“पर्यावरण बचाओ, पर्यावरण का संरक्षण करो” जैसे नारो को देने वाले अक्सर लक्ज़री गाड़ियों घूमते है। इनको अगर घर से दो कदम की दूरी पर भी चाय-पानी करना हो तो जाएंगे गाड़ी से ही। सिर्फ गाड़ी ही नहीं इनके घर का कोई भी ऐसा कोना नहीं होता जहां AC नहीं लगा होता है, यहाँ तक कि बाथरूम और स्टोर रूम तक मे भी।

AC के कारण वातावरण को बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। AC में इस्तेमाल होने वाला रेफ्रिजरेंट्स पर्यावरण के लिए बहुत ही नुकसानदायक है। रेफ्रिजरेंट्स में से CFC तो हमारे ओज़ोन परत को इतना नुकसान पहुंचा चुका है कि अब अल्ट्रावॉयलेट तरंगों के संपर्क में आने से स्किन कैंसर के मरीजों की संख्या विश्वभर में तेज़ी से बढ़ रही है। अगर इसी तरह से AC का उपयोग बढ़ता रहा तो स्थिति भयावह हो सकती है।

महानगरों में AC के कारण कारण लोग खुले में निकलते ही औसत तापमान में भी झुलसी महसूस करने लगे है। सोचिए उस परिस्थिति में क्या होगा जब गर्मी अपने चरम पर हो और पावर ग्रिड फेल हो जाये, ऐसा पहले भी कई बार हो चुका है। उस स्थिति में महानगरों के भवन और ऑफिस एक तरह से भट्टी में बदल जाएंगे।

ताज़ा मामला ये है कि ऊर्जा मंत्रालय ने एक प्रस्ताव पर विचार किया है, जिसमे AC का टेम्प्रेचर बाय-डिफॉल्ट 24℃ पर सेट रहेगा। ऊर्जा मंत्रालय के तर्क के अनुसार मानव शरीर का तापमान सामान्य तौर पर 36-37 डिग्री सेल्सियस होता है। लेकिन देश में ज्यादातर कॉमर्शियल ऑफिस, रेस्त्रां, होटेल्स एसी का तापमान 18-21 डिग्री रखते हैं, एयर कंडिशनर में 1℃ टेम्प्रेचर बढ़ाने से इलेक्ट्रिसिटी खपत में 6 प्रतिशत की बचत होती है। अगर ये नियम लागू हो गया तो देश की ऊर्जा खपत में साल 20 अरब यूनिट बिजली की बचत हो सकती है। ऐसे में भारत जैसा देश जो अपने ऊर्जा जरूरत को पूरा करने के लिए पहले ही बहुत ज्यादा खर्च कर रहा है उसके लिए ये दोहरा लाभ दे सकता है।

अमूमन होटल तथा दफ्तरों में तापमान 18 से 21 डिग्री रखा जाता है। यह तकलीफदेह तो है ही बल्कि शरीर के लिए भी हानिकारक है। इस तापमान में लोगों को गर्म कपड़े पहनने पड़ते हैं या कंबल का उपयोग करना होता है। इसको देखते हुए जापान जैसे कुछ देशों में तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रखने के लिये नियमन बनाये गये हैं।

जैसा की भारत में होता आया है इस मुद्दे को भी तथाकथित बुद्धिजीवियो ने इसे अपने आजादी से जोड़ दिया है। NDTV की पत्रकार निधि राजदान कह रही हैं “अब सरकार तय करेगी की मैं कितना चावल खाऊं और कितना पानी पियूँ”!

