हाल ही में खबरें आ रही है कि पाकिस्तान के लाहौर में गधों की तादाद में भारी इजाफा हो रहा है और इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने के बाद हुए सर्वे में पता चला है कि पाकिस्तान गधों की संख्या में दुनियाँ का तीसरा सबसे बड़ा देश है।

हालांकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने पदभार ग्रहण करते ही, प्रधानमंत्री कार्यालय में बने भैंसों के तबेले में से लगभग सभी भैंसें बेच दी थी क्योंकि इसके पीछे तर्क था कि भैसों के भूसे और देखभाल पर काफी फिजूलखर्ची हो रही थी हालांकि ये बात अलग है कि भैंसे दूध भी दे रही थी और दूध खरीदने का खर्चा बच रहा था। चूंकि ये बात कोई भी इंसान समझ सकता है, बड़ी ही साधारण सी बात है लेकिन जहाँ गधों की तादाद बढ़ रही हो वहां ऐसी अपेक्षा करना अपनी जीभ को भयंकर विषधर भुजंग से ड्सवाने के बराबर होगा। बजीर-ए-आजम इमरान खान के मुताबिक वे देश फालतू खर्चे कम करके देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर ला रहे हैं।

इमरान खान के देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए भारत के उच्चायुक्त भवन में से बिजली, पानी और गैस की सप्लाई कटवा दी। ताकि ये खर्चा बचाकर वे देश के गधों के लिए एक चारागाह खुलवा सकें जहाँ विचरण करते हुए एक आम गधा भी अपने जीवन के सभी सोपानों को जी सकें एवं अपने मालिक की आर्थिक तरक्की में योगदान देते हुए देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करे।

इमरान खान ने देश की अर्थव्यवस्था मजबूत करने की तीसरी कोशिश में अपनी मजहबी धार्मिक गुरु से तीसरा निकाह कर लिया और उन्हें लंबा से चोगा पहनाकर एक फोटो क्लिक करवा ली। हालांकि ये रहस्य आज भी बरकरार है कि काले लबादे के अंदर तथाकथित धार्मिक गुरु मोहतरमा हैं या मोहगिलमा। हालांकि देश की जनता आज भी इसका इंतज़ार कर रही है कि अब जल्द ही देश की अर्थव्यवस्था “पैदा” होगी।

जैसे ही इमरान खान को अंदाज हुआ कि अर्थव्यवस्था पैदा होने वाली है उन्होंने तत्काल भारत को सबक सिखाने के लिए सेना को आदेश दिये। बिचारी सेना, तालिबान से दो चार कारतूस उधार ले आई और बॉर्डर पर चला दिया, चूंकि अब इधर भारत में कोई एक्सीडेंटल प्राइममिनिस्टर तो है नहीं; भारतीय सेना ने भी जबाब में जब धुआँ भरना शुरू किया तो गधे फिर शांति की ढेंचू ढेंचू राग अलापते दिखाई दिए और हिंदुस्तानी तथाकथित पूर्वबुद्धिजीवी एवं नवपशुप्रेमी भी उनके लिए दया का सागर छलकाते दिखाई दिए। हालांकि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था ने जन्म तो लिया नहीं, दो चार दिन की रोटी पानी का जुगाड़ था वो भी खर्च हो गया।

आपने देखा होगा जब किसी से घर में शक्कर खत्म हो जाती है तो पड़ोस में वो सबसे पहले उसके घर में जाता है जो उसकी जाति का होता है ताकि फजीहत कम से कम ही हो; जैसा कि उम्मीद थी बजीरे आजम सबसे पहले रोटी मांगने पहुंचे सऊदी अरब और अल्लाह की दुहाई देते हुए “च्यवनप्राश” मांगने लगे। दरअसल, “घोड़ों को नही मिल रही घास, गधे खा रहे च्यवनप्राश” वाली कहावत को बजीरे आजम ने गम्भीरता से ले लिया था और सोचा था क्यों न सीधे च्यवनप्राश ही मांगा जाए, घटते घटते कम से कम रोटी तो मिल ही जाएगी। प्रिंस सलमान ने हालांकि पाकिस्तान को ये कहते हुए कुछ पैसा देने का वादा किया कि चलो आपसी भाई-“चारे” का मामला है और सऊदी अरब गधों के प्रति इतनी निर्ममता नहीं दिखा सकता।

जब बात गधों की हो रही हो और अरविंद केजरीवाल का जिक्र न आये ऐसा कैसे हो सकता है। माफ कीजिएगा, दरअसल मैं परम ईमानदार राजा हरिश्चंद्र के अवतार श्री श्री १००८ श्री अरविंद केजरीवाल, जिल्लेइलाही की खिलाफत में ऐसा हरगिज नहीं कह रहा हूँ। मेरा इशारा तो उस वीडियो क्लिप की ओर था जिसमें सरजी “हम गधे हैं” कहते हुए नज़र आ रहे हैं। हालांकि हम बस इसे दौनों देशों के दो समान विचारधारा के व्यक्तियों के बीच गूढ़ भाषा में औपचारिक बातचीत मान रहे है।

गौरतलब है कि बजीरे आजम इमरान खान, अपने घर से ऑफिस हेलीकॉप्टर से गए थे और इसका कारण दिया था फालतू ख़र्च कम करते अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना। इसके बाद बजीरे आजम जब चीन के दौरे पर गए तो इनके देश के न्यूज़ चैनल की हैडलाइन “बीजिंग” की बजाय “बेगिंग” थी यानि पाकिस्तानी न्यूज़ चैनल ये बताने की कोशिश कर रहा था कि हमारे बजीरे आजम “भीख” मांग रहे हैं। हालांकि अंग्रेजी का प्रचण्ड ज्ञान रखने वाले इस देश के न्यूज़ चैनल से ऐसी उम्मीद किसने की होगी, हमें तो “इंशाअल्लाह, बॉयज प्लेड वेल” सुनने की ही आदत थी।

खैर, जनसंख्या की दृष्टि से दिन ब दिन बढ़ता हुआ पाकिस्तान, गधों की संख्या में भी तीसरा सबसे बड़ा देश कैसे बना? ये सब पाकिस्तानी न्यूज़ रिपोर्टर स्वयं गधे पर विराजमान होकर गधों के विषय में बता रहे है। एक गधा महज 4 वर्ष की आयु से ही अपने मालिक के लिए काम करना शुरू कर देता है और 12 वर्ष की आयु तक करता रहता है। हालांकि वन वेल्ट वन रोड के मुद्दे पर चीनियों का कहना है कि गधों ने अपने मालिक के लिए मनमुताबिक काम नहीं किया और इसकी वजह से माल-ढुलाई की समस्या जस की तस है।

खैर, बढ़ती आबादी जहां न तो दो वक्त की रोटी इंसानों को नसीब नहीं है वहां गधों का तो भगवान ही मालिक है। जीवों पर दया करने वाली धरती हिंदुस्तान की तरफ से मैं भगवान से प्रार्थना करता हूँ कि आतंक की धरती पर विचरण करते हुए गधों की इज्जत सुरक्षित रहे एवं वे अपनी पूरे कार्यकाल में भरपेट भोजन करते रहें एवं उन्हें बीच बाजार कोई आत्मघाती हमलावर उड़ा न दे। आमीन!!