आज काफी सालों बाद अपने देश वापस आना हो रहा है, खुद को शाहरुख खान समझ के वीर-जारा फ़िल्म के गाने ‘ऐसा देश है मेरा’ जैसी फीलिंग आ रही है। आंखों में तरह तरह के सपने सजा रखें हैं।

हमने समाचारों में देख रखा था कि दिल्ली में प्रचण्ड प्रदूषण है जोकि बस ये राह देख रहा है कि दीपावली ग्रीन सिग्नल दे दे। अब हमारी फ्लाइट जैसे ही दिल्ली में लैंड होने वाली थी कि फ्लाइट के पायलट को आंखों में खराब मौसम के चलते कुछ नजर नहीं आ रहा था। यात्रीगण अपनी सीट पर अंग्रेजी के आठ (8) बनकर सिकुड़ गए थे अब चूंकि भगवान का नाम भारत में साम्प्रदायिक माना जाने लगा था तो लोग जीसस को याद कर रहे थे। कुछ लोगों ने अल्लाह-हु-अकबर का नाम लेना उचित इसलिए नहीं समझा कि लोग ये न समझ बैठे कि प्लेन हाइजैक हो गया है और 10 तंदूरी रोटी-चिकन के साथ मांग की गई है। आखिरकार कप्तान साब ने टर्मिनल देख कर जैसे तैसे यात्रियों को जिंदा जमीन पर पटक दिया, पटक इसलिए कहा क्योंकि दिल्ली के मालिक कहीं इसे साजिश करार न दे दें।

इंदिरा गांधी एयरपोर्ट से हम बाहर आये तो हमने आसमान देखा। आसमान में बड़ा सा छेद दिखाई दिया। अब जैसे कि हमारी बुद्धिजीवी बरखा दत्त जी हर बात अपने ड्राइवर से पूछती हैं तो उनकी देखा देखी हमने एक कैब हायर की और पूछ ही लिया कि भैया ये छेद कैसा है? उसने बताया कि पिछले साल ओड-इवन के समय हमने रूल्स फॉलो नहीं किये थे, और हम मोदी सपोर्टर जैसे लग रहे थे तो सर जी के गुंडों ने ऐसी हालत कर दी। हमने उन्हें पुनः याद दिलाया कि हम आपके स्थानविशेष के लिए चिंतित नहीं है हमें आसमान के छेद की चिंता है। ऐसा सुनते ही हमारा ड्राइवर रोने लगा – बोला सर रावण को जलाया था हिन्दू लोगों ने दशहरे पर। लाख मना किया था कि अपने अंदर के रावण को सल्फास की गोली लीलकर मार दो लेकिन उन्होंने पुतले जलाए और आसमान में ओजोन की परत में छेद कर दिया। हमारे पैरों के नीचे जमीन तो नहीं खिसकी लेकिन गाड़ी की फ़टी हुई सीट के नीचे से स्प्रिंग जरूर ऊर्ध्वगामी होकर हमारे सुकोमल शरीर से लग गई, थोड़ा सा लहू निकला लेकिन चूंकि ये लहू विराट हिन्दू का था तो हम गर्व से और चौड़े हो गए। हमने मन में सोचा मोदी जी का सीना होगा 56 इंच का, हम तो 75 इंच से कम में न मानने वाले, मैं देश नहीं झुकने दूंगा।

इसी घटना के बाद हमने चालक महोदय से प्रस्थान करने को कहा। सिरिमान जी, ने आव देखा न ताव और एक झटके से गाड़ी चल दी। रास्ते में हमने दिल्ली-राजस्थान की सीमा से सटे पेड़ देखे और पूछ लिया ये क्या है। बस इतना पूछना था कि उसने बताया कि सरजी ने राजस्थान की तरफ से आने वाली व्यापारिक धूल भरी चक्रवाती पवन से दिल्ली को बचाने के लिए पौधे लगवाए हैं जो 20 साल बाद बड़े होकर खोपड़ी पर आए हुए संकट को कम करेंगे। हमने मन ही मन सरजी के प्रचण्ड दिमाग को दण्डवत किया, और सोचा सर जी P1 प्राथमिकता की समस्या को 20 साल बाद खत्म कर रहे हैं तो अपेक्षाकृत औसत समस्या को शायद शताब्दी बाद हल करें, आखिर व्यस्त जो है।