दरअसल इन लोगो को इस फैसले से दिक्कत नही हैं, असल दिक्कत हैं कि यह सलाह मोदी सरकार की तरफ से आई हैं, वरना निधि राजदान का पर्यावरण प्रेम आप इस ट्वीट में देख सकते हैं।

यह दीपावली पर पटाके बैन करने पर हिन्दुओ के विरोध के खिलाफ कहा था की हिन्दू पर्यावरण में भी कम्युनल एंगल देख रहे हैं।
यह भी दीपावली के मौके पर कहा था, इन्हें पर्यावरण प्रेम सिर्फ दीपावली पर याद आता हैं।

वैसे निधि मैडम, मोदी सरकार खुले में शौच के खिलाफ भी हैं, तो क्या इसे भी आप अपनी आजादी का हनन मानकर खुले में ही …

अब जरा न्यूज़ 24 के पत्रकार मानक गुप्ता को देखिये, कैसे इतने महत्वपूर्ण सलाह को हवा में उड़ा रहे हैं, क्योकि यह सलाह सरकार की तरफ से आई हैं।

जबकि उनकी यह ट्वीटस देखिये कैसे दिल्ली को जहरीली हवा से बचाने की अपील कर रहे हैं, वैसे ये सिर्फ अपील भर ही कर रहे हैं जहरीली हवा साफ हो या ना हो उससे इन्हें कोई मतलब नही, इन्हें सिर्फ मुद्दे खड़े करने से मतलब हैं। ये कभी यह नही बतायेंगे की जहरीली हवा साफ कैसे होगी?

बाकी मानक जी की इस ट्वीट से पूर्ण सहमति हैं, मानक जी जैसे लोग काई की तरह ही पर्यावरण को लग गए हैं खुद कुछ करेंगे नही, दूसरा कुछ करेगा तो उसका मजाक उड़ायेंगे अपनी आजादी का हनन समझेंगे।

अब कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी जी को क्या कहा जाए एक तरफ तो ये प्रधानमंत्री को कोस रही हैं, पर्यावरण की बेहतरी के लिए सरकार कोई कदम नही उठा रही हैं और जब उठा रही हैं तो इसे ये पर्सनल आजादी से जोड़ रही हैं,  बहुत कन्फ्यूजन हैं भाई!!

और इस ट्वीट के साथ ही विडम्बना ने कुँए में कूदकर आत्महत्या कर ली
BJP वाले फिलहाल आपकी यह ट्वीट पढ़ने के बाद दीवाल पर सर पटक रहे हैं

कांग्रेसी नेता जयवीर शेरगिल के साथ भी यही परेशानी हैं, ये चाहते हैं कि पर्यावरण बचे लेकिन उसकी कीमत इन्हें ना चुकानी पड़े, इनका AC नही बन्द होना चाहिए गरीबो के सारे काम भले रोक दिए जाएं।

यह ट्वीट पढ़कर विडम्बना कुँए की तरफ जाती दिखी हैं, कोई रोक लो उसे

इस खबर पर सबसे ज्यादा परेशान वो हैं जो ग्लोबल वार्मिंग, पर्यावरण पर ज्ञान-गंगा बहाते रहते हैं जैसे पेड़ न काटो, ये न करो वो न करो, सरकार कोई सख्त कदम उठाये ऐसी मांग करते हैं, और अब जब सरकार ने उठा लिया तब रो रहे अरे ऐसे कैसे हमारी आराम में कमी थोड़ी करनी है, नियम कानून तो सिर्फ गरीबो के लिए होने चाहिए। बस ऊपर जो हमने ट्वीट लगाई हैं यह इनकी यही हिप्पोक्रेसी दिखाने के लिए लगाई हैं। ये लोग उनमें से हैं जो 16 डिग्री पर AC चलाकर रजाई ओढ़ कर सोते हैं।

बहरहाल, इनका रोना-धोना तो चलता रहेगा और ये लोग कभी खुश नही होंगे, पर आम जनता को समझना होगा की हमे अपनी पीढ़ियों के लिए एक बेहतर पर्यावरण देकर जाना हैं और इसकी बेहतरी के लिए हम जो कुछ भी कर सकते हैं, हमे करना चाहिए।