हर भारतीय के लिए आज गर्वित क्षण है। आज भारतीय वैज्ञानिकों की सालों की मेहनत रंग लाई और अंतरिक्ष में दुश्मनों द्वारा किसी भी तरह की हलचल से निपटने में हम सक्षम हो गए हैं। आज भारतीय वैज्ञानिकों ने वो कर दिखाया, जो पूरी दुनिया सोच भी नहीं सकती है। इसरो और डीआरडीओ के वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम ने आज अंतरिक्ष के ‘Lower Earth Orbit’ में करीब 24,000 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल रहे एक ‘लाइव सैटेलाइट’ को मार गिराया। बड़ी बात ये कि यह ‘लाइव सैटेलाइट’ भारतीय ‘एंटी सैटेलाइट मिसाइल’ से करीब 300 किलोमीटर दूर था और इसके बाद भी वैज्ञानिकों ने इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इस ऑपरेशन का नाम दिया गया- ‘मिशन शक्ति’

आपको बता दें कि यह ऐतिहासिक कामयाबी हासिल करने वाला अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत विश्व का चौथा देश बन गया है। अब भारत जल, थल, और वायु के साथ साथ अंतरिक्ष में भी एक शक्ति बनकर उभर रहा है। भारत की इस ऐतिहासिक कामयाबी को देखकर पड़ोसी देशों चीन और पाकिस्तान में खलबली मची हुई है और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इसे रोकने के लिए गुहार भी लगा दी।

आज दोपहर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीवी, रेडियो और सोशल मीडिया के माध्यम से देशवासियों को यह खुशखबरी दी। लेकिन एक तरफ जहां भारत के पूर्व वैज्ञानिकों ने इसे बहुत बड़ी उपलब्धि करार दिया और साहस बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद दिया, तो दूसरी तरफ मोदी विरोध की वही पुरानी फौज उठ खड़ी हुई, जो पिछले 5 सालों से राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में सरकार द्वारा किए गए प्रत्येक कार्यों को राजनीति से जोड़ती रही है।

अब आप समझ गये होंगे कि कोन हैं वो लोग। हमेशा की तरह हर मुद्दे पर सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाली कांग्रेस पार्टी ने वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए, बजाए वर्तमान की केंद्र सरकार को क्रेडिट देने के, खुद को क्रेडिट दे डाला। वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि उनकी सरकार के समय ही इस मिसाइल के कलपुर्जे तैयार हो गए थे।

केवल इतना ही नहीं, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने तो वैज्ञानिकों इस कार्य के लिए बधाई दिया और आगे उन्होंने उसी ट्वीट में पीएम मोदी को ‘विश्व थियेटर दिवस’ की बधाई दी, ना कि इस बड़े कार्य की। यानी कि उनके अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में भी मोदी सरकार द्वारा किया गया हर कार्य एक ड्रामा है।

आगे बढ़ते हैं, तो बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्षा मायावती और तृणमूल कांग्रेस की मुखिया एवं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस ऑपरेशन को चुनाव अचार संहिता का उल्लंघन तक बता दिया। इन दोनों ने कहा कि वो इसकी शिकायत चुनाव आयोग से करेंगी।

बाकी विपक्षी दलों ने भी इसे चुनावी करार दिया और कहा कि प्रधानमंत्री देश में दूसरे मुद्दों से डरकर पहले सेना और अब वैज्ञानिकों के पीछे छिप रहे हैं। मतलब ये कि आज प्रधानमंत्री ने जो देश को बताया, वो उन्हें नहीं, बल्कि किसी वरिष्ठ वैज्ञानिक को बताना चाहिए था। इसके अलावा भी कई अन्य बुध्दिजीवियों ने सरकार को ऐसे बधाई दी, जैसे वो बधाई देकर सरकार पर एहसान कर रहे हों। कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने तो यह भी कह डाला कि इसरो की स्थापना प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरू के समय (1962, इन्कोस्पर के रूप में) हुई थी, इसलिए इसका श्रेय उन्हें जाता है।

वो कहते हैं कि पीएम मोदी इस कारवाई का चुनावी लाभ लेंगे। इस पर बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि वर्ष 1989 के चुनाव प्रचार के दौरान अग्नि मिसाइल के परीक्षण का वीडियो कांग्रेस पार्टी ने प्रयोग किया था और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अपने चुनावी रैलियों में भी इसका प्रयोग किया था और यहां पीएम मोदी ने बीजेपी के किसी रैली में नहीं, बल्कि एक प्रधानमंत्री के रूप में अपने सरकारी आवास से यह समाचार देश की जनता को दिया है।

चुनावी लाभ का आरोप क्यों लगा रहा है विपक्ष?

अब सवाल यह है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में बार बार कांग्रेस या दूसरे विपक्षी दल, मोदी सरकार पर ‘इलेक्शन कैंपेन’ का आरोप क्यों लगाते हैं? चाहे वो 2016 में पाकितान पर की गई ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ हो या हाल ही में की गई ‘एयर स्ट्राइक’ हो। क्या वो मोदी विरोध में इतने अंधे हो गए हैं कि उन्हें ये नहीं दिखता कि उनके इन बयानों से दुश्मन देश को लाभ पहुंचता है और वो भारत के खिलाफ अपना एजेंडा चलाते हैं?

लेकिन अपने नेताओं के घटिया बयानों को कांग्रेस पार्टी हमेशा उनकी निजी प्रतिक्रिया करार देती है। हम बहुत पीछे नहीं जाते हैं, पुलवामा हमला और ‘एयर स्ट्राइक’ को ही ले लेते हैं। पुलवामा हमले को जहां कांग्रेस के वरिष्ठ एवं बड़े नेता बीके हरिप्रसाद ने पीएम मोदी और पाक पीएम इमरान खान की मिलीभगत होने का आरोप लगाया, तो दूसरे वरिष्ठ नेताओं ने आतंकियों के मरने के सबूत मांगे।

विपक्ष बार बार ये कहता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में पीएम मोदी जो भी करते हैं, वो केवल चुनावी है और वो इसका चुनावी लाभ लेते हैं। सपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सदस्य रामगोपाल यादव ने तो यहां तक कह दिया कि उनकी सरकार (गठबंधन सरकार) आई, तो पुलवामा हमले की जांच होगी और बीजेपी नेता तथा स्वयं पीएम मोदी इसमे दोषी पाए जाएंगे। आपको बता दें कि हूबहू यही बात पाकिस्तान भी कह रहा है।

अब विपक्ष से सवाल ये है कि क्या उरी और पुलवामा हमले के बाद सरकार को हाथ पर हाथ धरे बैठे रहना चाहिए था, क्योंकि कुछ महीनों बाद चुनाव हैं? शायद मुंबई हमले के बाद कांग्रेस ने चुनाव देखते हुए ही पाकिस्तान पर कड़ी कारवाई नहीं करी और यही वो अब भी चाहते हैं।