पुलवामा में शहीद हुए सीआरपीएफ जवानों के अंतिम संस्कार भी नहीं हुए थे और सोशल मीडिया पर लेफ्ट लिबरल ने नैरेटिव बदलना शुरू कर दिया है।

जहां एक तरफ पूरे देश में आक्रोश है। क्या शहर क्या गांव हर गली हर सड़क से ही आवाज़ आ रही है- “पाकिस्तान से बदला लो, “हमारे सैनिकों की शहादत व्यर्थ नहीं जानी चाहिए।” क्या आम क्या खास हर व्यक्ति अपने स्तर अपनी क्षमता अनुसार शहीद जवानों के परिवार की मदद को आगे आया है। ऐसे माहौल में कुछ “शांति के दूत” peace nicks देश को फिर ये बताना चाह रहे हैं कि वो आतंकी भटके हुए नौजवान है। कैसे उन्हें एक डंडा पड़ा सेना का तो वो आतंकी बने।

जहां एक तरफ एक बाप अपनी बेटी की शादी का रिसेप्शन कैंसिल कर के शहीदों के लिए लाखों रुपये दान दे रहा है वहीं दूसरी तरफ यूपी, गुजरात, दिल्ली में पढ़ रहे कुछ कश्मीरी छात्र शहीदों की मौत का जश्न मना रहे हैं। एक भी तथाकथित बुद्धिजीवी ने इस शर्मनाक हरकत की आलोचना नहीं की। उल्टा ये लोग देश भर में पढ़ रहे कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा के लिए चिंतित होते दिख रहे है। यूपी, बिहार, गुजरात, उत्तराखंड, दिल्ली हर राज्य में पुलिस ने ऐसे लोगों को धर दबोचा है, जो शहादत के अपमान पर उतारू हैं। प्रशांत भूषण ने नरेटिव लेकर आया था, जिसको बरखा दत्त और ओमर अब्दुल्लाह समेत सब ने लपक लिया।

इन लोगों का आज कश्मीर प्रेम जाग गया है। बरखा दत्त, राजदीप सरदेसाई, सागरिका घोषसंजुक्ता बसू सहित तमाम स्वघोषित धर्मनिरपेक्ष पत्रकार कश्मीरियों के समर्थन में इस कदर सामने आ गए हैं, जैसे कश्मीरियों का कत्लेआम हो रहा हो। हालांकि, देश के किसी भी कोने में किसी निर्दोष कश्मीरी पर सिर्फ कश्मीरी होने के नाते कोई अत्याचार की खबर सामने नहीं आई है। लेकिन इन एजेंडेबाज लोगों को सिर्फ मोदी विरोध में अपना एजेंडा चलाना है। इन लोगों ने कश्मीरियों की सहायता के लिए अपने घरों के दरवाजे खोल दिए हैं, सोशल मीडिया पर मैसेज बॉक्स खोल दिए गए हैं और कश्मीरियों से आह्वान किया गया है कि वे कभी भी उनसे संपर्क कर सकते हैं।

हमले के बाद से कश्मीरी मुस्लिमों के अलावा देश के बाकी हिस्सों में कुछ लोगों ने जवानों की शहादत पर आतिशबाजी की थी और खुशियां मनाई थीं। आपको बता दें कि उत्तराखंड में रहकर स्नातक की पढ़ाई कर रहे तीन छात्रों ने आतंकियों की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर उनका महिमामंडन किया था और फिदायीन हमले में मारे गए आतंकी की तस्वीर के साथ अपने व्हाट्सएप पर “अल्लाह आपकी शहादत कबूल करें” जैसे स्टेटस लगाए थे। इसके बाद पुलिस ने उन पर कारवाई करी। इसी के बाद एजेंडेबाजों ने कश्मीरी मुस्लिम के समर्थन में राग अलापना शुरू कर दिया। लेकिन इन लोगों ने आतंकियों का समर्थन कर रहे देशद्रोही छात्रों के खिलाफ एक शब्द नहीं बोला।

बकायदा सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाई जाने लगी कि देश में कश्मीरी मुलसमानों पर अत्याचार हो रहा है, लेकिन पुलिस ने इन सभी के दावों को सिरे से खारिज कर इनके मुंह पर करारा तमाचा मारा।

