हुआ यूं कि आज चमन चिलगोजे जीवन में पहली बार सुबह सात बजे जगे, लेकिन वे खुद को ब्रम्हमुहूर्त में जगा मानकर चल रहे थे। हालांकि वे चल ही रहे लेकिन इसे भी वे अपनी भाषा मे दौड़ना कहते हैं। सौ-दो सौ मीटर चलने के बाद उन्हें लगा कि जैसे वे अयोध्या से रामेश्वरम पहुंच गए, वे उधर ही फुटपाथ पर ऐसे पसर गए जैसे नोएडा में लोग कंडे पाठकर फुटपाथ ब्लॉक कर दे रहे आजकल। सामने से उनके पड़ोस वाले वामपंथी लेनिन कुमार जी की बिटिया धवलदंतिनी जॉगिंग करते आ गई, वे चमन के ऊपर गिरते बार बार बची; चमन सकपका गए। चमन तुरंत उठ खड़े हुए तो बोले कि आज मैं भी जॉगिंग करने आया था थक गया तो थोड़ा सुस्ताने लगा। देवी जी का पारा वैसे ही हाई था ऊपर से वे न्यूज़ एंकर भी तो; फिर क्षमा करने वाले अंदाज में कहकर चली गई कि कोई बात नहीं अंकल, हैपी नागपंचमी; आज के दिन सब माफ। आज टीवी पर मेरा नागपंचमी स्पेशल प्रोग्राम देखना। वे बस इतना ही कह सके, जी बेटा। मन ही मन सोच रहे थे कि आज ज्यादा कसरत हो गई है, अपने होम टाउन में होते तो आधा सेर जलेबी तुलाकर भसक जाते।

ये सब सोचकर चमन सोफे पर अजगर जैसे पसरे ही थे कि मोहतरमा गरज कर बोली सब्जी ले आओ CC, फिर हमें रात में पार्टी भी तो करनी है आज और तुम्हें अजगर बनकर बड़े बड़े कटहल निगलकर अपनी प्रतिभा का परिचय मेहमानों को देना है और मैं खाना बना रही हूँ, किसी के घर दूध पीने न चले जाना; सीधे जाना और वैसे ही वापस आना। चमन उठ खड़े हुए अपनी जिजीविषा को संतुष्ट करने, आज उनकी पार्टी में आप भी आमंत्रित हैं, आइयेगा जरूर। हैपी नागपंचमी!!

खैर, चमन अपने घर आये और अपने पुत्र को पुकारा, कोई जबाब नहीं, पुत्री को पुकारा कोई जबाब नहीं। भाग्यवान के बारे में सोचते हुए ही उनकी घिग्गी बंध जाती है, फिर भी उन्होंने पुकारा। मोहतरमा बाथरूम में थी और वाष्प-स्नान का आनंद उठा रही थी, वे बोली, हैप्पी नागपंचमी CC, फ्रिज में दूध रखा है पी लेना आज मिस न करना। चमन क्रोधित अंदाज में बोले, तुम्हें पता है न कि मैं दूध नहीं पीता, चाय पीता हूँ। देवी जी लगभग गरजते हुए बोली, मैं आऊं क्या? चमन लगभग गिड़गिड़ाते हुए बोले, मत आओ पी रहा हूँ मैं। फ्रिज से दूध निकाल कर उन्होंने टीवी पर न्यूज लगाया, फिर धवलदंतिनी की बात याद आ गई तो उन्होंने हिंदिया टीवी लगा दी; लगाते ही धवलदंतिनी गरजने लगती हैं, वे बोल रही थी कल रात की बारिश की वजह से सांप अपने बिलों से निकलकर फुटपाथ पर पसर जा रहे हैं, आज नागपंचमी है तो क्या हुआ सांप दूध देखकर मुंह फेर रहे हैं, बताइये अब वे बोर्नविटा वाला दूध भी नहीं पीते। चमन भौचक्के वाले अंदाज में अपने को देखते हैं वे भी दूध में बुरे मन से बोर्नविटा दो चम्मच पटक रहे थे। तभी धवलदंतिनी फिर गर्जी, कि ये त्यौहार जानवरों पर अत्याचार है, उन्हें भी खुलकर जीने का हक है, वे जब चाहे घर से निकलकर कहीं भी विश्राम कर सकते हैं, वे दूध नहीं भी पी सकते हैं, यदि वे चाहें तो जलेबी रबड़ी खिलाई जाए आज के दिन आस्तीन के सांपों की भी पूजा की जाए; ऐसा कहकर देवी जी अपनी आस्तीन से एक प्लास्टिक स्नेक निकालकर उसको जलेबी खिलाने लगती हैं और टीवी और ब्रेक आ जाता था। चमन सोफे पर लगभग हायफ़न जैसे पसर कर दिवा स्वप्न में खो गए कि कितना अच्छा होता वे भी शेषनाग होते, भगवान की सेवा करते, मेघनाद वध करते, कई शादियां करते उनकी पूजा होती, धरती का भार उठाते।

इन सबके बीच मैं बताना भूल गया कि मोहतरमा उन्हें CC क्यों कहती है? दरअसल मोहतरमा सुप्रसिद्ध IT कंपनी में HR हैं, शुरू में चमन से शादी हुई तो वे मोहतरमा के हर राज जानना चाहते यहां तक कि HR वाले ईमेल में CC में तीन हजार लोगों का नाम पता भी, मोहतरमा भन्ना गई कुछ दिन बर्दाश्त किया फिर अपने ईमेल में वे चमन को भी CC करना शुरू किया उसके बाद तो हर रिप्लाई टू ऑल के जो ईमेल गिरना शुरू हुए; चमन को काटो तो खून नहीं। चमन हाथ जोड़े गिड़गिड़ाए कि हमें छोड़ दो, माफ करो, लेकिन मोहतरमा में बिच्छू का रूप धारण कर रखा था जो हर प्रणय के बाद नर को खा जाए, चमन की मिन्नतों से उन्होंने नागिन पर कोम्प्रोमाईज़ कर लिया क्योंकि एक बार गलती से चमन ने उन्हें श्रीदेवी जैसा सुंदर कह दिया था।

फिर वे दौनों ऐसे प्रसिद्ध हुए, लोग उन्हें एनीवर्सरी पर भी नागराज की कॉमिक्स भेंट करते या नगीना की डीवीडी। खैर, नाग दम्पति जीवन के 50 बसन्त पार कर चुके थे, लोग उन्हें दूध ऑफर करते तो वे मुंह फेर लेते हालांकि बोर्नविटा डालकर वे पी लेते थे पर साथ में जलेबी होनी चाहिए।