शारदा चिटफंड घोटाले मामलें में पश्चिम बंगाल में चल रहे पॉलिटिकल ड्रामेबाजी पर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव ने एक धारदार ब्लॉग लिखा है, जिसे पढ़कर हर कोई सारदा चिटफंड घोटाले की सच्चाई से अवगत हो जाएगा।

पढ़ें कैलाश विजयवर्गीय का ब्लॉग

अरबों रुपए के शारदा चिटफंड घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा एक आईपीएस अधिकारी से पूछताछ करने के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विरोघ और धरने के नाटक से कई सवाल उठ रहे हैं। कई विपक्षी दल सीबीआई जांच को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर सवाल उठा रहे हैं। सवाल तो टीएमसी, कांग्रेस, वामदल, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल जैसे राजनीतिक दलों की घोटालों में संलिप्तता को लेकर पहले से ही उठ रहे हैं। शारदा घोटाला पश्चिम बंगाल में कम्युनिस्ट राज में शुरु हुआ और जांच हुई ममता सरकार के शासन में। शारदा घोटाले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर कांग्रेस और कम्युनिस्ट दलों के नेता ही सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। पश्चिम बंगाल कांग्रेस की वकील शाखा की तरफ दायर याचिका पर 9 मई 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। शारदा घोटाले में जांच भी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रही है। ममता सरकार जिस आईपीएस अफसर राजीव कुमार को बचाने की कोशिश में भारतीय संविधान की धज्जियां उडा रही हैं, उसने नहीं शारदा घोटाले की जांच शुरु की थी। राजीव कुमार को शारदा घोटाले की जांच के लिए बने विशेष कार्यबल (SIT) का प्रभारी बनाया गया था। शारदा घोटाले से जुड़े तमाम कागजात राजीव कुमार और उनके सहयोगियों के पास हैं। सीबीआई को शक है कि राजीव कुमार इन कागजातों को नष्ट कर सकते हैं। ममता बनर्जी को डर है कि कागजात सीबीआई के हाथ लग गए तो उनपर और उनके परिवार के लोगों पर आंच आ सकती है। यह भी माना जा रहा है कि राजीव कुमार के पास ममता बनर्जी की कोई दुखती रग भी है।

ममता बनर्जी का डर भी ठीक हैं क्योंकि तृणमूल कांग्रेस के कई नेता जेल में हैं या जमानत पर हैं। उनकी पार्टी के सांसद रहे कुणाल घोष, तापस पाल, पार्टी के उपाध्याक्ष रजत मजूमदार, ममता सरकार में परिवहन मंत्री रहे मदन मित्रा जेल में रहे हैं। कांग्रेस के नेता पी चिदंबरम की पत्नी खुद इस मामले में आरोपी हैं। कांग्रेस के नेता मतंग सिंह और उनकी पूर्व पत्नी जमानत पर है। ममता बनर्जी के कई करीबी इस मामले में फंसे हुए हैं। शारदा घोटाले की तरह रोजवैली घोटाले में भी तृणमूल कांग्रेस के कई नेता गिरफ्तार हुए हैं। ममता के करीबी नेता सुदीप बंधोप्ध्याय भी जमानत पर चल रहे हैं। पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष रहे अधीर रंजन चौधरी ने तो ममता बनर्जी के खिलाफ अभियान छेड़ रखा था। ममता को बचाने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उन्हें पद से ही हटा दिया। अधीर रंजन चौधरी ने तो ममता के नाटक के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग कर दी है। हैरानी की बात यह है कि पश्चिम बंगाल कांग्रेस के तो सुप्रीम कोर्ट ममता बनर्जी के खिलाफ खड़े होते हैं कई बड़े नेता जैसे कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी उनकी पैरवी करते हैं। कांग्रेस के बड़े मानस भुइयां 2013 में सबसे पहले सीबीआई जांच की मांग की थी। बाद में मानस खुद ममता के साथ चले गए।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल, सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव, बसपा अध्यक्ष मायावती, राजद अध्यक्ष लालू यादव, तेजस्वी यादव समेत कई नेता ममता बनर्जी के साथ खड़े हैं। केजरीवाल खुद जांच में फंसे हैं। अखिलेश यादव ने स्मारक घोटाले में मायावती की जांच शुरु कराई थी। लालू चारा घोटाले में जेल में हैं। तेजस्वी भाजपा पर फंसाने का आरोप लगा रहे हैं। लालू की जांच के दौरान केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। सजा सुनाने वाले सीबीआई कोर्ट के जज तृणमूल कांग्रेस में हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि ममता बनर्जी के बनाए गए चित्रों को चिटफंड कंपनी ने खरीदा था। उसके के लिए बड़ी रकम अदा की गई थी। कुछ दिन पहले शारदा चिट फंड घोटाला मामले में सीबीआई ने पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी माणिक मजूमदार से पूछताछ की थी। यह भी बताया गया है कि मजूमदार तृणमूल कांग्रेस के खजाने का काम देखते हैं। शारदा समूह के प्रवर्तक सुदीप्त सेन द्वारा पेंटिंग्स खरीदे जाने की सारी जानकारी बनर्जी के पास है। सच तो यही है कि सीबीआई जांच में खुद को और अपने नजदीकी लोगों को फंसते देख ममता बनर्जी देश के संघीय ढांचे पर आघात कर रही है। तमाम घोटालों में फंसे नेता अपनी गर्दन बचाने के लिए ममता बनर्जी के साथ एकजुटता का नाटक कर रहे हैं। इन नेताओं को न संविधान की परवाह और न ही सांविधानिक संस्थाओं की। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हो रही जांच को लेकर केंद्र सरकार को निशाना बनना महज ऐसे राजनीतिक दलों की राजनीति है। ममता बनर्जी की जांच कराने वाले कांग्रेस और कम्युनिस्टों को ममता के आरोपों का जवाब देना चाहिए।

 

साभार : कैलाश विजयवर्गीय ब्लाॅग 

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