अब देखिए इनका दूसरा चेहरा। इंडिया टुडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने तो हमले के पहले ही दिन से शहादत पर एक ट्वीट करने के बाद अपना एजेंडा चलाना शुरू कर दिया। जब लोगों ने इन्हें लताड़ा, तो ये लोगों को प्रेम की भाषा पढ़ाने लगे। ग़ौर करिएगा इनकी बातों पर। ये वही महाशय हैं, जो कुछ महीने पहले जनता के बीच रिपोर्टिंग कर रहे थे, तो भीड़ ने जरा सा धक्का मुक्की कर दी, जिसके बाद ये प्रेम पुजारी आगबबूला हो गए और जनता के साथ हाथापाई पर उतर आए।

इसके अलावा, आज तो इन्होंने हद ही कर दी। प्रेम पुजारी ने उस देश को प्रेम पत्र लिखा, जो निर्दोष कश्मीरियों और सैनिकों की शहादतों का सीधा सीधा जिम्मेदार है। हालांकि, जब लोगों ने निशाने पर लिया, तो महानुभाव ने ये भी हटा दिया।

इसके बाद आते हैं वैश्विक आतंकी हाफिज सईद की प्रिय भारतीय पत्रकार बरखा दत्त पर। इन मोहतरमा ने भी ट्विटर पर लिखा कि कश्मीरी मुस्लिम छात्रों को मारा पीटा जा रहा है। ध्यान दीजिए इनके ट्वीट पर। इन्होंने छात्रों को भारतीय ना बताते हुए कश्मीरी बताया है और ऊपर से मुस्लिम। बरखा दत्त जैसे बड़े पत्रकार को ये मालूम होना चाहिए कि कश्मीर भी भारत का हिस्सा है, लेकिन इन्हें हिंदूओं और सरकार को बदनाम जो करना है। ये वही बरखा दत्त हैं, जिन्होंने गत वर्ष कठुआ कांड के संदर्भ में अंग्रेजी अखबार ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ में ‘Hindu nationalist defends the accused of rape’ शीर्षक से एक लंबा चौड़ा ले लिखा था। अब आप समझ सकते हैं कि ये किस तरह की पत्रकार हैं।

इन सब के अलावा हमेशा से अपने वामपंथी और हिंदू विरोधी एजेंडे के लि मशहूर न्यूज एजेंसी रायटर्स ने भी फिदायीन का महिमामंडन करते हुए एक लेख लिखा, जिसका शीर्षक है, “Kashmiri Muslims Evicted, threatened after deadly attack on Indian forces”. इस एजेंसी ने अपने लेख में आदिल डार को आतंकी ना बताकर एक आम व्यक्ति बताया है और आगे कहा है कि हिंदू बाहुल्य भारत में कश्मीरी मुस्लिमों पर अत्याचार हो रहा है।

अब आप एक बार के लिए उपरोक्त सभी की बातों पर ध्यानपूर्वक ग़ौर कीजिए और सोचिए कि ऐसे समय जब देश में पाकिस्तान के खिलाफ लोगों में गुस्सा और जवानों की शहादत पर शोक है, तभी इन लोगों ने अपना एजेंडा क्यों शुरू किया? क्योंकी इनका एकमात्र उद्देश्य है कि कैसे भी करके भारत में पाकिस्तान तथा देश के भीतर बैठे अलगाववादियों और आतंकियों के खिलाफ जो लोगों का गुस्सा है, उसे दबाया जाए। इनके अनुसार जब लोग शांत हो जाएंगे, तब किसी कश्मीरी मुस्लिम पर अत्याचार नहीं होगा, सभी सुरक्षित हो जाएंगे। दरअसल, इनका एकमात्र उद्देश्य पाकिस्तान का बचाव करना है। लेकिन जनता पहले की तरह नहीं है। आज की युवा पीढ़ी जागरूक है और हर एक व्यक्ति की असलियत का पता मिनटों में चल जाता है, इसलिए आज की पीढ़ी को बरगलाना और अपनी बातों में घुमाना नामुमकिन है।

कश्मीरी छात्र Pulwama Terrorist Attack का जश्न मनाएँगे, आतंकियों की तस्वीर लगा कर “अल्लाह आपकी शहादत क़बूल करें” लिखेंगे तो क्या उम्मीद करते हैं? शांति बनाए रखने की ज़िम्मेदारी सब की है।

लेखक- अंकुर मिश्रा और शिवांग तिवारी

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