जम्मू कश्मीर के पुलवामा में शहीद हुए 42 जवानों के शव अभी तक उनके घर भी नहीं पहुंचे हैं और भारत में कुछ स्वघोषित निष्पक्ष पत्रकार देश में ऐसा नरेटिव बनाने में लगे हैं कि लोगो को बदले की मांग नही करनी चाहिए। दरअसल मामला यह हैं कि इस कायरतापूर्ण और हृदयविदारक घटना के बाद जहाँ देश के नागरिकों में आक्रोश चरम पर हैं तो वही राष्ट्रवादी मानसिकता के पत्रकार और न्यूज़ ऐंकर भी बेहद आक्रोशित और व्यथित हैं। ऐसे में जनता की भावनाओ को आवाज देते हुए उन्होनो भी आतंक के खिलाफ कड़ी कारवाई की मांग की हैं।

सरकार से कड़ी कारवाई की पत्रकारों की माँग आरफा खानम शेरवानी जो अपनी साम्प्रदायिक नफरत फैलाने वाली पत्रकारिता के लिए जानी जाती हैं उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ‘भारत के हर घर में मातम हो रहा है लेकिन एंकर ख़ून के बदले ख़ून की माँग कर रहे हैं। इन्हें कौन बताये कि युद्ध शांति नहीं सिर्फ़ हिंसा का संदेश देता है। जंग किसी मसले का हल नही हैं।”

जिसके बाद न्यूज़ 24 के वरिष्ठ पत्रकार और एंकर मानक गुप्ता ने बेहद वाजिब सवाल पूछा कि, दुश्मन हमारा खून बहाता रहे तो हम क्या करें? कोई सुझाव हैं?

जिस पर आरफा खानम ने कहा, पत्रकारों का काम सरकार की नीतियों का रिपोर्ट करना हैं, जनता को भड़काना और उकसाना नही हैं। सबसे बड़ी बात यह कही जिसे पढ़कर विडम्बना भी शर्मा जाए वह यह कही की साम्प्रदायिक हिंसा नही साम्प्रदायिक सौहार्द फैलाने का काम करे।

गौरतलब है कि आरफा की पूरी रोजी-रोटी लोगो को भड़का के चल रही हैं। आप इनकी ट्विटर टाइमलाइन देखेंगे तो पायेंगे, इनकी पूरी पत्रकारिता जनता को यह समझाने में हैं कि, हिन्दू समुदाय मुसलमानों पर अत्याचार कर रहा हैं और हिन्दुओ की अगड़ी जातियां दलितो पर अत्याचार कर रही हैं। आरफा खानम शेरवानी की पत्रकारिता का स्तर ये है कि ये मोदी विरोध के नाम पर देशविरोधी पत्रकारिता करने से भी पीछे नहीं हटतीं। इनका एक ही एजेंडा है- फेक न्यूज़ फैक्ट्री। यह पत्रकार अपने किसी भी कार्यक्रम में अपने विरोधी व्यक्तियों को नहीं बुलाती, जो उनसे तर्कपूर्ण सवाल जवाब कर सकें। धर्म देखकर पत्रकारिता वाले इन पत्रकारों का उद्देश्य पत्रकारिता करना नहीं, बल्कि मुस्लिमों को लामबंद करना है।

आरफा खानम सरीखे पत्रकारों ने कई मौकों पर समाज को बांटने की हर कोशिश की है। कठुआ का मामला हो यो भीमा कोरेगांव हिंसा, इन लोगों ने पूरे हिंदू समाज को अपमान करने और हिंदुओं में फूट डालने का अभियान चलाया और इसके लिए जमकर फेक न्यूज भी प्रसारित किया।

यहाँ तक कि इन्होंने जर्मनी में मिले फेलोशिप का शुक्रिया देश के हिंदुओं के खिलाफ लेख लिखकर अदा किया। इसने जर्मनी की एक वेबसाइट के लिए अपने आलेख में लिखा कि किस प्रकार बगैर ऐतिहाक तथ्य के सरकार या भाजपा द्वारा भुगतान किए जाने वाले हिंदू उनलोगों को ट्रोल करते हैं, जो सरकार के खिलाफ लिखते हैं। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर हिंदुत्व और उसमें भी अगड़ी जातियों की सर्वोच्चता स्थापित करने के प्रयास का आरोप लगाया। उन्होंने अपने आलेख में मुसलमानों को उपेक्षित और प्रताड़ित करने की बात कही। इसके अलावा उन्होंने गौरी लंकेश की हत्या करने में अतिवादी हिंदुओं का हाथ होने की बात कही है। शेरवानी ने जितनी भी बातें लिखी उसका न तो कोई साक्ष्य दिया है ना ही ठोस तर्क।

बहरहाल इसके बाद मानक गुप्ता ने आरफा को कड़ा जवाब देते हुए लिखा कि ‘पत्रकारों का काम पब्लिक सेंटिमेंट को आवाज़ देना हैं और इसे सरकार तक पहुँचाने की जिम्मेदारी भी हैं। पत्रकार की जिम्मेदारी हैं कि वह देशहित में पब्लिक-सरकार का ओपिनियन बनाने में मदद करे। आप अपनी पत्रकार की परिभाषा अपडेट कर लीजिए। आप कभी सरकार के साथ आतंकियों और आतंकिस्तान को भी कटघरे में खड़ा करें, उनकी हिंसा के ख़िलाफ़ बोलने में हिचक आपको कैसी हिचक हैं?

मानक गुप्ता की इस खरी खरी के बाद आरफा के पास कोई जवाब नही बचा। ये कभी पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी हिंसा पर नही बोलती। ना ही कभी उन घटनाओं पर बोलती हैं जिसमें कट्टरपंथी मुस्लिम शामिल होते हैं, यहाँ तक कि उनके बचाव में तर्क गढ़ने लगती हैं। जब ऐसे तत्वों पर कारवाई हो तो सरकार के खिलाफ अपना विक्टिम का एजेंडा लेकर आ जाती हैं।

Leave a Reply