एथलीट हेमा दास ने ट्रैक एंड फील्ड इवेंट में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीत कर इतिहास रच दिया।

फ़िनलैंड के टेम्लेर शहर में चल रही U20 विश्व चैंपियनशिप में असम की हेमा दास ने 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। ट्रेक एंड फील्ड इवेंट में पहली और एथलेटिक इवेंट में पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय खिलाड़ी है। उनके अलावा नीरज चोपड़ा थे, जिन्होंने भाला फेंक प्रतियोगिता में स्वर्ण जीता था। पर दौड़ प्रतियोगिता में भारत को पिछले 70 वर्षों में कभी मेडल हाथ नही लगा था।

रेटिना स्टेडियम की चौथी लेन में दौड़ते हुए 18 वर्षीय हेमा दास ने 51.46 सेकंड में 400 मीटर दौड़ पूरी कर अव्वल स्थान प्राप्त किया। रोमानिया की एंड्रिया मिकलोस को सिल्वर और अमेरिका की टेलर मेंशन को ब्रोंज मेडल मिला।

हेमा इस प्रतियोगिता में फेवरेट के तौर पर गयी थी, मज़े की बात ये है कि जिस 51.46 की टाइमिंग के साथ हेमा ने जीत हासिल की, उससे भी बेहतर टाइमिंग  51.13  उन्होंने भारत मे अंतर राज्यीय प्रतियोगिता में निकाल कर दिखाई थी।

प्रतियोगिता के प्रबल दावेदार होने के बावजूद हेमा दास पर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं था। घबराहट को लेकर पूछे गए सवाल को लेकर उन्होंने जवाब दिया कि उन्हें दौड़ने अच्छा लगता है और वह यहां एन्जॉय करने आई है, अपना बेस्ट देने आई है, उन पर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं हैं।

आज चैंपियन बन कर हेमा देश की सर्वश्रेष्ठ एथलिट बन गयी है, पर साल भर पहले ये सोच पाना मुमकिन नहीं था। कॉमनवेल्थ खेलो में उनका 6वा स्थान लगा था, वो मेडल से चूक गयी थी, उनके कोच निपुण दास निराश थे, पर हेमा ने परिपक्वता का परिचय दिखाते हुए अपने कोच से कहा कि उन्हें ज्यादा तजुर्बा नहीं था इसलिए जीत नहीं मिल पाई, पर भविष्य में वो और बेहतर प्रदर्शन कर के पदक जीत कर दिखाएंगी।

देश को मेडल का बेसब्री से इंतज़ार था। जैसे ही गुरुवार की रात हिमा ने स्वर्ण जीता, बधाइयों का तांता लग गया। राष्ट्रपति से लेकर प्रधान मंत्री तक और क्रिकेटर से लेकर फ़िल्म सितारे तक सभी हिमा दास को गौरवशाली उपलब्धि पर ट्विटर के माध्यम से बधाई संदेश दे रहे है। हिमा ने ट्विटर पर वीडियो पोस्ट करके सबका धन्यवाद किया।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई के साथ वह वीडियो भी लगाया जिसमें इस गौरवांवित करने वाले पल कैद थे।पीएम ने अपनी पोस्ट में लिखा, ‘हिमा की जीत के कभी न भूलनेवाले पल। जीतने के बाद जिस तरीके से वह तिरंगे को खोज रही थीं और फिर राष्ट्रगान के वक्त उनका भावुक होना मेरे दिल को छू गया। इस विडियो को देखकर कौन ऐसा भारतीय होगा जिसकी आंखों में खुशी के आंसू नहीं होंगे!’

आप देख सकते है कि 400 मीटर की दौड़ में जहां हेमा पहले करीब 350 मीटर तक अपने प्रतिद्वंदियों से पीछे चल रही थी वहीं आखिर में उन्होंने एक मंजे हुए एथलीट की तरह आखरी स्प्रिंट मारी। लंबी दौड़ में आखरी लैप की स्प्रिंट के लिए ताकत बचा के रखी जाती है। जिसका नमूना हेमा ने बखूबी दिखाया और पूरे देश को अविस्मरणीय पल दे दिए।

हेमा गोल्ड की बजाय सिल्वर या ब्रॉन्ज भी जीतती तो उपलब्धि छोटी न होती, पर मन मे एक कसक रह जाती की फ़िनलैंड की धरती पर हमारा राष्ट्रगान नहीं बजा। रूल के मुताबिक अवार्ड फंक्शन में राष्ट्रगान सिर्फ उस देश का बजाया जाता है जिस देश के खिलाड़ी ने स्वर्ण पदक जीता हो। आप देख सकते है वीडियो में राष्ट्रगान के वक्त कैसे भावुक हो गयी हेमा। ऐसे मौके न सिर्फ खिलाड़ी के जीवन में बल्कि एक देश के लिए भी दशकों में कम ही आते है।

वही 52 सेकंड का राष्ट्रगान जिसके उद्घोष पर सरकारों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक को खड़े होने का फरमान जारी करना पड़ता है क्योंकि हमारे मुल्क में कुछ लोगो को यह 52 सेकंड भी भारी लगते है। जिस तिरेंगे की शान के लिए खिलाड़ी अपनी जिंदगी खपा देते वो गौरवशाली पल कुछ लोगो को hyper nationalism लगता है।

जहां देश का main stream मीडिया और काफी हद तक देशवासी भी पूर्वोत्तर के राज्यो को नेगलेक्ट सा करते हों ऐसी स्थिति में उन छोटे पहाड़ी राज्यो से एक के बाद एक ऐसे खिलाड़ी निकल के आ रहे है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का गौरव बढ़ा रहे है। चाहे सिक्किम की गीता करमाकर हो, मणिपुर की मेरी कॉम या आसाम की हेमा दास। महिला होने के चलते भारत जैसे देश मे जो समस्याएं झेलनी पड़ती है वो एक तरफ, भूगोलिक दृष्टि से जो दिक्कतों का सामना करना पड़ता है सो अलग। हेमा जिस जिले से आती है वह अक्सर बाढ़ की चपेट में रहता है, जिसके चलते उन्हें मजबूरन घर छोड़ कर गुवाहाटी जाना पड़ता प्रैक्टिस के लिए। इन सबके बावजूत मजबूती से काम को अंजाम दिया इन खिलाड़ियों ने।

हमारी टीम को तरफ से हिमा दास को बहुत बहुत बधाई और हेमा से प्रेरणा लेकर देश भर के युवा भारत का नाम ऐसे ही विश्व पटल पर रोशन करते रहे