Huffpost के एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक Binoo John ने हाल में भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाफ ‘Indian Cricket Team Wearing Military Caps Is A Dangerous Sign‘ के शीर्षक से एक आपत्तिजनक लेख लिखा है जिसमें भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच तीसरे एकदिवसीय मैच के दौरान भारतीय क्रिकेट टीम के आर्मी कैप पहनने की भत्सना की गई है और इसे एक घातक प्रयास बताया है।

लेखक महोदय ‘Under a Cloud: Life in Cherrapunji, wettest place on Earth’ एक किताब लिख चुके हैं लेकिन ये लेख किसी स्थान की भौगोलिक स्थिति के बारे में नहीं है कि जो लोग अनभिज्ञ हैं यथावत मान लेंगे। लेखक महोदय इस विषय में इतने ज्यादा अज्ञान हैं कि इन्हें मालूम ही नहीं कि लगभग हर देशों के क्रिकेटर समय समय पर किसी दुखद घटना की निंदा के लिए शोक प्रकट करते हुए काली पट्टी बांधते आये हैं चूंकि इस बार आतंक का शिकार भारतीय जवान थे इसलिए आर्मी कैप पहनी गई।

लेखक महोदय ने अपने पहले पैराग्राफ में लिखा है “they wore military caps as a sign of solidarity with the 40 troopers of the Central Reserve Police Force (CRPF) killed in Kashmir’s Pulwama last month.
पहली बात तो लेखक हमारे जवानों की शहादत का अपमान ‘Killed‘ लिखकर कर रहा है दूसरी बात लेखक महोदय ये बताना ही भूल गए कि ये आतंकी हमला था स्वभाविक मृत्यु नहीं थी किसी की। लेखक का पूर्वाग्रह इसी एक वाक्य से सिद्ध हो जाता है।

लेखक महोदय आगे लिखते हैं “Firstly, it was not necessary to wear camouflage caps to publicise the cricketers’ acts of charity, as the players contributing a day’s salary to the family of the dead soldiers could have just made an announcement to that effect.” चलिए मान लिया कि मिलिट्री कैप पहनना ज़रूरी नहीं था कि टीम शहीदों के लिए एक दिन की सैलरी दान कर रही है। लेकिन इससे लेखक महोदय को क्या समस्या है? क्या भारतीय क्रिकेट टीम ने आज गेंद-बल्ले की बजाय बन्दूक उठा ली थी? नहीं! लेखक महोदय की जानकारी के लिए एक बात बता दूँ कि भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और मौजूदा टीम के महत्वपूर्ण सदस्य लेफ्टिनेंट महेंद्र सिंह धोनी भी ‘इंडियन आर्मी’ का हिस्सा हैं इस हिसाब से अगर कोई पूर्वाग्रह से ग्रस्त लेखक टिप्पणी करता है तो उसे इसकी अज्ञानता ही कहा जायेगा।

यदि आपको अभी भी समझ में नहीं आया कि लेखक महोदय की समस्या कहाँ है तो उनकी आगे के वाक्य ये सिद्ध कर देंगे – “such acts of charity were not made under the cover of creeping militarism or ultra-nationalism, like it has been done now.”

जी हां! इनकी समस्या भी The Wire की तान्या झा जैसी ‘अति राष्ट्रवाद’ ही है। यही वजह है कि इन्होंने ऐसा लेख लिखा है।

लेखक महोदय इतने बड़े अज्ञानी हैं कि इन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम के इस काम को चुनावी स्टंट तक बता दिया है : “There can be little doubt that the team has been nudged towards this display of jingoism by the prevailing anti-Pakistansentiment, as well as the heated political scenario due to the approaching elections”.

महोदय ने इसे ‘Anti-Pakistan’ से जोड़कर देखा है जबकि ये सिर्फ आतंकवाद के विरोध में था। यदि महोदय को इससे आपत्ति हो रही है तो इसका सीधा सा मतलब है कि लेखक महोदय ये मानते हैं कि पाकिस्तान और आतंकवाद एक दूसरे का ही नाम हैं। दूसरी बात, यदि लेखक महोदय को लगता है कि पूरी भारतीय क्रिकेट टीम भाजपा समर्थक है और चुनाव को देखते हुए ऐसा किया है तो लेखक किसी मानसिक व्याधि से पीड़ित हैं। भारत में योग और आयुर्वेद के माध्यम से इलाज संभव है कृपया इस प्रकार कुंठित होना ठीक नहीं है, आप भारत आइये आपके इलाज का खर्च वहन किया जाएगा।

