नमस्कार मित्रों! वर्तमान की केंद्र सरकार ने ऐसी कई परियोजनाओं को मंजिल तक पहुंचाया है, जो वर्षों से लटकी पड़ी थीं। इनमे सरदार सरोवर बांध, सिक्किम में पाक्योंग हवाई अड्डा, बोगीबील पुल, आदि शामिल हैं। आज हम बात करेंगे भारत के पहले वर्टिकल लिफ्ट ब्रिज के बारे में। भारतीय रेलवे ने तमिलनाडु के रामेश्वरम को भारत की मुख्य भूमि से जोड़ने के लिए एक ऊर्ध्वाधर लिफ्ट पुल बना रहा है। बता दें कि यहां पर पहले से एक पुल है, जिसका नाम है पंबन ब्रिज। लेकिन यह पुल खराब हो चुका है। पंबन ब्रिज लगभग 104 वर्ष पुराना है। इस द्वीप से जो पुल भारतीत क्षेत्र को जोड़ता है, उसे ही पंबन ब्रिज कहते हैं। यहां दो ब्रिज हैं- एक रेलवे के लिए और दूसरा सड़क मार्ग।

इस नये ऊर्ध्वाधर पुल के तैयार होने बाद बड़े बड़े पानी वाले जहाज और स्ट्रीमर बिना किसी बाधा के आसानी से गुजर सकेंगे। दो किलोमीटर लंबे इस पुल को बनाने में  ₹250 करोड़ खर्च होंगे और चार वर्ष में बनकर तैयार होगा।

पंबन ब्रिज

बता दें कि पंबन एक द्वीप है। पंबन ब्रिज एक रेलवे ब्रिज है, जो पंबन द्वीप पर बसे रामेश्वरम शहर को भारत के मुख्य भूमि से जोड़ता है। 1988 तक, यह दो स्थानों को जोड़ने वाला एकमात्र सतह लिंक था, जब तक कि एक सड़क पुल इसके समानांतर नहीं बनाया गया था। मौजूदा पुल की लंबाई 2058 मीटर है और इसका उपयोग 104 वर्षों से अधिक समय से किया जा रहा है। चूंकि, यह पिछले कुछ वर्षों से लगभग परिचालन कि स्थिति में नहीं है, इसलिए भारतीय रेलवे ने नए ऊर्ध्वाधर पुल की योजना बनाई है। पम्बम ब्रिज में ‘शेज़र’ रोलिंग लिफ्ट तकनीक का उपयोग किया जाता है जिसमें पुल क्षैतिज (Horizontally) रूप से खुलता है।

नए पुल में पंबन पुल से क्या है अलग-

नए पुल में 63 मीटर का खिंचाव (Stretch) होगा, जो जहाजों को गुजरने की अनुमति देने के लिए डेक के समानांतर रहते हुए ऊपर की तरफ उठेगा। ऐसा करने के लिए प्रत्येक छोर पर सेंसर का उपयोग किया जाएगा। इसमें 18.3 मीटर के 100 स्पैन और 63 मीटर की एक नौवहन अवधि होगी।

आगे की योजनाएं-

भारतीय रेल पंबन द्वीप के रामेश्वरम से धनुषकोडि तक 17 किलोमीटर लंबी लाइनों का निर्माण करने की योजना बना रही है, ताकि रेल कनेक्टिविटी को फिर से स्थापित किया जा सके और तीर्थयात्रियों को पवित्र शहर की यात्रा करने का एक आसान विकल्प प्रदान किया जा सके। ₹208 करोड़ की लागत से पूरा होने वाले इस परियोजना को भी हरी झंडी मिल चुकी है और अगले 2-3 वर्षों में यह कार्य भी पूरा हो जाएगा।