राजस्थान विधानसभा चुनाव अपडेट ( Rajasthan Assembly Elections) जयपुर : राजस्थान में सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने की बेकरारी के बीच चुनावी घमासान सातवें आसमान पर पहुंच रहा है। सियासी दांव-पेच और तीखे बयानों के बीच चल रही सर्द हवाओं में चुनावी गर्माहट घुल रही है तो राजनीतिक पारा भी चढ़ता जा रहा है। वहीं, सियासतदारों की भागमदौड़ के दरमियान सियासी जमीन से उठ रहे धूल के गुब्बार के बीच बदलते हवा के रुख ने चुनावी विशेषज्ञों के बीच नई बहस छेड़ दी है।

हालांकि, अंतिम फैसला 11 दिसंबर को होगा, लेकिन, बदलते समीकरण के बीच ये चर्चा जरूर गर्म होती जा रही है कि क्या राजस्थान में सियासी हवा बदल रही है। बहरहाल अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी, अभी भी लगभग 50% वोटर ख़ामोश हैं और चुपचाप बैठा हैं, आमतौर पर ये वोटर ही चुनाव की दिशा तय करता हैं।

मैं पिछले 7 दिन से लगभग पुरे राजस्थान में घुमा रहा हूँ ट्रेन बस से सफ़र करते हुए देखा हैं की वोटर अभी भी इंतज़ार कर रहा हैं।

कांग्रेस के स्टार प्रचारक कहाँ है?

राजस्थान विधानसभा चुनाव प्रचार में बीजेपी बहुत आगे दिखाई दे रही हैं जहाँ 25 नवम्बर को पीएम मोदी ने अलवर से चुनाव प्रचार की की शुरुआत की उसके बाद भीलवाड़ा ओर कोटा में भी सभा की। उनकी सभाओं में उमड़ती भीड़ यह बता रही हैं कि राजस्थान के लोगों में मोदी जी को लेकर आज भी एक अलग उत्सुकता हैं और लोग उन्हें सुनना चाहते हैं। वही उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, वसुंधराराजे, अमित शाह भी एक के बाद एक रैलिया कर रहे हैं।

दूसरी तरफ़ राहुल ने पोखरण ओर जोधपुर में रैलियां की है, कांग्रेस ने लगभग 40 स्टार प्रचारक भी बनाए हैं पर कांग्रेस के स्टार प्रचारक अभी मैदान में नज़र नहीं आ रहे हैं।

क्या हैं सम्भाग का रंग

हड़ौती में बीजेपी आगे दिखाई दे रही है, यह सीएम वसुंधरा का गढ़ माना जाता हैं। यहाँ हो सकता हैं कि बीजेपी पिछली बार की तरह एक तरफ़ा स्वीप ना करे लेकिन सीट के मामले में बढ़त बनाए हुए है। अलवर में पीएम की सभा के बाद और बागी नेता आहूजा के प्रचार में वापस जुट जाने पर एक तरह से बीजेपी आगे दिखाई दे रही हैं। तो वही जयपुर में शहरी मतदाता होने के कारण बीजेपी बराबरी पर खड़ी हैं।

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शेखावाती में कांग्रेस को किसान आंदोलन का फ़ायदा हो सकता हैं पर वहाँ भी सत्ता विरोधी वोट में कामरेड सेंध लगा रहे हैं और 2-3 सीट पर मज़बूत होकर उभरे हैं। यहाँ अभी बीजेपी कमज़ोर पड़ रही हैं पर 4 दिसम्बर को सीकर में होने वाली पीएम की रैली समीकरण बदल सकती हैं।

उदयपुर सम्भाग में दोनो की कड़ी टक्कर हैं जहाँ पर बीजेपी ने भीलवाड़ा में पीएम मोदी की बड़ी रैली करके अपने पक्ष में माहौल करने की कोशिश की हैं।

बीकानेर में एक बात हर कोई बोल रहा हैं की रामेश्वर डुडी ने अपनी सीट बचाने के चक्कर में पुरे जिले का समीकरण बिगाड़ दिया जिससे बीजेपी को बढ़त मिल रही हैं। सीमावर्ती ज़िला श्रीगंगानगर में सूरतगढ़ को छोड़कर बीजेपी तो नज़र नहीं आ रही पर यहाँ निर्दलीय काफ़ी हावी हैं। वही हनुमानगढ़ ज़िले की एक सीट को छोड़कर बीजेपी और कांग्रेस में मुक़ाबला बहुत ही काँटे का हैं।

क्या रुख़ हैं मारवाड़ का ? 

