आजादी के पहले तक गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर से लेकर नेताजी सुभाषचंद्र बोस जैसे महापुरुषों और श्रीरामकृष्ण परमहंस एवं स्वामी विवेकानंद जी जैसे आध्यात्मिक गुरुओं को देने वाली बंगाल की धरती आजादी के बाद भी देश को टैलेंट दे रही है। वो बात अलग है कि टैलेंट भी समय के साथ बदलकर धारदार हो रहा है। देश में बड़ी बड़ी ऑर्डिनेंस फैक्टरियां बम बनाने में पसीने पसीने हो जाती हैं वहीं यहां 30*30 के कमरों में ये टैलेंट सड़ रहा है। हालांकि कभी कभार मालदा जैसी घटनाओं में ये टैलेंट दुनिया के सामने आ ही जाता है।

सौरमंडल के तीसरे ग्रह पर पैदा होने के बाद यूँ तो मेरी जिंदगी नीरस थी पर भला हो बकरे जैसी दाढ़ी वाले महापुरुष का जिसने मुझे बंगाल की आन बान शान सुश्री ममता बनर्जी उर्फ दीदी के बारे में बताया। हमारी ज़िन्दगी का पहिया कर्ण के रथ के पहिये की तरह अधमरी ज़िन्दगी के गर्त में फंसा हुआ था और हमारे प्राण गर्म तवे पर जले हुए पराठे जैसे समाप्ति की ओर थे कि तभी मुझे असीम शांति मिली दीदी की पेंटिंग्स में।

ये पेंटिंग जिसके पास में नितिन गडकरी जैसे कैबिनेट मिनिस्टर अपनी फोटो क्लिक करवा रहे हैं, ममता दीदी की बनाई हुई पेंटिंग्स में से सबसे उम्दा है। 2TB की हार्ड ड्राइव में ढेर सारी फिल्में और सीरियल हैं लेकिन जो आनंद इस पेंटिंग को देखने के बाद आया उसी मजे को राहुल गांधी जी देश के हर युवा को देने की बात कर रहे थे। करोड़ों में बिकी इस पेंटिंग में लगातार 10 दिनों तक गौर से देखने के बाद भी अभी तक मैं इस नतीजे पर नहीं पहुंच पाया कि इसमें आखिर बना क्या है? नीचे दाहिने तरफ ये स्वास्तिक है या स्वास्तिक को दण्ड देने की कोशिश की गई है? ऊपर पत्ती और खून से सनी पत्ती देखकर तो गूढ़ अर्थ समझ में आता है किन्तु उसके नीचे कटा हुआ नींबू है या साबुत है, हरी मिर्च या इसका अर्थ चटनी से है। ॐ से रंग टपककर नींबू में जा रहा है, शायद किसी काले जादू का संकेत? किसी धर्मात्मा सज्जन को इस गहरी पेंटिंग का अर्थ समझ में आये तो बताने का कष्ट करें।

 

उसके बाद करोड़ों में बिकी बेशकीमती दूसरी पेंटिंग देखिए। बायीं तरफ झाड़ियों के ऊपर जो चाँद तारे जैसी आकृति है कुछ लोग उसे चांद-तारा समझेंगे लेकिन इसमें भी एक मानव आकृति छिपी है। ऐसा लग रहा है जैसे कोई झाड़ियों से दोनों हाथ ऊपर करके चिल्ला रहा हो – बचाओ बचाओ और पेटिंग के बीचों बीच नारी शक्ति को उकेरा गया है। रंगों का अद्भुत संगम। दाहिने ओर झाड़ियों के ऊपर हवा में लटकी हुई एक हरी गेंद न्यूटन के जमाने से चली आ रही ऑर्थोडॉक्स साइंस को चुनौती देने की साहसिक कोशिश।

लोग फालतू में ममता दीदी को जिहाद से जोड़ते हैं, बीजेपी से मतभेद होने का ये मतलब थोड़ी है कि दीदी बम से उड़वा देंगी। कहने का मतलब है कि पेटिंग्स के होते हुए ऐसा करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी जिस दिन दीदी ब्रश उठाती हैं, उस दिन … आप समझदार हैं। दीदी ने आपसी समझदारी की बानगी देते हुए महामहिम राष्ट्रपति जी को भी अपनी बनाई हुई एक पेंटिंग भेंट में दी थी।

हालांकि पेंटिंग को देखने के बाद राष्ट्रपति जी के सुरक्षा गार्ड्स ये तय नहीं कर पाए कि इसमें कोई खतरा नजर आ रहा है या नहीं। दरअसल, पिछले कई दिनों से लगातार एकटक देखने के बाद भी मैं खुद ही समझ नहीं पा रहा इसमें बना क्या है? हिमाचल प्रदेश वालों की मानें तो इसमें बादल फटने की घटना को बेहद खूबसूरत तरीके से बनाया गया है। कोई बोल रहा था कि ये सबसे टेस्टी कुकुरमुत्ते की पेंटिंग है, कोई कह रहा था कैसे साम्प्रदयिक ताकतें शांतिदूतों पर हमला कर रही हैं पेटिंग के रंग ये संदेश दे रहे हैं। हालांकि, मुझे पक्का यकीन है कि आने वाले दिनों में ये पेंटिंग रिसर्च के लिए दी जाएगी क्योंकि स्वयं लियोनार्डो द बिंची की मोना लिसा पेटिंग इसके सामने तुच्छ नजर आती है।

इन पेटिंग्स में जहां एक ओर हाथ जोड़कर नमस्कार किया जा रहा है वहीं दूसरी ओर खुद का गला घोंटकर समाज में नारियों पर हुए अत्याचार को दिखाया गया है। नारी को इतना तुच्छ समझा जा रहा है कि नारी के सर का साइज एक फूल के बराबर हो गया है। हरी झाड़ियों में पंछियों की जगह कछुआ बैठे हैं। करुण क्रंदन करता हुआ लाल आसमान मानो फट ही पड़ेगा; अद्भुद कला, अद्भुद विचार। वाह! ममता दीदी वाह!

इतनी गहरी पेटिंग्स को देखकर लगता है, कि हे ममता दीदी! कला छोड़कर आप किस लाइन में आ गई। आपको मोदी से नहीं पिकासो से टकराने के लिए बनी हैं। जैसे इस पेंटिंग में ये ऊंट का मुंह, या घोड़े का या भेड़ का; पता नही है क्या लेकिन जो भी है बड़ा गूढ़ है इसे समझने के लिए ही वर्षों की रिसर्च करनी पड़ेगी और यही आपको लियोनार्डो द विंची और पिकासो की श्रेणी में खड़ा करती है।

भारतवर्ष का ये तुच्छ नागरिक आपकी कला से प्रभावित होकर कभी भी पेंट ब्रश न उठाने का संकल्प लेता है। ये बलिदान दीदी आपको समर्पित है। काली माता आपको और भी पेंटिंग्स बनाने की शक्ति प्रदान करें। आपकी कीर्ति युगों युगों तक इस धरती पर छा जाए और ये पेंटिंग्स सदियों तक कौतूहल का विषय बनी रहें। आमीन!!