भारत ने हाल ही में उड़ीसा तट पर अब्दुल कलाम द्वीप (व्हीलर आइलैंड ऑफ इंटेग्रेटेड टेस्ट रेंज) से सफलतापुर्वक इंसरसेप्टर मिसाइल का परीक्षण किया है।

पृथ्वी डिफेंस व्हीकल मिशन (PDV) :
अगर कोई बैलिस्टिक मिसाइल 50 किलोमीटर ऊँचाई से भारत के ऊपर लांच की जाती है तो ये सिस्टम उसको हवा में ही इंटरसेप्ट करके उसे नष्ट कर देगा और इसका प्रभाव नीचे जमीन पर बिल्कुल नहीं होगा। इस सिस्टम में राडार कंप्यूटर नेटवर्क की मदद से आने वाली मिसाइल के रास्ते को सटीक तरीके से भांप लेता है उसके बाद हाई एक्यूरेसी इनिशियल नेविगेशन सिस्टम रिडण्डेन्ट माइक्रो नेविगेशन सिस्टम की मदद से इंटरसेप्टर आने वाली मिसाइल को रास्ते में ही नष्ट कर देता है।

अब इस प्रणाली को अपंग बनाने के लिए दुश्मन देश ऐसा भी कर सकता है कि पहले वो एक डमी मिसाईल लांच कर दे जिससे हमारा सिस्टम उसको निरस्त करने में व्यस्त हो जाये और तब तक वो ज्यादा विध्वंसक मिसाईल लॉंच कर दे। इससे बचने के लिए DRDO ने एक बहुत ही अच्छी तकनीकी का इस्टेमाल किया है जिसमें इमेजिंग इंफ्रारेड सीकर में दो सॉलिड फ्यूल से चलने वाले PDV इंटरसेप्टर फिट होते हैं जो ये अंतर कर सकते हैं कि आने वाली मिसाइल असली है या डमी मिसाइल है। PDV का पहला परीक्षण अप्रैल 2014 में किया गया था और ये 120 किलोमीटर की ऊँचाई पर टारगेट से बहुत नजदीक दूरी से चूक गया था। उसके बाद फरवरी 2017 में इसका दोबारा सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया था। आपकी जानकारी के लिए इधर बताना चाहूंगा कि PDV पहले से चली आ रही तकनीक PAD यानि पृथ्वी एयर डिफेंस और प्रद्युम्न बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर को प्रतिस्थापित कर देगी।

एडवांस एयर डिफेंस (AAD) मिसाइल अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर आने वाली मिसाइल को इंटरसेप्ट करने के लिए है जबकि PDV अधिक ऊंचाई के लिए प्रयुक्त होता है। ये दौनों मिलकर डबल टियर्ड डिफेंस प्रोग्राम का हिस्सा बनते हैं और इस प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य भारत को चीन और पाकिस्तान की मिसाईल से बचाने के लिए है। इसके साथ साथ भारत रूस से S-400 खरीदने वाला है और इजराइल भी हमें इंटरसेप्टर सिस्टम में मदद करने वाला है तो ये पाकिस्तान के लिये काफी घातक होगा।

इसके जबाब में पाकिस्तान ने मल्टीप्ल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री वेहिकल वाली बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया। इस तकनीकी में माध्यम से एक साथ कई मिसाइलों को अलग अलग दिशाओं में दुश्मन देश पर लांच किया जाता है जिससे कि उसकी इंटरसेप्टर प्रणाली कुछ ही मिसाइलों में व्यस्त हो जाये और बाकी की मिसाईल पर्याप्त क्षति कर दें। हालांकि पाकिस्तान MIRV से थोड़ा सा मजबूत जरूर हुआ है लेकिन जब भारत के पास S-400 आ जायेगा तो भारत की सुरक्षा काफी मजबूत हो जाएगी।

फिलहाल भारत के पास MIRV जैसी तकनीक नहीं है, हालांकि हमने अग्नि – 5 परीक्षण MIRV के साथ किया था लेकिन इस प्रणाली को अभी और उन्नत करने की ज़रूरत है। फिलहाल भारत को पाकिस्तान के MIRV का काट ढूंढने की ज़रूरत है।