वंदे मातरम! मित्रों! अभी हाल ही में भारत को किंबरले प्रोसेस सर्टिफिकेशन का अध्यक्ष बनाया गया है।

2003 में संयुक्त राष्ट्र ने ब्लड डायमंड या कॉन्फ्लिक्ट डायमंड को दुनियाँ की आपूर्ति श्रृंखला से हटाने के लिए किंबरले प्रोसेस सर्टिफिकेशन की शुरुआत की थी। भारत इसका सदस्य शुरुआत से ही था जबकि पाकिस्तान इसका सदस्य नहीं है। इसमें लगभग 81 देश हैं जिनके 54 सदस्य इस प्रोसेस का हिस्सा हैं।

जिन लोगों को ‘कॉन्फ्लिक्ट यानि ब्लड डायमंड’ के बारे में नहीं पता उनकी जानकारी के लिए ये वो हीरे होते हैं जिनकी खदानों में मजदूर बहुत ही विषम परिस्थितियों में काम करते हैं, कई बार उनकी जान चली जाती है। बूढ़े बच्चे सबसे जबरन काम करवाया जाता है, माफिया हीरों का खनन बड़े पैमाने पर करते हैं। सबसे बुरी बात ये है कि इन हीरों के व्यापार से मिलने वाले धन का दुरुपयोग किया जाता है। उदाहरण के तौर पर उसे आतंकवाद, स्मगलिंग जैसे बुरे कामों में लगाया जाता है। ये विशेषकर अफ्रीकी देशों में होता है, माफिया कानूनी रूप से बनी सरकार को भी अस्थिर करने के लिए ब्लड डायमंड के व्यापार से मिले धन का इस्तेमाल करते हैं। इसीलिए किंबरले प्रोसेस ऐसे किसी भी ब्लड डायमंड के व्यपार को सत्यापित नहीं करती फलस्वरूप अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी खरीदारी नहीं हो पाती और ऐसे ब्लड डायमंड आपूर्ति श्रृंखला से बाहर हो जाते हैं।

ऐसी खदानें विशेषकर बोत्सवाना, अंगोला और दक्षिण अफ्रीका में पाई जाती हैं। अधिक जानकारी के लिए ‘ब्लड डायमंड’ फ़िल्म भी देखी जा सकती है। भारत में डायमंड फिनिशिंग का काम सूरत जैसे शहर में किया जाता है, जिससे कि खदानों से निकाले गए हीरों की कीमत बढ़े। अब यदि कोई माफिया खनन हुए रफ डायमंड लेकर फिनिशिंग के लिए यहां आता है तो उससे किंबरले सर्टिफिकेट दिखाने के लिए कहा जाता है, ये सर्टिफिकेट ये सुनिश्चित करता है कि हीरों का खनन सही तरीके से हुआ है और इसे कोई माफिया नहीं चला रहा है। अभी तक केवल 1% ही ऐसे केस आये हैं जिसमें धोखाधड़ी करके इस प्रोसेस को चपत लगाने की कोशिश की गई हो वरना ये प्रोसेस 99% फुलप्रूफ मानी गई है।

भारत में ये स्कीम ‘डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स’ ‘यूनियन कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्ट्री’ की देखरेख में नियंत्रित करता है। अब आप सबके मन में एक सवाल ये आ रहा होगा इससे भारत को क्या फायदा होगा ? जानिए क्या हैं वे फायदे :

  1. चूंकि भारत का बहुत सारा व्यापार अफ्रीकी देशों के साथ होता है। भारत की बहुत सी टेलिकॉम कंपनियां अफ्रीकी देशों में काम करती हैं। इसलिए भारत ये सुनिश्चित करना चाहता है कि उन देशों की सरकारों पर माफियाओं का नियंत्रण न हो।
  2. भारतीय कंपनियों का अफ्रीका में इतना दबदबा है कि कई बार तो कई देशों के चुनावों के दौरान जीतने वाले प्रत्याशी तक को यही चुनती हैं। इसी वजह से भारत का प्रभुत्व अफ्रीकी देशों में बना रहता है।
  3. चूंकि ब्लड डायमंड ट्रेड से आतंकवाद को भी पैसा जाता है इसलिए भारत ये भी सुनिश्चित करता है कि आतंकवादी इस काले धन से पोषित न हों।
  4. सूरत जैसे शहरों में डायमंड फिनिशिंग का व्यापार है इसलिए भारत के लिए ये बहुत ज़रूरी होता है कि भारत में काला कारोबार न फैले।
  5. किंबरले प्रोसेस की अध्यक्षता करने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का रुतवा और बढ़ेगा।
  6. भारत अफ्रीकी देशों में अपनी पहुंच और बढ़ाना चाहता है।

मित्रों! ये शानदार विदेश नीति का एक और नमूना है। अगर लेख पसन्द आया हो ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाकर जानकारी बढ़ाइए!!