कांग्रेस ने एक बार फिर जनता के सामने झूठे तथ्य पेश कर गुमराह करने का प्रयास किया है। पूर्व सैनिकों के नाम पर सरकार के खिलाफ आम जनता को भड़काने का काम किया है। पूर्व सैन्य अफसरों की ओर से राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखे जाने का दावा करते हुए कांग्रेस ने ट्वीट करते हुए बीजेपी पर इसके लिए निशाना साधा। कांग्रेस ने कहा कि मोदी वोट के लिए सैनिकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन सैनिकों का स्टैंड साफ है कि वो भारत के साथ हैं, न कि बीजेपी के।

मोदी सरकार के अंधविरोध में होने के कारण इस अफवाह को NDTV से लेकर जनसत्ता जैसे लगभग सभी प्रमुख मीडिया चैनल्स ने तत्परता से प्रकाशित किया। इसमें दावा किया गया कि चुनाव प्रचार के दौरान सेना और सैनिकों की वर्दी का इस्तेमाल करने पर कई सैन्य अधिकारियों ने नाराजगी जाहिर की है।

राष्ट्रपति भवन ने खंडन करते हुए इस प्रकार के किसी भी पत्र के मिलने की खबरों से इंकार कर दिया है। राष्ट्रपति भवन ने स्पष्ट किया है कि तीनों सेनाओं के 8 पूर्व प्रमुखों सहित 156 पूर्व सैन्य अधिकारियों द्वारा लिखी गई कोई चिट्ठी उन्हें नहीं मिली है।

एक तरफ राष्ट्रपति भवन से जुड़े सूत्रों ने पूर्व सैन्य अफसरों की ओर से राष्ट्रपति को लिखे पत्र मिलने से इनकार किया है। वहीं दूसरी तरफ भी पूर्व एयर चीफ मार्शल एनसी सूरी और पूर्व जनरल एसएफ रोड्रिग्स ने ऐसे किसी भी तरह के पत्र पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया है। जनरल रोड्रिग्स ने खबर का खंडन करते हुए कहा कि वो अराजनीतिक व्यक्ति हैं, पता नहीं कौन यह झूठ फैला रहा है।

इसके अलावा एयर चीफ मार्शल एनसी सूरी और पूर्व थलसेना उप प्रमुख एम एल नायडू ने इस तरह के किसी भी खत को लिखने से इनकार किया है। न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में एयर चीफ मार्शल एनसी ने कहा है, “मैं उस पत्र में जो कुछ भी लिखा गया है, उससे सहमत नहीं हूँ।”

हालांकि, मेजर जनरल हर्ष कक्कड़ और ग्रुप कैप्टन क्रिस्टोफर ने कहा कि उन्होंनें इस पत्र में अपना नाम शामिल करने की सहमति दी है और वे इसके हस्ताक्षरी भी हैं।

ज्ञात हो कि राष्ट्रपति को भेजी गई चिठ्ठी पर जिन लोगों के हस्ताक्षर बताए गए हैं, उनमें पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) एसएफ रोड्रिग्स, जनरल (सेवानिवृत्त) शंकर राय चौधरी और जनरल (सेवानिवृत्त) दीपक कपूर, भारतीय वायु सेना के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल (सेवानिवृत्त) एन सी सूरी सहित 8 पूर्व चीफ आफ स्टॉफ के नाम भी शामिल हैं।

बता दें कि यह पत्र एक पूर्व सैन्य अधिकारी मेजर प्रियदर्शी चौधरी ने लिखा है। कुछेक पूर्व अधिकारियों ने इस पत्र को लेकर सहमति भी जताई है, लेकिन सवाल यह है कि क्या कोई भी व्यक्ति किसी के अनुमति के बिना उसका नाम किसी पत्र में शामिल कर सकता है? वो भी पूर्व सैन्य प्रमुखों के नाम बिना उनकी अनुमति के शामिल किया जाना गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

खैर, अब तो राष्ट्रपति भवन और पूर्व सैन्य प्रमुखों ने कांग्रेस के इस साजिश को तो बेनकाब कर लिया है। तो क्या राष्ट्रपति और पूर्व सैन्य अधिकारियों के बयान के बाद कांग्रेस पार्टी स्वीकार करेगी कि सेना का राजनीतिकरण मोदी सरकार नहीं बल्कि वो स्वयं कर रही है? कांग्रेस के इस प्रोपेगैंडा में शामिल मसीहा पत्रकार बरखा दत्त समेत सभी मीडिया हाउस क्या आम जनता से माफी माँगेंगे?

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