को मल्टीप्लाई कर रहे हैं उसे रोको।”

यह आतंकवादी हमला एक चेतावनी है इस्लाम के जेहादी आतंकवादियों की अब सुधर जाओ। डरपोक से डरपोक जानवर भी कोने में फंसने के बाद हमला कर देता है। किसी की शांतिप्रियता, विश्वास व मेहमान नवाजी का नाजायज़ फायदा नही उठाना चाहिए। यह हमला उन बहरी और अंधी सरकारों के लिए चेतावनी है जो यह सोचते हैं अपने वोट बैंक के लिए वह अपने देश की डेमोग्राफिक या अपने देश की सभ्यता को खत्म करके शांतिदूत रिफ्यूजीओं को शरण देते रहेंगे और स्थानीय पब्लिक चुपचाप बैठी रहेगी।

इन शांतिदूतों के शरण देने के पैरोकार कभी यह सवाल क्यों नहीं उठाते की समृद्ध शांतिदूत देश जैसे जॉर्डन, कुवैत, बहरीन, लेबनान, सऊदी अरब, दुबई, यूएई इत्यादि देश इन शांतिदूत शरणार्थियों पर रहम करके अपने देश में शरण क्यों नहीं देते ? आखिर क्यों एक साजिश के तहत यह शांतिदूत दबे कुचले पीड़ित बनकर पश्चिम देशों की तरफ जाते हैं? पहले उन देशों में अपने लिए मदद मांगते हैं, रहम की भीख मांगते हैं। फिर उसके बाद कहते हैं, हमें सिर्फ गोमांस चाहिए, शरिया चाहिए, मस्जिद चाहिए। फिर उसके बाद संतानोत्पत्ति में जुट जाते हैं और मात्र कुछ दशकों में उस देश की पूरी डेमोग्राफिक और पूरे सभ्यता को बदल देते हैं।

ताजा समाचारों के मुताबिक New Zealand mosque shooting में अब तक 49 लोगो की मौत हो चुकी हैं और दर्जनों घायल हैं। मस्जिदों में दोपहर को जब हमला हुआ, उस समय लोगों की भीड़ वहां जुम्मे की नमाज के लिए एकत्र थी।

नोट-: E-postmortem किसी भी तरह के आतंकवादी हमले का समर्थन नहीं करता है। चाहे वह इस्लामिक जिहादी हमले हों या ईसाई मिशनरी के आतंकी हमले, हर तरह की आतंकी घटनाएँ निंदनीय हैं। साथ ही हम अपने देश के बदलते डेमोग्राफिक से भी खौफ़जदा हैं, जिसे लेकर सेनाध्यक्ष भी सरकार को आगाह कर चुके हैं। जब सरकार बदलते डेमोग्राफिक के लिए कुछ कड़े फैसले लेती है तो हमारे देश के स्वघोषित निष्पक्ष पत्रकार और क्षद्म धर्मनिरपेक्ष राजनेता विरोध करने लगते हैं। यही क्षद्म धर्मनिरपेक्षता ही ऐसे आतंकी हमलों का कारण बनती है।

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