कुछ लोग कश्मीर को हर हाल में ‘जलते’ देखना चाहते हैं। जिसमें कुछ वामपंथी बुद्धिजीवी और पाकिस्तान परस्त कट्टरपंथी भी शामिल है। बता दें, जो कट्टरपंथी अभी ये सोच रहे हैं कि सेना हटने के बाद कश्मीर को अलग देश घोषित कर देंगे और उसे इस्लामिक मुल्क बना देंगे, तो ऐसे अलगाववादी और उनके समर्थक सालों से ये सोचते रहे हैं लेकिन ये ना मुमकिन था और ना मुमकिन होगा। भारत सरकार ने कश्मीर के बाशिंदों को ये मौका दिया है कि वे भी लद्दाख़ की तरह सुकून से रहें।

अब ये केवल उनको तय करना है कि वे घाटी में सुकून चाहते हैं या ताउम्र सुरक्षाबलों के घेरे में जीवन बसर करेंगे, चाहें जिस हाल में रहें, रहना भारत के साथ ही है तो फिर क्यों ना सुकून से रहें। पूरे कश्मीर के साथ ये दिक्कत नहीं है, कश्मीर में बहुसंख्यक आबादी अमनपसंद है लेकिन उनमें हैं कुछ जो अभी भी उस घाटी में हैं, वो सेना पर पत्थर फेंककर, आतंकियों के जनाज़े में शामिल होकर, आतंकियों को पनाह देकर और उनके रास्ते पर चलकर कश्मीर को जलाते रहना चाहते हैं। साथ ही उनके हमदर्द देश अलग-अलग जगहों पर रहते हुए, देश की तमाम सुविधाओं का लाभ लेते हुए अपनी ज़िंदगी जी रहे हैं लेकिन फिर भी उनके अंदर ‘आज़ाद कश्मीर’ नाम का जिन्न अंगड़ाई लेता रहता है।

कश्मीर के ऐसे ‘भटके हुए युवा’ और उनके आकाओं ने सेना पर खूब पत्थर बरसाए, तिरंगा झंडा फाड़ा, उसे जलाया क्योंकि देश के पहले प्रधानमंत्री की एक ग़लती ने उनको ये आज़ादी दे दी थी, जो अब छीन चुकी है। अब ये अपराध की श्रेणी में है और इसकी सज़ा भी मिलेगी। ऐसे में अब उम्मीद है कि ऐसे भटके हुए युवा घाटी में पाकिस्तान और आईएस का झंडा फहराने के बजाय तिरंगे को सलाम करेंगे। वरना अलगाववाद की आग को हवा देने वालों को ‘आज़ादी’ मायनों में मिलती रहेगी।

भारत सरकार और देश के लोग सहर्ष कश्मीर और कश्मीरियों को अपना रहे हैं लेकिन, अलगाववाद की जंग छेड़ने वाले उन्हीं में से ‘कुछ’ कश्मीरियों के साथ कोई हमदर्दी नहीं। वैसे इन अलगाववादियों को जैसे पहले पाक और कुछ बुद्धजीवियों का समर्थन प्राप्त था, वो बंद नहीं हुआ है। ये बुद्धजीवी अभी भी दिल्ली (ख़ासकर मीडिया) में बैठे इस बात का इंतज़ार कर रहे हैं कि कश्मीर फिर से अशांत हो जाए ताकि सरकार से सवाल किए जाएँ। सरकार की ख़िलाफ़त का आलम ये है कि इनकी नज़रें बेसब्री से कश्मीर में वो मंज़र देखना चाहती जब वहाँ के लोग सेना पर फिर से पत्थर बरसाएँ, गोलियाँ चलें, लोगों की जान जाए ताकि ये लोग उनकी लाशों में अपने लिए सुकून ढूँढ सकें।

कश्मीर की सुखद तस्वीरें जो सोशल मीडिया पर हो रही है वायरल

CRPF की सिपाही से हाथ मिलाता कश्मीरी लड़का

इनको कश्मीर में सेना से तो दिक्कत है लेकिन कभी इनको पत्थरबाज़ी से दिक्कत नहीं हुई, कभी राइफ़लमैन औरंगजेब की जान जाने पर तकलीफ़ नहीं हुई, मासूमों के हाथ में पत्थर देकर अपने देश के ख़िलाफ़ खड़ा करने वाले अलगाववादियों और इन युवाओं को आगे कर राजनीति करने वाले नेताओं से कभी दिक्कत ना हुई, इनको भारत में रहकर कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान की भाषा बोलने वाले ‘दो मुँहे सांपों’ से दिक्कत नहीं हुई, क्योंकि ये कुंठा में इस क़दर घुले हैं कि कश्मीर में जवानों की शहादत की ख़बर का इंतज़ार करते हैं ताकि सरकार के प्रति ज़हर उगलने का मौक़ा मिल सके।

इन जैसे लोग सालों से चाहते हैं कि कश्मीर कभी शांत न हो, इनके अंदर की जाहिलियत ने इनको इतना बीमार कर दिया है जिसका इलाज सम्भव नहीं है। इसलिए, कश्मीर के युवाओं को अब तय करना है कि ऐसे दो मुँहे सांपों के लिए वे ज़हर फैलाने का ज़रिया बनेंगे या अपनी और अपने परिवार की जीवनशैली को बेहतर बनाने की कोशिश में सहयोग का रवैया अपनाएँगे। #Article370 #JammuKashmir

लेखक कमल तिवारी युवा पत्रकार है, यह उनकी फेसबुक वॉल से लिया गया है