इतना बड़ा दिल्ली-मेरठ हाइवे बन गया है, खैर काम बीजेपी/गैर-बीजेपी जिसने भी किया हो; उसकी तारीफ होनी चाहिए।

लेकिन मैं इंतज़ार कर रहा हूँ, रवीश जी की स्टोरी का। रवीश कुमार जी कोई नई कहानी लेकर आयेंगे और पूरा का पूरा हाइवे ही फालतू का, जनता के पैसे की बर्बादी बता देंगे। जैसा कि वर्टीकल गार्डन वाले कांसेप्ट को फालतू की सजावट बोल रहे थे। वैसे तो रवीश जी ने नोटबन्दी के समय खूब माहौल बनाया लेकिन कुछ एक्स्ट्रा होम वर्क करके बैठ गए थे, सो अब वो एक एक करके अब रिलीज कर रहे हैं।

रवीश जी हाल ही में बंगाल घूम कर आये हैं, इसके बावजूद बंगाल पंचायत चुनाव में भारी हिंसा होने का प्राइम टाइम नहीं दिखा सके। रवीश जी अपनी न्यूज़ स्टोरी में काफी सेलेक्टिव है, रवीश जब बोलना शुरू करते हैं तो ऑडियंस ऐसे कन्विंस होती है जैसे भगवान से साक्षात्कार हो गया हो। जबकि स्वयं रवीश के भाई कांग्रेस के नेता हैं जिन पर बलात्कर जैसे मामले चल रहे हैं और उनकी बहन पर गबन का आरोप है लेकिन इतने बड़े समाजसुधारक रवीश जी आज तक इससे अनभिज्ञ हैं। उनको लगता है जैसे ही उनका प्राइम टाइम TV पर टेलीकास्ट होता है वैसे ही मोदी और अमित शाह लोगों की केबल/टाटा स्काई काट देते हैं और प्राइम टाइम् खत्म होते ही फिर से जोड़ देते हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो अमित शाह और मोदी के पास दैवीय शक्तियां हैं जो कम से कम 50 करोड़ लोगों की केबल एक साथ काटने में उन्हें समर्थ बनाती हैं। उत्तर प्रदेश में बस हादसा हुआ था तो रवीश जी चिल्ला चिल्लाकर बता रहे थे कि ड्राइवर ने इयरफोन लगा रखा है जबकि खुद इयरफोन लगाकर गाड़ी चलाते हुए रंगे हाथों पकड़े गए। वह स्टोरी आप यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

रवीश जब न्यूज़पेपर पढ़ना शुरू करते होंगे तो डिस्लेक्सिया की समस्या के चलते मोदी मैटर एन्टी-मोदी में लिखा हुआ नजर आता होगा। यहाँ तक की जब घर में गैस सिलेंडर देखते होंगे तो उज्ज्वला योजना का डर सताता होगा, टॉयलेट जाते होंगे तो स्वच्छ भारत अभियान का डर, ऑनलाइन आने पर भक्तों का डर; कमरे की लाइट जलाई तो फ्री CFL वाली उजाला स्कीम का डर, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का डर, बाहर सड़क पर निकले तो प्रधानमंत्री सड़क योजना का डर, जगह जगह तिरंगा लगा है उसका डर, आजकल थियेटर में राष्ट्रगान चलता है तो रवीश जी उधर भी नहीं जा सकते; जब से मोदी सरकार आई है चारों तरह डर ही डर दिखने लगा है रवीश जी को। लोगों ने बेचारे रवीश जी के आसपास डर का आवरण बनाकर रख दिया है। भक्त लोग कहते हैं की इनका इतना पैसा डूब गया विमुद्रिकरण के चक्कर में, अब कांग्रेस के टुकड़े ही एकमात्र आय का स्रोत बचा है; इसलिए ऐसे प्राइम टाइम करने पड़ रहे हैं। अब सच्चाई क्या हैं यह तो रवीश जी ही समझे।

रवीश जी पहले ट्विटर पर भी दर्शन देते थे, लोगों ने दरिन्दों की तरह हमले करने शुरू किए तब से लेकर आजतक रवीश जी नजर नहीं आये। उनको ट्विटर से बहुत डर लगता है; हर वो चीज जो मोदी से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप स जुड़ी है उससे रवीश जी को डर लगता है। चिकित्सीय भाषा में इसे मोदीफोबिया कहते हैं, जिसका इलाज नहीं है कोई, हालांकि मैने इसका टीका विकसित कर लिया है लेकिन जब इनके माथे पर टीका लगेगा उस दिन से ये साम्प्रदायिक हो जाएंगे जोकि रवीश जी होना नहीं चाहते। दिन भर ब्राम्हणवाद को कोसने वाले रवीश जी खुद ही ब्राम्हण हैं लेकिन उन्हें खुद को ब्राम्हण कहलवाने से भी डर लगता है। यूँ कहिये रवीश जी और डर एक दूसरे के पर्यायवाची शब्द हैं।

आइये बीमार रवीश जी के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं, उम्मीद करते हैं वे जल्दी ठीक होकर लोगों के समक्ष उपस्थित होंगे।