सावन के पवित्र महीने में निकाली जाने वाली कांवड़ यात्रा हमेशा से मुस्लिम समुदाय के कट्टरपंथियों के निशाने पर रही हैं। साल 2019 की कांवड़ यात्रा भी इससे अछूती नही रही और कांवड़ियों से मुस्लिम बहुल इलाकों में मारपीट और पत्थरबाजी की कई घटनाएं सामने आई। हालांकि यह बेहद दुख की बात है की मुस्लिम समुदाय का उदारवादी तबका ऐसी घटनाओं पर चुप्पी साध जाता है, जबकि वही उदारवादी तबका किसी मुस्लिम को हल्की सी खरोंच भी आने पर प्रधानमंत्री तक को जवाब देने के लिए मजबूर करने लगता हैं।

आपको बता दें की एक आतंकी संगठन ने इस दौरान पत्र लिखकर धमकी भी दी कि अगर मुस्लिम बहुल इलाके में कांवड़ यात्रा नही रोकी गयी तो वह बरेली जंक्शन को उड़ा देगा। यहां तक कि एक मामले में दो कांवड़ियों को सिर्फ इसलिए पीटा गया कि वह मुस्लिम बहुल इलाके में ‘बोल बम’ और ‘बम भोले’ का नारा लगा रहे थे। विडम्बना देखिये यही समुदाय दिन में 5 बार लाउड स्पीकर पर अजान लगाता है बगैर इस बात का ख्याल किये की उस क्षेत्र में गैर-मुस्लिम भी रहते हैं। यहाँ तक कि रोड जाम करके नमाज पढ़ने का अधिकार मांगता है, लेकिन इन्हें कांवड़ियों से परहेज हैं।

यहाँ पढ़िये साल 2019 में कांवड़ यात्रा के दौरान अब तक हुए शिवभक्तो पर हमलों की रिपोर्ट

जौनपुर में ‘बोल बम’ नारा लगाने कांवड़ियों की पिटाई

यह घटना 22 जुलाई रात की हैं, विकास गौतम पुत्र ठाकुर प्रसाद निवासी बकिया थाना मडियाहूं विंध्याचल से जल लेकर विवेकानंद स्थित शिव मंदिर की ओर बोल बम का नारा लगाते हुए जा रहा था। जैसे ही वह नगर के मुस्लिम बहुल कजियाना मुहल्ले में पहुंचा तो आरिफ व रियाज ने उसे बोल बम का नारा लगाने से मना किया। जब वे नहीं माने तो मुस्लिम समुदाय के अन्य युवकों के साथ दो कांवड़ियों की जमकर पिटाई कर दी। दोनों बुरी तरह से घायल हो गए हैं।

नूह में कांवड़ चढ़ाने गयी लड़कियों से छेड़छाड़, विरोध करने पर मारपीट

31 जुलाई को हरियाणा के नूंह शहर के भूतेश्वर मंदिर में सुबह महाशिवरात्रि के अवसर पर कांवड़ चढ़ाने के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवकों द्वारा लड़कियों से छेड़छाड़ करने का मामला सामने आया है। इस छेड़छाड़ के दौरान जब लड़कियों के परिजनों ने विरोध किया तो आसिफ, हुसैन, नोमान, इसराइल, जुबैर, सुब्बे, नईम और हाशिम ने उनसे मारपीट की।

मुजफ्फरपुर में मस्जिद के पास महिला कांवरियों पर पथराव

मुजफ्फरपुर में बरुराज क्षेत्र में 30 जुलाई को जेहादी तत्वों द्वारा महिला कांवरियों पर पथराव किया गया। इस मामले में मुजफ्फरपुर पश्चिम के एसडीएम अनिल कुमार दास ने बताया कि जब कई लड़कियां और महिला श्रद्धालु मस्जिद के पास से गुजर रहीं थीं, तभी कुछ लोगों ने उन पर पथराव किया। बड़ी मुश्किल से इन महिलाओ की जान बचाई जा सकी थी।

इंडियन मुजाहिदीन की बरेली रेलवे स्टेशन उड़ाने की धमकी

आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन (IM) के एरिया कमांडर मुन्ने खान उर्फ ‘मुल्ला’ ने बरेली रेलवे स्टेशन के अधीक्षक सत्यवीर सिंह को एक पत्र भेज कर धमकी दी कि अगर कांवड़िये मुस्लिम बहुल इलाकों से गुजरते हैं तो वह रेलवे स्टेशन को बम से उड़ा देगा।

कांवड़िया शिविर में चोरी

दिल्ली निवासी कांवड़िया रवि हरिद्वार से अपने साथियों के साथ जल लेकर वापस लौट रहा था। 25 जुलाई की रात कांवड़ियों का जत्था भोला रोड स्थित एक सेवा शिविर में रुका था। अगले दिन आधा दर्जन से अधिक शिव भक्तों ने अपने मोबाइल और पर्स गायब देखे, जब एक संदिग्ध से पूछताछ की गयी तो उसने अपना नाम शाहरुख बताया और यह भी बताया कि दर्जनों युवक कांवड़ियों के भेषभूषा में शिविरों में चोरी की वारदात अंजाम दे रहे हैं।

कांवड़ लाने वाले इरशाद की पिटाई

यूपी के बागपत में इरशाद के साथ उसके ही समुदाय के लोगों ने मारपीट की। आरोप के मुताबिक, इरशाद धर्म की दीवार तोड़कर कांवड़ यात्रा पर गया और जल अपने घर लेकर आया था। उसका ये कदम कुछ लोगों को पसंद नहीं आया और उन्होंने इरशाद के साथ मारपीट शुरू कर दी। इस मामले में इरशाद ने कहा, मैं जल लाने हरिद्वार गया था, जब मैं वापस आया तो मेरे समुदाय के लोगों ने इस पर आपत्ति जताई और मेरे साथ मारपीट की।

यह तो इस साल की कांवड़ यात्रा की घटनाएं है, ऐसे हमले बीते कई साल से शिवभक्त कांवड़ियों पर होते रहे हैं। अगस्त 2018 में राजस्थान के सीकर जिले के फतेहपुर कस्बे में डीजे बजाते हुए काँवड़िए आ रहे थे। मुसलमानों ने डीजे बंद करने को कहा, तो काँवड़ियों ने आवाज धीमी कर दी। लेकिन, इसी के दौरान मुसलमानों की भीड़ ने उन पर पत्थर, लाठी, सरिया और तलवारों से हमला किया। सात लोग घायल हुए।

अगस्त 2018 में काँवड़ में जल भरने के लिए फ़र्रूख़ाबाद से 65 लोग, जिसमें 25 महिलाएँ भी थीं, ट्रैक्टर की ट्रॉली से पांचाल घाट को निकले। रात के एक बजे जब वो जमुरा गाँव से गुजर रहे थे तो कुछ मुसलमान अपनी छतों से पत्थर चलाने लगे। हमले से घबराए ट्रैक्टर चालक ने जब ट्रैक्टर रोका तो उन पर मुसलमानों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। फिर पुलिस आई और उन्हें सुरक्षा के साथ गाँव से बाहर निकाला गया।

प्रशासन को ऐसी घटनाओं पर तुरन्त संज्ञान लेकर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही इसका कड़ा भी संदेश देना चाहिए कि सड़क किसी के धर्म समुदाय की नही है। मुस्लिम बहुल इलाके की सड़के भी भारत देश की सीमा में आती है और इन्हें बनवाया भी भारत सरकार ने है, इसलिए कांवड़ियों को इन सड़कों पर चलने से कोई नही रोक सकता।