थोड़ी दूर फिर चले होंगे कि हमने देखा जहां पक्षी विहार हुआ करता था उसमें पक्षी तो हैं ही नहीं। हमने फिर चालक महोदय की तरफ जिज्ञासा भरी नजरों से देखा। उसने जो बताया उससे मेरे अंदर का विराट हिन्दू जो हालांकि पूरी तरह से जाग नहीं पाया था लंबी यात्रा के बाद, वो फिर से जम्हाई लेने लगा। उसने बोला साब! हिंदुओं ने लाख मना करने के वावजूद मकर संक्रांति पर पतंगें उड़ाई, पतंगों के धागों से सब उड़ने वाले पक्षियों की गर्दनें कट गई और सब मर गए। मैंने मन ही मन भारत के हिंदुओं को कोसना शुरू कर दिया था, अब चाहे सर्फ एक्सेल हो या रिन लिब्रल्स से अच्छा ब्रेनवाश नहीं करता। गाड़ी थोड़ी दूर और चली होगी, मैंने ध्यान दिया कि यमुना नदी सूखी है एकदम, सड़क पर जगह जगह पानी की कीमत सऊदी जैसी हो चुकी है। हमने फिर ड्राइवर की तरफ देखा, इस बार उसने हमें जो बताया उससे हमें धक्का लगने वाला ही था कि सीट में पीछे गद्देदार टिकने वाला लगा हुआ था, जिसने हमें बाल बराबर खरोंच भी न आने दी। उसने कहा साब! हिंदुओं ने पूरी नदी के पानी से होली खेल ली, दिल्ली में इतना पानी बर्बाद किया कि भूमिगत पानी न के बराबर बचा है इसलिए अब इधर पानी 1000 रुपये लीटर बिकता है। अगर आप आम आदमी पार्टी को वोट करेंगे तो ये फ्री में भी मिल सकता है लेकिन आपको अपना सरनेम बदलकर कुछ अंग्रेज टाइप का करना होगा अन्यथा विराट हिंदुओं को सरजी कोल्हू में पिरवा देते हैं। ये सुनकर हमारी घिग्घी बंध गई।

थोड़ी दूर सड़क के किनारे एक आदमी को सांड-गाड़ी को खींचते देखा, जिज्ञासावश पूछ लिया। हमारे चालक महोदय ने बताया कि हिंदुओं ने जलीकट्टू खेलकर सारे के सारे सांड मार दिए और तो और हिंदुओं को हम लोग मना कर रहे हैं कि प्लीज कुत्तों को मत मारो उन्हें भी जीने का हक़ है लेकिन वो अब दीपावली पर भी नहीं मान रहे हैं। पटाखों की आवाज़ों से कुत्ते डर जाते हैं, वे मर भी सकते हैं। PETA जो बकरीद के समय रेत में समाधि ले चुका था, बमकता हुआ चिल्ला रहा है कि कुत्तों पर दया करो। सर आप ही बताइए! अब सारे पक्षी मार दिए इन काफिरों ने, ओजोन में छेद कर दिया इन काफिरों ने, धरती से पानी की आखिरी बूंद भी खर्च कर दी इन काफिरों ने, अब ले देकर अगर कुत्ते भी मर दिए तो हमारे जैसे लिबरल क्या काफिरों जैसी घास चबाएंगे, हम लोग क्या खाएंगे? मैंने दीन हीन मलीन कृशकाय और भूख से पिचके हुए पेट को देखकर ड्राइवर की स्थिति का अंदाजा लगाया और एक चादर जैसी नकली मुस्कान ओढ़ ली, ये मुस्कान ठीक वैसी ही थी जैसी भूखी लड़कियां सेल्फी लेने के समय अपनी भूख को नजरअंदाज करके ओढ़ लेती हैं।

