दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को बयान दिया है कि देश के लोगों को 12वीं पास नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री नहीं बनाना चाहिए। हम सब जानते हैं कि IIT खड़गपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर, आयकर अधिकारी तक का सफर और फिर NGO से लेकर आम आदमी कार्यकर्ता बनने तक अरविंद केजरीवाल ने बहुत रूप बदले हैं। मैं जनता के चुने हुए मुख्यमंत्री से ऐसे बयान की उम्मीद कर सकता था क्योंकि कई बार मुख्यमंत्री देश के कानूनों-प्रावधानों और संविधान की बारीकियों के प्रति जागरूक नहीं होते लेकिन एक पूर्व आयकर अधिकारी से ऐसी बेहूदी बातों की उम्मीद नहीं थी।

आपमें से बहुत लोग मानते हैं कि जनता द्वारा चुना हुआ प्रत्याशी शिक्षित होना चाहिए। ये उचित बात है लेकिन इसका कोई एक विशेष मापन नहीं है कि कितना शिक्षित होना चाहिए। यही वजह है जब देश आजाद हुआ तो नेहरू, पटेल, प्रसाद और अम्बेडकर जैसे बड़े कानूनविद नेताओं ने जनता द्वारा चुने हुए प्रत्याशियों के लिए कोई विशेष शैक्षणिक योग्यता का पैमाना संविधान में नहीं रखा। उनका मानना था कि जनता द्वारा चुने उम्मीदवार उसी स्थिति से आये जिस स्थिति में उस क्षेत्र की जनता है। कहने का मतलब यदि अशिक्षित आदिवासियों का क्षेत्र है तो वहां का सांसद या विधायक उन्हीं लोगों में से एक होना चाहिए जो उनका हमदर्द हो; उनकी समस्याओं को सदन में रखकर सरकार का ध्यान आकृष्ट कर सके। भारत जैसे देश में यदि ऐसे क्षेत्रों में कोई पढा लिखा बेईमान निर्वाचित होता है तो जनता का शोषण करता है। जनसेवा के लिए शैक्षणिक योग्यता से ज्यादा नीयत मायने रखती है। शैक्षणिक योग्यता तो जो काम ज़रूरी है उसको अंजाम तक लाने के लिए बेहद अच्छी रूपरेखा देने में मदद करती है।

यदि बात नरेंद्र मोदी की की जाए तो विश्व पटल पर उनके विजन के लिए उन्हें कई पुरस्कारों ने नवाजा जा चुका है। लगातार तीन बार मुख्यमंत्री और पूर्ण बहुमत से प्रधानमंत्री चुने गए व्यक्ति की योग्यता पर कोई शिक्षित व्यक्ति उंगली नहीं उठा सकता ये किसी अशिक्षित व्यक्ति के ही लक्षण हैं। अरविंद केजरीवाल ने ऐसे ही बेबुनियाद आरोप अरुण जेटली, कपिल सिब्बल, नितिन गडकरी और शीला दीक्षित पर भी लगाए थे और मानहानि के मुकदमे में सार्वजनिक रूप से माफी मांगकर अपनी शिक्षा को कलंकित करने का प्रमाण भी केजरीवाल ने जनता के सामने प्रस्तुत कर दिया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्नातक का अंकपत्र सार्वजनिक रूप से TV पर देशभर को कम से कम एक महीने तक दिखाया गया था। सर्जिकल स्ट्राइक के समय सरकार से सबूत मांगने वाले अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री बनते समय ली गई भारतीय संविधान में निष्ठा रखने की शपथ को भी कलंकित किया था।

खालिस्तानियों से सम्बन्ध रखने और देश विरोधी नारे लगाने वाले उमर खालिद, कन्हैया कुमार जैसे देशद्रोहियों पर अरविंद केजरीवाल के विचार तो देश देख ही चुका है; अपने ऐसे विचार देकर अरविंद केजरीवाल अपनी देशभक्ति भी जनता के सामने प्रस्तुत कर चुके हैं।

अब अगर अरविंद केजरीवाल की शैक्षणिक योग्यता की बात की जाए तो उसकी विवेचना करते हैं :

1. अरविंद केजरीवाल ममता बनर्जी का साथ देकर आरोप लगाते हैं कि सीबीआई नरेंद्र मोदी के इशारे पर चल रही है।

केजरीवाल को पूर्व आयकर अधिकारी होने के नाते मैं ये मानकर चल रहा हूँ कि अरविंद देश के संविधान, कानूनों से वाकिफ होंगे। पाठकों की जानकारी के लिए बता दूं कि सीबीआई का गठन दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट एक्ट, 1946 के तहत हुआ था। इसके सेक्शन 6 पर गौर करें तो ये सत्य जरूर है कि सीबीआई को राज्य सरकारों में जांच के लिए राज्य सरकारों से अनुमति लेनी पड़ती है लेकिन काजी दोरजी बनाम सीबीआई केस में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय था कि यदि राज्य सरकार अनुमति न भी दे तब भी वह पहले से चल रहे केस पर सीबीआई को जांच करने से नहीं रोक सकती। इस हिसाब से देखा जाए तो अरविंद केजरीवाल को ये जानकारी ही नहीं है तभी तो वे ममता बनर्जी का साथ इसलिए दे रहे है क्योंकि बंगाल और आंध्रप्रदेश में सीबीआई को जांच करने की अनुमति नहीं है। अरविंद केजरीवाल की स्थिति यहां अशिक्षित व्यक्ति के समान ही है।

2. अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी भष्ट्राचार से लड़ने के लिए बनाई थी।

