आज फिर राजधानी में एक किसान रैली हुई, अच्छी बात हैं किसानों को अपनी मांग सरकार के सामने रखनी भी चाहिए। किसान ही तो इस देश का असली अन्नदाता है जब तक वो खुशहाल नहीं होगा देश कैसे खुश रहेगा, लेकिन जब नेता उनके रैली को हाईजैक कर ले तो समझ जाओ किसानों से किसी को लगाव नहीं हैं।

ऐसा ही कुछ रामलीला मैदान में हुई किसान रैली में हुआ। किसानों के मुद्दे के नाम पर एक जनवादी गिरोह और विपक्षी नेता ने पूरे मुद्दे को हाईजेक कर लिया। इतना संवेदनशील मुद्दा था, कुछ किसान सड़क पर उतरे थे अपनी मांग लेकर, चलिए ये अच्छी बात हैं लेकिन विपक्षी नेता वहाँ पहुँच कर एक दूसरे को गले लगाकर किसानों को क्या सन्देश देना चाहते थे?

हम सब एक है 2019 में हमारी एकता मोदी को उखाड़ फेंकेगी? एक सीरियस आन्दोलन जिसमे राजनीति नही होनी चाहिए थी, वहाँ इन लोगो ने यह नौटंकी करके पूरे आंदोलन को हास्यापद स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया।

यह वाकई दुर्भाग्यपूर्ण हैं, एक आदमी के विरोध के लिए विपक्ष इतना नीचे गिर गया कि किसानों की रैली में जाकर अपनी ताकत दिखा रहा हैं, विपक्ष को यह समझना होगा अकेले मोदी विरोध से चुनाव नहीं जीते जा सकते, विपक्ष के बड़े नेता कब mature होंगे या फिर कभी नहीं, मेरी नजर में ये एक तरह का सेल्फ गोल हैं, जो विपक्ष पर तो भारी पड़ेगा ही साथ में किसानों से जुड़े मुद्दों को भी यह मजाक बना गया।

इस रैली में योगेंद्र यादव, हाशमी भी शामिल हुए जो एक खास तरह की विचारधारा से सम्बंधित है। किसानों को इनसे बच के रहने की जरूरत है, दरअसल यह लोग ठग है जो किसानों के मुद्दों को अपने एजेंडे के चक्कर मे ठग लेंगे।

किसान रैली में आये लोगो की बात की जाए तो, इस रैली में कुछ मजदूर थे जो पैसों के पीछे आए थे, कुछ लेफ्ट विचारधारा के छात्र, कुछ वामपंथी एक्टिविस्ट, कुछ ऐसे पत्रकार जो वामपंथ की खाल ओढ़ के अपना एजेंडा चला रहे हैं, हालांकि किसान बेहद कम थे।

लाल-हरे झंडे लेफ्ट पार्टी का सिंबल लेकर चलने वाले लोगो को देख कर ही मैं समझ गया था कि किसानों के नाम पर सिर्फ और सिर्फ अपनी अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकी जा रही हैं ।

क्या इन नारों से भला होगा किसानों का?

बहरहाल यह देश का दुर्भाग्य ही है कि किसानों के नाम पे विपक्ष और लेफ्ट के लोगो ने अपनी महफ़िल सजा ली और 2019 के लिए बता दिया कि हम मोदी से कम नही है।

नियत की बात की जाए तो पंजाब में किसानों की स्थिति बेहद गम्भीर हैं वह कर्ज में डूबे हैं, यही हाल कर्नाटक के हैं। इनके लिए कांग्रेस के पास कोई योजना नही हैं। राजस्थान में अपने घोषणा पत्र में बोलती है हम किसानों का कर्ज 10 दिन में माफ कर देंगे, लेकिन अपनी योजना नही बताती की किसानों को आगे कर्ज लेने की जरूरत ही ना पड़े।

कांग्रेस के मुखिया इन योजनाओं को बताने की जगह किसानों के नाम पर विपक्षी ताकत की नुमाइश करते नजर आए। बहरहाल यह एक नौटंकी थी जो पूरी हुई कल से कोई भी किसान का नाम नही लेगा ,और किसान फिर छला जायेगा।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं, जिसके लिए Epostmortem उत्तरदायी नहीं है और ना ही अनुमोदित करता हैं।