आईएनएक्स मीडिया केस में पूर्व वित्त एवं गृहमंत्री पी. चिदंबरम की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत याचिका नामंजूर होने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया, लेकिन वहां भी उन्हें झटका लगा। आपको बता दें कि 20 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट ने चिदंबरम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट के जज जस्टिस सुनील गौर ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए उन पर कड़ी नाराजगी जाहिर की थी।

जज ने जमानत याचिका के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई करते हुए साफ साफ शब्दों में कहा था कि पी चिदंबरम न सिर्फ़ इस मामले में मुख्य अभियुक्त हैं बल्कि पूरे मामले में मुख्य साज़िशकर्ता भी हैं। जज ने कहा था, “पी चिदंबरम जाँच एजेंसियों के साथ सहयोग करने में अक्षम रहे हैं और प्रतिक्रिया देने में टाल-मटोल करते रहे हैं।”

जस्टिस गौर के इस फैसले को लेकर कांग्रेस एवं उसके समर्थकों ने आलोचना शुरू कर दी और फैसले पर सवाल उठाने लगे। उनका तर्क था कि जज ने इस मामले की सुनवाई जनवरी में कर ली थी और फैसला भी लिखा जा चुका था, तो उन्होंने 7 महीने बाद फैसला क्यों सुनाया? उनका कहना था कि जज ने रिटायर होने से दो दिन पहले फैसला इसलिए सुनाया, ताकि आगे उन्हें कोई सरकारी लाभ मिल सके। और हुआ भी यही। जस्टिस गौर के सेवानिवृत्त होने के बाद केंद्र सरकार ने उन्हें PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट) के चेयरमैन की जिम्मेदारी सौंपी है। जस्टिस गौर पीएमएलए के चेयरमैन का पद 23 सितंबर को ग्रहण करेंगे।

केंद्र सरकार द्वारा जस्टिस गौर को नई जिम्मेदारी सौंपते ही कांग्रेस ने एक बार फिर से केंद्र सरकार और जस्टिस गौर पर हमला शुरू कर दिया है। कांग्रेस के प्रवक्ता बृजेश कलप्पा ने ट्वीट कर कहा, “किस नौकरी में आप आंसर शीट में उत्तर कॉपी-पेस्ट करके सबसे ज्यादा मार्क्स प्राप्त कर सकते हैं?” आगे उन्होंने खुद ही उत्तर देते हुए बताया, “जज की नौकरी में।” इस कांग्रेस प्रवक्ता की यह टिप्पणी इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि दुर्भाग्य से ये महोदय सुप्रीम कोर्ट में वकालत भी करते हैं।

जस्टिस गौर को पीएमएलए का चेयरमैन नियुक्त करने पर दर्द सिर्फ कांग्रेस नेताओं और उसके समर्थकों में ही नहीं है। इसका दर्द कांग्रेस शासनकाल में पद्मश्री प्राप्त कर चुके इंडिया टुडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई को भी है। उन्होंने केंद्र सरकार के इस फैसले और जज पर तंज कसते हुए कहा कि ‘इसे ही किस्मत कहते हैं। सरकार के पक्ष में फैसला लिखो और इनाम पाओ।’ मालूम हो कि ये वही पत्रकार महोदय हैं, जिन्होंने पुलवामा आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को प्रेम पत्र लिखा था। जब पूरे देशवासियों का रक्त उबाल मार रहा था।

कांग्रेस जिस जस्टिस पर लेनदेन का आरोप लगा रही है, वही जज साहब जब देश में कांग्रेस का शासन था तो उसके नेताओं के अतिप्रिय थे। गांधी-नेहरु खानदान हमेशा उन्हीं की अदालत में सुनवाई चाहता था। सिर्फ इतना ही नहीं, कांग्रेस के शीर्ष नेता भी उन्हीं के अदालत में अपनी याचिका लिस्ट होने की दुआ करते थे। जस्टिस गौर मीट कारोबारी मोईन कुरैशी के मामले से लेकर नेशनल हेराल्ड तक के मामले की सुनवाई कर चुके हैं। आपको बता दें कि नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया गांधी और राहुल गांधी मुख्य आरोपी हैं और ये दोनों लोग चाहते थे कि दिल्ली हाईकोर्ट में उनका केस जस्टिस गौर ही सुनें। वहीं, मोईन कुरैशी भी कांग्रेस का करीबी माना जाता है।