मेरी यात्रा में मुझे जिसने सबसे ज्यादा चौकाया वह हैं मारवाड़, अशोक गहलोत का गढ़ होने के कारण मुझे लगा की यहाँ एक तरफ़ होगा पर यहाँ रेलवे स्टेशन पर मेरी मुलाक़ात ऑटो ड्राइवर पवन से हुयी, होटल जाते समय मैंने पुछा “भाया चुनाव का क्या हैं?” उसने कहा “सबसे अच्छा फूल ओर फूल हीं जीतेगा” इस उत्तर ने मुझे चौका दिया फिर पुरे दिन लोगों से मिला तो लगा की यहाँ मुक़ाबला बहुत ही कड़ा होने वाला हैं।

क्या करना चाहिये कांग्रेस को

सबसे पहला काम तो कांग्रेस को अपने नेताओं के बड़बोलेपन पर सख्ती से रोक लगाना चाहिए, उन्हें पीएम मोदी पर अवांक्षित टिप्पणियों से बचना चाहिए। सीपी जोशी का बयान “नीच जाति के हैं मोदी उमा भारती, उन्हें नही हैं हिंदुत्व पर बोलने का हक” बहुत ज्यादा नुकसानदायक हैं। वही दूसरी तरफ बीडी कल्ला का “भारत माता की जय रुकवा कर राहुल जिंदाबाद” बोलवाना, राजस्थान की देशभक्त जनता की भावनाओं के साथ खेलना हैं। यहाँ लगभग हर दूसरे चौथे घर से कोई ना कोई सैनिक हैं, इसलिए ऐसे आत्मघाती बयान से बचा जाए।

दूसरा कार्य, आपसी मतभेद भूलकर अशोक गहलोत और सचिन पायलट को अपने इलाके से निकल कर राजस्थान के दूसरे इलाके में ज्यादा से ज्यादा रोड शो करने का करना चाहिए। तीसरी बात, विधानसभा चुनाव में सीएम वसुंधरा राजे के उन मुद्दों को जनता के सामने लाये जिन पर वह फेल रही हैं, अगर राजस्थान में केंद्र के मुद्दे उठाए जाएंगे तो उसका कोई फायदा नही होगा क्योकि लोग पीएम से बेहद खुश हैं,  Anti Incumbency का जो भी माहौल हैं वह वसुंधरा राजे के खिलाफ हैं उसका फायदा उठाये जाने की कोशिश की जानी चाहिए।

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बहरहाल जहाँ दो महीने पहले लोगों की राय थी कि कांग्रेस सरकार बना रही थी वही लोग अब राजस्थान में बीजेपी सरकार बना सकती हैं ये बोलने वाले भी मिल रहे हैं, लेकिन कांग्रेस को थोड़ा अभी भी advantage हैं। जिसको बीजेपी अपने धुआँधार प्रचार से पाटने की कोशिश कर रही हैं पर वोटर की चुप्पी दोनो पार्टियों के लिए परेशानी का सबब बन रही हैं।

बीजेपी के ख़िलाफ़ सत्ता विरोधी लहर का जो फ़ायदा कांग्रेस को मिलता दिख रहा था, उसका सबसे ज़्यादा फायदा अब निर्दलीय उम्मीदवारो को मिलता दिख रहा हैं। पिछले चुनाव में कॉमरेड पार्टी का सफ़ाया हो गया था वो अब 5-6 सीट पर मज़बूत नज़र आ रहे हैं। अब देखना यह हैं की बीजेपी इस बदलाव का फ़ायदा उठा पाती हैं या कांग्रेस अनुमान के अनुरूप सरकार बना ज़ाती है जैसा की सट्टा बाज़ार बता रहा हैं।

(Epostmortem के लिए राजस्थान से Satya Choudhary (@satyagodara) की चुनावी रिपोर्ट)