भारत में इस समय वामपन्थ अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। उनका कोई प्रोपोगंडा दो दिन से ज्यादा नही चलता, क्योकि जनता अब पहले से ज्यादा समझदार और चालाक हो गयी। ताजा मामला है होली पर बने सर्फ एक्सेल के विवादित विज्ञापन ( surf excel controversial ad) का, जहाँ बेहद चालाकी से हिन्दू विरोधी वामपन्थी एजेंडा परोसना इस वाशिंग पाउडर बनाने वाली कम्पनी को बेहद भारी पड़ा।

पहले HUL का कुम्भ विज्ञापन फिर सर्फ एक्सेल के खिलाफ सोशल मीडिया पर हिन्दू एकजुट हो गए, और ऐसे एकजुट हुए की इन दोनों ब्रांड के बॉयकॉट की अपील सोशल मीडिया में लगातार 3 दिनों तक टॉप ट्रेडिंग सब्जेक्ट रहा। इसकी वजह से पूरा वामपंथी इको सिस्टम सकते में आ गया। आनन-फानन में वामपन्थी ओपिनियन मेकिंग साइट्स पर लेख लिखे जाने लगे, ट्वीट होने लगी की यह विज्ञापन हिन्दू मुस्लिम एकता के लिए हैं। बंगाली रसोगुल्ला की तरह बड़ा स्वीट विज्ञापन है। कुछ अतिउत्साही लोगो ने यहाँ तक कह दिया कि इस विज्ञापन का विरोध करने वाले साम्प्रदायिक लोग हैं।

लेकिन इन चतुर लोगो का सारा नरेटिव सिर्फ 2-3 सवालों में ध्वस्त हो गया।

1- विज्ञापन में हिन्दू लड़कीं क्यों, हिन्दू लड़का क्यों नहीं?

2- होली के रंग शुभ माने जाते है उन्हें ‘दाग’ क्यों कहा गया?

3- सर्फ एक्सेल ने ऐसा विज्ञापन बकरीद पर क्यों नही बनाया जहाँ मुस्लिम लड़की किसी हिन्दू लड़के को बकरे के खून से छींटो से बचाते मन्दिर ले जाये?

सोशल मीडिया पर उठे इन तीन सवालो का वामपंथियों पास कोई जवाब नही था और जब कोई जवाब ना बचे तो सवाल उठाने वालों के चरित्र पर सवाल उठा दो, उन्हें अनपढ़ बता दो, संघी बता दो, भक्त बता दो.. एक बार गोलपोस्ट चेंज हुआ, सवाल उठाने वाले non serious people हो गए फिर किसी सवाल का जवाब देने की जरूरत ही खत्म हो गयी। अब यही वामपंथी कर रहे हैं, और जब सब तरफ से हार गए तब सर्फ एक्सेल के विरोध करने वालो को ही गलत साबित कर रहे है और इन सबमे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, क्विंट वायर जैसी वामपन्थी ओपिनियन मेकिंग साइट।

ये नमूना देखिये कैसे यह बताने की कोशिश की जा रही है कि विरोध करने वाले लोग इतने गंवार और अनपढ़ है कि सर्फ एक्सेल का विरोध गूगल प्ले स्टोर ( Google play Store) पर माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल ( Microsoft Excel) के पेज पर कर रहे हैं।

Scoop whoop वेबसाइट की फ्रस्टेशन तो देखने लायक हैं, स्क्रीन शॉट मुस्लिम नाम का लगा रहे है, और उसे हिन्दू फोबिक बता रहे है। यह देखिये आप

जब इसकी जांच पड़ताल की गई तो बेहद चौकाने वाला सच सामने आया। सर्फ एक्सेल वाशिंग पाऊडर का विरोध करने वाले हिन्दू समुदाय के लोग है, जबकि माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल पर 1 स्टार रेटिंग देने वाले मुस्लिम लोग हैं जिसे आप खुद भी जाकर देख सकते हैं।

ट्विटर यूजर अंकुर सिंह ने अपनी कुछ ट्वीट में इन सबकी पोल खोली जिसे आप यहाँ देख सकते हैं।

वामपन्थी साइट्स तो इतनी फ्रस्टेट दिखी की व्यंग में की गई ट्वीट को भी हिन्दुओ से जोड़ दिया, यह देखिये नमूना

वामपंथियों के लिए ऐसी अफवाहें फैलाना कोई नया नही हैं, मुस्लिम समुदाय के प्रति इनका विशेष आकर्षण छिपाए नही छिपता हैं। अभी हाल में एक नेत्रहीन मुस्लिम वैज्ञानिक अली मुर्तजा के नाम पर 3 दिन तक अफवाह फैलाते रहे कि वह पुलवामा के शहीदो के परिवारों को 110 करोड़ रुपये का दान देगा। ये अति विचित्र मानसिक स्थिति वाले नैरेटिव गढ़ने वाले पत्रकार, फ़िल्मकार, बिना किसी जांच पड़ताल के उसे हीरो बना कर पेश करने लगे। सबसे बेसिक चीज यह तक नही पता लगाया कि ऐसा दावा करने वाला मुर्तजा की आर्थिक स्थिति क्या हैं, और कामर्स पढ़ा आदमी वैज्ञानिक कैसे बन गया? इन लोगो को सिर्फ यह दिखा 110 करोड़ और मुस्लिम, बस लहालोट हो गए। इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफास सबसे पहले हमने किया था जिसे आप यहाँ पढ़ सकते हैं

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