गाड़ी फिर थोड़ी दूर चली तो हमने सोचा क्यों न एक दो लीटर दूध ले लिया जाए। ड्राइवर से कहा! भैया ज़रा गाड़ी किसी डेयरी वाली दुकान के पास लगा देना, दो मिनट में, दूध खरीदना था ज़रा। वो क्या है न, अपने देश के दूध-मट्ठा-दही-रबड़ी की बात ही अलग है। ड्राइवर ने हमें ऐसे देखा जैसे कि हम एलियन हों, उसने बताया कि देश में अब कोई दूध नहीं पीता। चाय भी लोग पानी में काढा बनाकर पी रहे हैं, सब हिंदुओं का किया धरा है। हमें बड़ा आश्चर्य हुआ कि आखिर ऐसा क्या हो गया? उसने बताया कि हिंदुओं ने देश भर का दूध शंकर जी को चढ़ा दिया शिवरात्रि पर जबकि उनसे कहा था कि इससे अच्छा किसी जरूरतमंद को दे दो। मैंने पूछा लेकिन हिंदुओं के घर में तो गाय भी होती हैं सबने दूध देना बंद कर दिया क्या? इस बार उसने बताया कि वो वामपंथी है इसलिए गाय का दूध नहीं पी सकता केवल बीफ खा सकता है, उसके लिए गाय का दूध पीना हराम है। लेनिन-स्टॅलिन तो चाय भी मुर्रा भैंस के दूध की बनी पीते थे। हमने पूछा लेकिन बाकि के लोग तो पी सकते हैं, उसने तंज भरे अंदाज में कहा कि हिन्दू तो गाय का मूत्र भी पीते हैं, और कांग्रेसियों के बारे में तो कमलनाथ ने बताया ही था कि वे राहुल गांधी के से ही काम चला लेते हैं। हमने कहा कि हिन्दू गाय को पवित्र मानते हैं, इसलिए दूध-दही सब पवित्र होता है। गौ-मूत्र में कैंसर से लड़ने की ताकत भी होती है इस पर हमारा ड्राइवर विफर पड़ा और बोला तो इसका मतलब ये थोड़ा न है कि आप गाय के अलावा सभी जानवरों पर अत्याचार करेंगे।

संक्रांति पर पंछियों को पतंग से मारेंगे, दशहरे पर मूलनिवासी रावण को मारेंगे, ओजोन लेयर में छेद करेंगे, दीपावली पर पटाखों को फोड़कर प्रदूषण फैलाएंगे, कुत्तों को डराएंगे, जलीकट्टू पर साड़ों को मारेंगे और जानवरों के बच्चों का दूध छीनकर शिवजी पर चढ़ाएंगे। आप जागे हुए हिन्दू लग रहे हैं, आपके लिए मेरी गाड़ी में कोई जगह नहीं है। आप बाहर निकलिए अभी, इसी वक्त। मेरे खाने का समय हो गया है, आज घर पर मटन कोरमा, चिकन बिरयानी बनी है, आज के खाने के लिए हम लोगों ने बकरा और मुर्गा पिछले 6 महीने से पाल रखा था। आपकी तरह हम जानवरों पर अत्याचार नहीं करते।

हम, यानि जागे हुए हिन्दू अभी भी अर्द्धसुप्त अवस्था में खड़े हैं कि पाप में सने हुए लोग भी हमें लैक्चर देकर निकल लेते हैं। जिस सनातन धर्म ने जानवरों और प्रकृति से प्रेम करना सिखाया हो अगर हम उसकी बुराई सुनते हैं तो अपनी अनभिज्ञता पर हमें डूब मरना चाहिए। अगर आप सनातन धर्म को नहीं जान पाए हैं तो प्रकृति को कभी नहीं समझ सकते। ?