क्रिसमस के ठीक बाद वाले दिन को बॉक्सिंग-डे कहते हैं। इसी दिन से मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में हर साल टेस्ट मैच आयोजित किया जाता है। ऑस्ट्रेलिया के अलावा दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड भी बॉक्सिंग डे टेस्ट का आयोजन करते हैं।

बॉक्सिंग डे पर भारत का इतिहास

भारत के लिए बॉक्सिंग डे मैचों के परिणाम उत्साहजनक नहीं रहे हैं। भारतीय टीम ने अब तक बॉक्सिंग डे पर 14 टेस्ट मैच खेले हैं, जिनमें से उसे केवल एक मैच में जीत मिली है और वह भी ऑस्ट्रेलिया में नहीं, बल्कि दक्षिण अफ्रीका में। ऑस्ट्रेलिया में सात बॉक्सिंग डे टेस्ट मैच खेले हैं और इनमें से पांच मैचों में उसे हार झेलनी पड़ी, जबकि दो मैच ड्रा रहे हैं। भारत ने 1991, 1999, 2003, 2007 और 2011 में मेलबर्न में लगातार पांच टेस्ट मैच गंवाए हैं। इससे पहले भारत ने मेलबर्न में 2014 में टेस्ट खेला था, जो ड्रॉ रहा था। यह महेंद्र सिंह धोनी का आखिरी टेस्ट मैच था और इसके बाद उन्होंने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया था।

अब बात करते हैं इस टेस्ट मैच की। पहली पारी में भारतीय बल्लेबाजों ने बहुत ही अच्छी बल्लेबाजी की। ऑस्ट्रेलिया में पहली बार खेल रहे मयंक अग्रवाल ने बहुत ही धैर्य के साथ बल्लेबाजी करते हुए अपना पहला अर्धशतक जड़ा। चेतेश्वर पुजारा ने अपने करियर का 17वां शतक जड़ा। पुजारा अभी तक रन बनाने वालों में सबसे आगे चल रहे हैं। पुजारा ने अभी तक इस सीरीज में 328 रन बना लिए हैं। खुद पुजारा के लिए ये किसी भी विदेशी दौरे में सबसे अच्छा प्रदर्शन है। पिछली दफा पुजारा के बल्ले से 2017 में श्रीलंका दौरे पर 309 रन निकले थे।

टेस्ट के दूसरे दिन विराट कोहली ने एक बहादुरी वाला काम किया है। ऑस्ट्रेलिया में खेलते हुए 15 साल बाद भारत ने अपनी पहली पारी घोषित की। वो भी स्कोरबोर्ड पर 500 (443/7) रन भी नहीं थे, तभी पहली पारी घोषित कर दी। मगर कोहली का ये दांव एकदम सही साबित हुआ। ऑस्ट्रेलिया को महज़ 151 पे ऑलआउट कर दिया। इसके बाद हालांकि भारत की बल्लेबाजी दूसरी पारी में थोड़ा लड़खड़ाई लेकिन पहली पारी में 292 रनों की बढ़त मिलने की वजह से कोई नुकसान नहीं हुआ। भारत ने दूसरी पारी भी घोषित की और ऑस्ट्रेलिया को 399 रन का लक्ष्य दिया। भारतीय गेंदबाजों ने धारदार गेंदबाजी करते हुए आसानी से मैच जीत लिया।

इस जीत के क्या मायने हैं

भारतीय क्रिकेट टीम ने ऑस्ट्रेलिया में कुल 11 टेस्ट सीरीज खेली हैं। जिसमें जीत तो किसी में नहीं मिली मगर तीन सीरीज ड्रॉ कराने में जरूर कामयाब रहे। भारत ने यह मैच जीतकर, सीरीज़ जीतने की तरफ एक कदम बढ़ा दिया। अग़र भारत ऐसा करता है तो यह इतिहास होगा अपने आप में। हम हमेशा से भारतीय गेंदबाजों की बुराई सुनते है। यही बोला जाता रहा है की भारत के गेंदबाज 20 विकेट लेने में सक्षम नहीं है। लेकिन ये नया हिंदुस्तान है, भारतीय गेंदबाजों को 20 विकेट लेने भी आते हैं और विपक्षी बल्लेबाजों को अपनी गति, बाउंस से डराना भी आता है।

2018 में भारतीय क्रिकेट टीम ने जहां-जहां टेस्ट मैच खेला। भारतीय तेज गेंदबाजों ने अव्वल दर्जे का प्रदर्शन किया। आपको जानकर हैरानी होगी इस साल टेस्ट में भारतीय गेंदबाजों ने जितनी अच्छी गेंदबाजी की, वैसी पहले कभी नहीं देखी गर्इ। जसप्रीत बुमराह ने इस साल भारत के बाहर टेस्ट में 47 विकेट चटकाए। भारतीय टेस्ट क्रिकेट इतिहास में किसी भारतीय गेंदबाज का अभी तक का यह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। आसान भाषा में समझें तो बुमराह ने 2018 में टेस्ट मैच के हर 8वें आेवर में एक विकेट लिया। यही नहीं बुमराह ने एक रिकाॅर्ड आैर बनाया। एक साल में साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड आैर आॅस्ट्रेलिया में पांच-पांच विकेट लेने वाले बुमराह पहले भारतीय गेंदबाज बन गए।शमी भी पीछे नहीं हैं। बुमराह के अलावा इस साल उनके साथी गेंदबाज मोहम्मद शमी ने भी खूब विकेट चटकाए। शमी 44 विकेटों के साथ इस लिस्ट में दूसरे नाम पर हैं। यह किसी भारतीय गेंदबाज का दूसरा बेस्ट परफार्मेंस है। एक साल में सर्वाधिक विकेट साल 2018 में भारतीय गेंदबाजों ने कुल 247 विकेट लिए। किसी एक साल में भारतीय गेंदबाजों का अभी तक का यह सबसे अच्छा प्रदर्शन है। इससे पहले साल 1979 में इंडियन बाॅलर्स ने 237 विकेट चटकाए थे।