शिक्षित अरविंद केजरीवाल ने भष्ट्राचार से लड़ने का उदाहरण दिया चारा घोटाले में दोषी करार लालू से गले मिलकर, गोमती फ्रंट घोटाले के आरोपी अखिलेश यादव, रेल कोच घोटाले के आरोपी तेजस्वी यादव, शारदा चिट फंड में लिप्त ममता बनर्जी जैसे कई नेताओं के साथ महागठबंधन में मंच साझा करके। यदि इसे शिक्षा कहा जाये तो इससे शिक्षा का अपमान ही होगा।

3. अरविंद केजरीवाल कहते हैं कि लोकतंत्र खतरे में है।
देश में चुनाव होना बंद हो गए? देश में तानाशाही चल रही है न कि संविधान में वर्णित शासन? क्या विपक्ष के नेताओं की आवाज़ों को दबाया जा रहा है? नहीं! फिर भी अरविंद केजरीवाल ऐसा कहते हैं क्योंकि उन्हें वास्तव में पता ही नहीं है लोकतंत्र होता क्या है? यदि लोकतंत्र की परिभाषा ही इन्हें पता नहीं है तो बिना संविधानिक प्रक्रिया को जाने ये आयकर विभाग में अधिकारी कैसे बन गए थे? अक्सर घूस देकर नौकरी लेने वाले ही इन आधारभूत जानकारियों से अनजान होते हैं।

4. अरविंद केजरीवाल कहते हैं, मैं बनिया हूँ जी, मुझे वोट दो। अरविंद केजरीवाल कहते हैं मुसलमानों को वोट केवल आम आदमी पार्टी को देना चाहिए।

हमारा संविधान बिना किसी भेदभाव के हर जाति, धर्म, मूल, नस्ल के लोगों को सभी अधिकार देता है। इस हिसाब से कोई भी पढ़ा लिखा संविधान को जानने वाला व्यक्ति ऐसी ओछी बातें नहीं करेगा। यदि केवल डिग्रियां रखने को शिक्षित कहा जाए तो भले ही ये शिक्षित होने के लक्षण लगें लेकिन सही मायनों में कोई शिक्षित व्यक्ति ऐसे बयान नहीं देता है।

5. अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि मैं इंजीनियर हूँ मुझे पता है EVM टेम्पर कैसे करते हैं।

जब अरविंद केजरीवाल ने इंजीनियरिंग की थी तब इलेक्ट्रॉनिक्स भारत में थी ही नहीं, केजरीवाल ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की है। इस हिसाब से केजरीवाल ने अपनी शिक्षा का एक और उदाहरण दिया था कि कैसे डीजल/पेट्रोल इंजन या मशीनरी का उपयोग करके इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स को हैक करेंगे। दिल्ली के किसी बाजार से हजार-हजार रुपये में बनने वाले प्रोजेक्ट को लेकर दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी के विधायक EVM हैक करना प्रदर्शित करते हैं। ये ठीक वैसा ही है एक स्टैंडअलोन मशीन जिसमें स्टोरिंग डिवाइस तो है लेकिन इंटरनेट नहीं है, को श्रीमान जी ने हैक किया हो। ये अरविंद केजरीवाल के उच्च कोटि की शिक्षा का अगला उदाहरण था।

एक से एक झूठे बेबुनियाद आरोप लगाने के बाद सार्वजनिक रूप से माफी मांगना यदि किसी विशेष प्रकार की शिक्षा का उदाहरण है तो ऐसी शिक्षा को ठगी कहते हैं और सज्जन व्यक्ति इस प्रकार की शिक्षाओं में यकीन नहीं रखते। व्यक्ति का पुरुषार्थ, उसके अपने कर्म महान बनाते हैं, दूसरों पर उंगली उठाना नहीं। जिस भस्ट्राचार विरोधी आंदोलन को देश की जनता ने अपना अभूतपूर्व प्यार और सम्मान दिया था उसको अरविंद केजरीवाल ने इतने निकृष्ट स्तर तक पहुंचा दिया है कि आने वाले समय में यदि कोई अच्छी नियत से भी ऐसा आंदोलन चलाने के लिये घर से निकले तो भी लोग उसमें अवसरवादी धूर्त की छवि देखेंगे। यही वजह है कि अब अन्ना हजारे जी के अनशन में भीड़ तक नहीं जुटती। अन्ना हजारे जी को धोखा देकर पहले गुरु-शिष्य के रिश्ते और शिक्षा को कलंकित किया। उसके बाद बंगला-गाड़ी न लेने की शर्त पर चुनाव जीतने वाले बयानों को धता बताकर चुनाव जीतकर बंगला गाड़ी सब लेकर दिल्ली की जनता के विश्वास का गला घोंट दिया। यदि इसे सभ्य शिक्षा कहेंगे तो इससे शिक्षा का ही अपमान होगा। हजारों लोग आपके साथ सड़क पर उतरे, लाखों ने चंदा दिया और आज स्थिति ये है कि लोग आप पर विश्वास करने से कतराने लगे है, ये किसी कुशिक्षा का ही असर है।

भगवान से यही विनती करूँगा कि अरविंद केजरीवाल जी फिर से ठीक हो जाएं और जैसा लोगों ने उन्हें आंदोलन के समय देखा था वैसे ही बनकर वापस आ जाएं। हालांकि ये अब सम्भव नहीं है फिर भी मेरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं। आखिर में इतना ही कहूंगा कि लोग लंबे चौड़े आरोपों की लिस्ट देखकर वोट नहीं देते, वे वोट देते हैं कि उनका भविष्य कौन सँवार सकता है। वे इस बार भी ये तय करने में सक्षम होंगे कि उनका प्रधानमंत्री कौन होना चाहिए, उन्हें आपकी सलाह की आवश्यकता नहीं। धन्यवाद!!

Leave a Reply