पुलवामा हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया है। आतंकी संगठन ‘जैश-ए-मोहम्मद’ द्वारा किए गये इस कायरना हमले में देश के 40 वीर जवानों की शहादत हो गई। पूरा देश इस बर्बर अपराध के अपराधियों के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर कर रहा है।

केंद्र सरकार ने इसके साजिशकर्ता इस्लामिक आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का वादा किया है और जनता भी अपनी तरफ से हर संभव कोशिश कर रही है, जिससे शहीदों के पीड़ित परिवारों को हर तरह की सहायता मिल सके।

हालाँकि, शोक की इस घड़ी में कुछ ऐसे अवसरवादी हैं, जो इस कायरतापूर्ण हमले का जश्न मनाने से भी नहीं हिचकिचा रहे हैं, भले ही इसका परिणाम चाहे कुछ भी हो। हाल ही में जश्न मनाने को लेकर कई देशद्रोहियों पर पुलिस ने कड़ी कारवाई करी है।

ताजा मामला कर्नाटक का है। यहां के रायचूर जिले में स्थित मुसिक तालुक के हाकाकन गांव में कुछ लोगों ने पुलवामा हमले के बारे में सुनकर जमकर पटाखे फोड़े।तभी उन्हें बाकी ग्रामीणों ने देख लिया, जिससे डरकर वे घटनास्थल से भाग गए। हालाँकि, ग्रामीणों द्वारा पुलिस में शिकायत के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस ने 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनके नाम ख्वाजा, रहमान, हुसैन और लतीफ हैं। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, हरे रंग की पेंटिंग वाले पटाखे को भी घटनास्थल से बरामद किया गया है।

यह घटना पुलवामा हमले के बाद पहली घटना नहीं है। इसके अलावा कई तथाकथित पत्रकार, छात्र, आदि भी इस हमले पर दुख जताने की बजाय खुशी मना रहे हैं। इस कायराना हमले के बाद कुछ लोगों ने उन आतंकियों और अलगाववादियों का भी खुलेआम समर्थन किया, जो राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में लिप्त पाए जाते हैं।

इसके अलावा राणा अय्युब और सागरिका घोष जैसे बड़े पत्रकारों ने बदला लेने की बात करने वालों का विरोध करना शुरू कर दिया, लेकिन पुलवामा हमले का जश्न मनाने वालों के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहा। संयुक्ता बसु जैसे लोगों ने इस हमले को 2019 के चुनावों के लिए बीजेपी द्वारा रची गई साजिश बताया। मामले को और बदतर बनाने के लिए, स्क्रॉल जैसे मीडिया हाउसों ने आत्मघाती हमलावर, आदिल अहमद डार के आतंकी बनने पर बड़े बड़े लेख लिखे। जिस तरह से NDTV ने 2016 में बुरहान वानी के लिए किया था।

हालांकि, इस बार उनके अंदर बहुत ज्यादा खौफ़ पैदा हो गया है। सशस्त्र बलों को पूर्ण स्वतंत्रता दिए जाने की केंद्र सरकार की साहसिक घोषणा के बाद अलगावादियों पर भी कारवाई शुरू हो गई है और यह अब इस्लामी कट्टरपंथियों और उनके प्रति सहानुभूति रखने वालों को बहुत चुभने वाला है।

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