महोदय ने आगे विराट कोहली को ‘Kohli is so superstitious ‘ बताया है, विराट क्या हैं ये उनका खेल बताता है और दुनियाँ भर से उनके प्रशंसक है, इन जैसे लेखकों को ये बताने की जरूरत नहीं कि विराट क्या हैं। महोदय आगे लिखते हैं – “In case it fails, and Pakistan wears its own military caps during the World Cup, will the Indian team walk of the tournament?” सबसे बड़ी बात तो ये है कि पाकिस्तान मिलिट्री कैप क्यों पहनेगा? क्या आतंकवादियों ने पाकिस्तानी सैनिकों पर हमला किया है जिसकी शहादत में वे ऐसा करेंगे? यदि नहीं तो लेखक को इस पूर्वाग्रह से निकलने की ज़रूरत है। ये लेख लेखक की इस सम्बंध में अपरिपक्वता को दर्शाता है, विराट कोहली, क्रिकेट टीम और भारतीय राष्ट्रवाद के प्रति घृणा को दर्शाता है।

इस घटना पर पाकिस्तान की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई है : ‘Pakistan Demands ICC Action Against Indian Cricket Team For Wearing Military Caps’. पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने ICC से भारतीय टीम पर एक्शन लेने की अपील की है। उनके सूचना प्रसारण मंत्री फवाद चौधरी ने धमकी देते हुए कहा है कि पाकिस्तान क्रिकेट टीम भी कश्मीर के समर्थन में काली पट्टी बांधकर खेलेगी : “And if the Indian team will not be stopped, Pak cricket team should wear black bands to remind The World about Indian atrocities in Kashmir.”

चलिए कुछ घटनाओं को जोड़कर एक नजर देखते हैं :

  1. सन 2007 के क्रिकेट विश्व कप के दौरान पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कोच बॉब बूलमर की रहस्यमय परिस्थितियों में हत्या हो जाती है और नाम दिया जाता है दिल के दौरे का। पाकिस्तान क्रिकेट टीम के सदस्य संदिग्धता के दायरे में आते हैं लेकिन इस टीम को आतंकी या हत्यारा नहीं माना जाता है।

  2. ठीक दो वर्ष बाद, 3 मार्च 2009 को श्री लंका क्रिकेट टीम पर पाकिस्तान में आतंकी हमला हुआ था। ये हमला एक बस पर हुआ था जिसमें श्री लंका की टीम सवार थी। अमूमन दोनो टीमों की बसें एक साथ जाती हैं लेकिन हमले से पहले जानबूझकर पाकिस्तान टीम को रोक लिया ताकि एहतियात में कोई पाकिस्तानी खिलाड़ी न मारा जाए। ये सब पूरी प्लानिंग के साथ किया गया इसके बावजूद पाकिस्तान टीम से पूछताछ नहीं की गई।

  3. जुलाई 2016 में पाकिस्तान क्रिकेट टीम ने भी अब्दुल सत्तार एडी की मृत्यु पर शोक में काली पट्टी बांध रखी थी। ऐसा हर देश की टीम करती है इसमें कोई बुराई नहीं है, काली पट्टी के अलावा पिंक कैप वगैरह का भी चलन है। यदि भारतीय टीम ने एक दिन के लिए मिलिट्री कैप पहन ली तो इसमें रोना धोना क्यों? कारण तो आतंकवादी हमले में शहीद हुए जवानों के लिए था नाकि पाकिस्तान का नेस्तनाबूद करने के लिए।

  4. यदि पाकिस्तान क्रिकेट टीम कश्मीर के लिए काली पट्टी बांधेगी तो सही मायनों में खेल का राजनीतिकरण ये होगा क्योंकि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है जिस पर पाकिस्तान की तरफ से आतंकी वारदातें होती आई हैं। पाकिस्तान ऐसे करके कश्मीर में होनी वाली आतंकी वारदातों, अपने कोच बॉब वूल्मर की हत्या और श्री लंका क्रिकेट टीम पर आतंकी हमला करवाने में अपनी भूमिका की पुष्टि स्वयं कर रहा है।

  5. यदि उपरोक्त घटनाओं से अनभिज्ञ कोई लेखक भारतीय टीम के खिलाफ लिख रहा है तो वो स्वयं को एक बेवकूफ ही सिद्ध करने पर तुला हुआ है।

  6. ईरान, अफ़ग़ानिस्तान और भारत में तमाम आतंकी हमले करवाने वाला पाकिस्तान अगर काली पट्टी बांधकर आतंकी हमलों की निंदा करने की वकालत करता है तो इससे बड़ी हास्यास्पद बात कोई है ही नहीं।

एक विशेष खांचे में ढले हुए पत्रकार या तो अपने ज्ञान चक्षुओ को खोलकर किसी घटना की विवेचना किया करें नहीं तो उनके प्रोपगंडा की अंत्येष्टि हम कर देंगे। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सेना, विराट कोहली के नेतृत्व में भारतीय क्रिकेट टीम ने देश को एक ही बात सिखाई है : ‘Aggression is the best defence’. ये नया भारत है पत्रकार साहब! आतंकियों को घर में घुसकर मारेगा, विरोधी टीम की बखिया भी उधेडेगा और आप जैसे अज्ञान पत्रकारों के प्रोपगंडा का भी अंतिम संस्कार करेगा। Mind It !!

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