जैसे ही भारत ने अनुच्छेद 370 एवं 35A हटाये, टर्की ने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को अपना समर्थन दे दिया। वैसे पाकिस्तान को टर्की का इस तरह का समर्थन कोई पहली बार नहीं है; ऐसा पहले भी होता आया है।

जब पाकिस्तान FATF द्वारा ब्लैकलिस्ट हो सकता था तब चीन, मलेशिया और टर्की; इन तीन देशों ने उसे ब्लैकलिस्ट होने से बचा लिया था। अभी पाकिस्तान को कुछ दिन की मोहलत जरूर मिल गई है लेकिन ये तीन देश उसे इतनी आसानी से फिर ब्लैकलिस्ट नहीं होने दे सकते। किसी देश को ब्लैकलिस्ट होने से बचने के लिए 36 में से मात्र 3 देशों का समर्थन चाहिए होता है और ये समर्थन पाकिस्तान को फिर से मिल ही जायेगा।

यदि हम इतिहास पर जोर डालें तो जब ब्रिटेन ने टर्की के खलीफा को पदस्थ किया था तो भारत में भी इसका विरोध ‘खिलाफत आंदोलन’ के रूप में देखने को मिला था। भारत के मुसलमानों ने खुलकर टर्की का समर्थन किया था और टर्की का ये मानना है कि यही वे मुसलमान थे जो बाद में पाकिस्तान जाकर बस गए।

वैसे टर्की-पाकिस्तान दौनों ही सुन्नी मुल्क हैं और ये दोनों देश सुन्नी मुसलमानों का एक गुट बना रहे हैं। चाहे बालाकोट स्ट्राइक हो या सर्जिकल स्ट्राइक दौनों समय भारत की वेबसाइट्स पर टर्की के हैकरों ने पाकिस्तान के समर्थन में साइबर हमले किये थे। इसके अलावा टर्की और पाकिस्तान के बीच सैन्य सहयोग बहुत ज्यादा है। पाकिस्तान को चीन के बाद हथियार सबसे ज्यादा टर्की ही बेचता है। टर्की के अटैक हैलीकॉप्टर T129 ATAK खरीदने के लिए पाकिस्तान ने आर्डर दिया है। दौनों देश नौसेना के जहाज भी बना रहे हैं, पाकिस्तान की पनडुब्बियों को भी आधुनिक करने का कॉन्ट्रैक्ट टर्की के पास है। ये दोनों देश अय्यिलडीज़ युद्धाभ्यास भी करते हैं।

बात यदि आतंकवाद की करें तो इसमें भी दौनों देश एकमत नजर आते हैं। जहां पाकिस्तान की भूमिका तालिबान को पालपोस कर बड़ा करने की रही है वहीं टर्की की भूमिका सीरिया में ISIS से लड़ रहे कुर्दिश योद्धाओं का दमन करके अप्रत्यक्ष रूप से ISIS की मदद करने की रही है।

यदि बात व्यापार की करें, तो टर्की और पाकिस्तान के बीच तकरीबन 1 बिलियन डॉलर का व्यापार होता है और ये 2022 तक इसे 10 बिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखे हैं। पाकिस्तान की लगभग हर पश्चिम जाने वाले हवाई जहाज टर्की में रुकते ही रुकते हैं।

बात यदि बाकी देशों से सम्बन्धों की बात करें तो टर्की पहले NATO का सदस्य था और पाकिस्तान के भी अमेरिका से अच्छे सम्बन्ध थे लेकिन अब दौनों ही देशों के अमेरिका से सम्बन्ध अच्छे नहीं हैं। एक तरफ अमेरिका ने टर्की पर आर्थिक प्रतिबंध लगा रखे हैं वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान को मिलने वाले लाभों में भी कटौती कर दी है। 2015 में रूस का एक विमान टर्की ने मार गिराया था लेकिन रूस ने इसे बेहद शांति से सम्भाल लिया और इस वर्ष रूस टर्की को S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी दे रहा है जबकि टर्की और पाकिस्तान दौनों ही देश एक जमाने में USSR को खत्म करने के लिए साथ आ गए थे।

यदि भारत के टर्की से सम्बन्धों की बात करें तो ये तब तक ही अच्छे हैं जब तक इनमें पाकिस्तान का जिक्र न हो। भारत की NSG की सदस्यता का समर्थन भी टर्की ने किया था, UNSC में भारत की अस्थायी सदस्यता के लिए भी टर्की ने भारत को समर्थन दिया था और MTCR में भारत की सदस्यता पर भी टर्की की सहमति थी। ये बात हम सब लोग भी जानते हैं कि जब बात मजहब की आ जाती है तो इस्लामिक देश साथ आ जाते हैं, यही वजह है कि पाकिस्तान टर्की और मलेशिया एक दूसरे का साथ हमेशा से देते आये हैं और इन तीनों ही देशों में भारत की कूटनीति बहुत ज्यादा कारगर नहीं है। पाकिस्तान के साथ किसी भी संघर्ष पर भारत के लिए टर्की, मलेशिया और चीन बहुत बड़ी चुनौती बनकर उभर सकते हैं, इस बात से हमें भलीभांति परिचित रहना होगा।