एक प्रसिद्ध शेर है :

मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है। पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।

हम बात कर रहे हैं, पश्चिम बंगाल के कलकत्ता शहर के हरिदेवपुर के रहने वाले और बंगलौर में कार्यरत पेशेवर सॉफ्टवेयर इंजीनियर सत्यरूप सिद्धांत की जिन्होंने दमा जैसी बीमारी से लड़ते हुए बेहद कम उम्र में ही विश्व की सात महाद्वीपों की सबसे ऊंची सात पर्वत चोटियों (कुल 9 पर्वत चोटी) और सात ज्वालामुखियों को फतह कर तिरंगा लहरा दिया। ये हौसला ही है जिसे कोई बीमारी भी नहीं रोक सकी। ऐसा करने वाले सत्यरूप दुनियाँ के सबसे कम उम्र के ऐसे पहले व्यक्ति बन गए हैं।

16 जनवरी 2019, सुबह के 6:28 मिनट पर उन्होंने जैसे ही अंटार्टिका की सबसे ऊंची चोटी माउंट सिडली पर -40℃ तापमान में तिरंगा लहराया विश्व का एक पुराना रिकार्ड टूट गया। उनसे पहले ऑस्ट्रेलिया के डेनियल बुल ने 36 वर्ष 157 दिन की उम्र में ये कारनामा किया था जबकि सत्यरूप ने मात्र 35 वर्ष 262 दिनों में ये रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। 7 ज्वालामुखी और 9 पर्वतचोटी (7 Mountain Summits) फतह करने वाले वे पहले भारतीय भी बन चुके हैं।

अफ्रीका का माउंट किलिमंजारो, यूरोप का एलब्रुस, अलास्का का माउंट डेनाली और फ्रांस का माउंट ब्लांक भी उन चोटियों में से है जिसे उन्होंने फतह किया है। सन 2012 में उन्होंने अंटार्टिका का विन्सन और सन 2016 में माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा लहराया। ओशिनिया क्षेत्र की सबसे ऊंची चोटी पापुआ न्यू गिनी की कारस्टेन्स पिरामिड पर भी उन्होंने चढ़ाई की थी। दिसम्बर 2018, उत्तरी अमेरिका की सबसे ऊंची ज्वालामुखी चोटी पिको दे उरीजावा पर उन्होंने चढ़ाइ करके भारत का परचम फहराया।

हर महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ाई करने को पर्वतारोही की भाषा में ‘Mountain Summits’ कहा जाता है। इस हिसाब से देखा जाए तो सत्यरूप ने हर महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी पर फतह हासिल कर ली है। एशिया का एवरेस्ट, उत्तरी अमेरिका का डेनाली, दक्षिणी अमेरिका का अकॉन्केगा, अफ्रीका का किलिमंजारो, अंटार्टिका का विन्सन मैसिफ, यूरोप का एलब्रुस, ओशिनिया का कार्टेनज़ पिरामिड और ऑस्ट्रेलिया का कोससिसजको इन Mountain Summits में आते हैं।

आइये एक नजर डालते है उनकी उपलब्धियों पर :

9 पर्वत चोटियां (7 Mountain Summits)

1. माउंट किलिमंजारो, अफ्रीका (5895 मीटर) – जून 29, 2012 और जून 14, 2018

2. माउंट एलब्रुस, यूरोप (5642 मीटर) – जून 27, 2013

3. माउंट अकॉन्केगा, दक्षिण अमेरिका (6962 मीटर) – जनवरी 13, 2014

4. माउंट डेनाली, उत्तरी अमेरिका (6190 मीटर) – जून 23, 2014

5. माउंट ब्लांक, फ्रांस, पश्चिमी यूरोप (4810 मीटर) – सितम्बर 23, 2014

6. माउंट कोससिसजको, ऑस्ट्रेलिया (2228 मीटर) – जून 12, 2015

7. माउंट एवरेस्ट, एशिया (8848 मीटर) – मई 21, 2016

8. माउंट कारस्टेन्स, ओशिनिया (4884 मीटर) – जून 13, 2017

9. माउंट विन्सन मैसिफ, अंटार्टिका (4892 मीटर) – दिसम्बर 15, 2017

7 ज्वालामुखी :

1. माउंट किलिमंजारो

2. माउंट एलब्रुस

3. माउंट ओजोस डेल सलाडो, दक्षिण अमेरिका (6893 मीटर) – जनवरी 15, 2018

4. माउंट दमावन्द, एशिया (5610 मीटर) – सितम्बर 10, 2018

5. माउंट गिलुवे, ओशिनिया (4367 मीटर) – नवम्बर 9, 2018

6. माउंट पिको डे ओरीजाबा, उत्तरी अमेरिका – दिसम्बर 5, 2018

7. माउंट सिडली, अंटार्टिका – जनवरी 16, 2019

भारत में क्रिकेट के अलावा बाकी खेलों की स्थिति ये है कि प्रतिभावान खिलाड़ियों को भी पैसों की तंगी का सामना करना पड़ता है। सत्यरूप के सबसे बड़ी समस्या थी इतनी महंगी यात्राओं के लिए फंड जोड़ना, स्पॉन्सर मिलना भी मुश्किल होता है। लोगों ने भी उनकी मदद की और आखिरकार वे अपने सच करने में सफल हो गए। भारत सरकार को भी ऐसे व्यक्तियों की मदद करनी चाहिए जो अपनी व्यक्तिगत जीत में भी तिरंगा लहराते हैं क्योंकि ये जीत केवल उनका मनोबल नहीं बढाती; ये जीत हम सवा सौ करोड़ लोगों को गर्व महसूस कराती है।